स्कूल बसों की ‘निगरानी’ पर मानवाधिकार आयोग सख्त, नूंह की घटना के बाद हरियाणा में CCTV की होगी दोबारा पड़ताल
Nuh School Case: आयोग ने नोटिस जारी कर अधिकारियों से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
Nuh School Case: हरियाणा के नूंह जिले के एक निजी स्कूल में सात वर्षीय छात्रा के साथ कथित अमानवीय व्यवहार के मामले ने अब पूरे हरियाणा में स्कूल सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए स्कूल बसों और शैक्षणिक परिसरों में लगे सीसीटीवी कैमरों की वास्तविक स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है।
आयोग ने साफ कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल कागजों में नहीं, जमीन पर दिखाई देनी चाहिए। आयोग की पूर्ण पीठ चेयरमैन न्यायमूर्ति ललित बत्रा तथा सदस्य कुलदीप जैन और दीप भाटिया ने सुनवाई के दौरान पाया कि जिला शिक्षा अधिकारी और स्कूल प्रबंधन की रिपोर्टों में भारी विरोधाभास हैं। इसी को लेकर आयोग ने अधिकारियों को दोबारा निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।
आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि स्कूल बच्चों के लिए सुरक्षित और सहयोगात्मक वातावरण का प्रतीक होने चाहिए। किसी भी प्रकार का शारीरिक दंड न केवल बाल संरक्षण कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि यह बच्चे के सम्मान और शिक्षा के अधिकार पर भी सीधा हमला है। आयोग ने हरियाणा सरकार की सुरक्षित स्कूल वाहन नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा स्कूल परिसर से लेकर परिवहन तक हर स्तर पर सुनिश्चित करना संस्थानों और प्रशासन दोनों की साझा जिम्मेदारी है।
रिपोर्टों में विरोधाभास ने बढ़ाई चिंता
सुनवाई के दौरान सामने आया कि निरीक्षण टीम को स्कूल परिसर में केवल दो बसें मिलीं। इनमें से एक बस में सीसीटीवी कैमरा ही नहीं था, जबकि दूसरी बस में कैमरा चालू है या रिकॉर्डिंग कर रहा है, इसका कोई प्रमाण स्कूल प्रबंधन नहीं दे सका। इसके उलट स्कूल प्रबंधन ने दावा किया कि संस्थान की सभी छह बसों में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं और रिकॉर्डिंग भी सुरक्षित रखी जा रही है। इसी विरोधाभास पर आयोग ने नाराजगी जताते हुए जिला शिक्षा अधिकारी, नूंह को सभी बसों और स्कूल परिसर का दोबारा निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट देने के आदेश दिए। आयोग ने यह भी कहा कि केवल कैमरे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका नियमित रूप से काम करना और रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है।
छात्रा से मारपीट के मामले पर भी सवाल
यह पूरा मामला नूंह जिले के गांव छछेरा स्थित एक निजी विद्यालय से जुड़ा है, जहां कक्षा तीसरी की सात वर्षीय छात्रा के साथ कथित रूप से शारीरिक दंड देने का मामला सामने आया था। आरोप है कि छात्रा ब्लैकबोर्ड पर सवाल हल नहीं कर सकी, जिसके बाद अध्यापिका ने उसे डंडे से पीटा। बच्ची के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए थे। पीड़िता के परिवार का आरोप है कि शिकायत के बावजूद स्कूल प्रबंधन ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई और पुलिस कार्रवाई भी समय पर नहीं हुई। इसी मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए मानवाधिकार आयोग ने सुनवाई शुरू की थी। सुनवाई के दौरान पुलिस अधीक्षक, नूंह भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित हुए। आयोग ने पुलिस जांच की गति और कार्रवाई पर असंतोष जताते हुए पूरे मामले की पुनः जांच कर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
पूरे हरियाणा में चलेगा निरीक्षण अभियान
मानवाधिकार आयोग ने राज्यभर की जिला एवं उपमंडल स्तरीय समितियों को स्कूल बसों और वाहनों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। इन समितियों में उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, जिला शिक्षा अधिकारी, उपमंडल मजिस्ट्रेट, रोडवेज अधिकारी और परिवहन विभाग के प्रतिनिधि शामिल हैं। आयोग ने कहा है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि हर स्कूल बस में सीसीटीवी कैमरे लगे हों, वे कार्यशील हों, रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जा रही हो और पूरा वाहन निगरानी के दायरे में हो। असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा के अनुसार सभी संबंधित अधिकारियों को 30 जुलाई की अगली सुनवाई से एक सप्ताह पहले अनुपालन रिपोर्ट आयोग को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
