जांच रिपोर्ट में अस्पताल दोषी

कोरोना पॉजिटिव बता पूर्व एयरफोर्स अधिकारी को आधी रात को अस्पताल से निकाला था

जांच रिपोर्ट में अस्पताल दोषी

नवीन पांचाल/हप्र

गुरुग्राम, 4 अगस्त

एयरफोर्स अधिकारी को कोरोना पाॅजिटिव बताकर आधी रात को अस्पताल से बाहर निकालने के मामले में जांच कमेटी ने अस्पताल को दोषी बताया है। कमेटी ने महामारी अधिनियम के उल्लंघन के आरोप में अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई करने की सिफारिश की है। वहीं शिकायतकर्ता ने जांच कमेटी की रिपोर्ट को कम आकलन वाली बताते हुए अस्पताल प्रबंधन पर पक्षपात करने आरोप भी लगाया है। इस मामले में अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर के लिए भी शिकायत दे रखी है।

मामले के अनुसार, एयरफोर्स से रिटायर्ड 71 वर्षीय सुभाषचंद्र वैद को हड्डियों से संबंधी बीमारी के चलते 18 जून को अस्पताल में दाखिल करवाया गया था। ऑप्रेशन से पहले देर रात उनकी कोरोना रिपोर्ट आई, जिसमें उन्हें पाॅजिटिव बताया गया। 

रिटायर्ड अधिकारी ने आरोप लगाय कि अस्पताल प्रबंधन ने रात 12 बजे उन्हें सोते हुए उठाकर जबरन डिस्चार्ज कर दिया तथा जांच के नाम पर 4,600 रुपये की भी मांग की। जिस समय उन्हें अस्पताल से निकाला गया वे अकेले थे और उन्होंने कुछ और घंटे अस्पताल में रहने की इजाजत मांगी ताकि सुबह होने पर किसी वाहन की व्यवस्था कर डीएलएफ स्थित अपने घर पर जा सकें। उन्होंने बताया कि  अस्पताल प्रबंधन किसी भी सूरत में उन्हें रखने के लिए तैयार नहीं हुआ और रात ढाई बजे उन्हें अकेले घर जाना पड़ा। इस शिकायत पर उनकी सरकारी स्तर पर कोरोना की जांच की गई तो उनकी रिपोर्ट नेगेटिव मिली। जिसके बाद उन्होंने इसकी शिकायत कर दी। 

अस्पताल में करना चाहिये था आइसोलेट

इस पूरे मामले जांच नोडल अधिकारी डाॅ़ अनुज गर्ग व डिप्टी सिविल सर्जन डॉ़ प्रदीप कुमार के नेतृत्व वाली कमेटी ने की। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि रिपोर्ट पाॅजिटिव आने पर मरीज को अस्पताल में आइसोलेट किया जाना चाहिए था। इसके विपरीत मरीज को जबरन आधी रात को बाहर किया जाना उचित नहीं। साथ ही महामारी अधिनियम के उल्लंघन का भी अस्पताल प्रबंधन को दोषी बताया गया। 

शिकायतकर्ता को रिपोर्ट पर आपत्ति 

एससी वैद ने जांच कमेटी के अध्यक्ष डाॅक्टर अनुज गर्ग पर अस्पताल प्रबंधन का बचाव करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कई बार लिखित शिकायत देने के बाद भी डॉ़ अनुज गर्ग ने सुनवाई नहीं की। जब मंडल आयुक्त अशोक सांगवान ने स्वास्थ्य अधिकारियों को फटकार लगाई तो मजबूरी में उन्हें जांच करनी पड़ी। उनके अनुसार उन्होंने सीएमओ के समक्ष अपनी लिखित आपत्ति जता दी है। यदि सुनवाई नहीं हुई तो अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा।

''कमेटी की रिपोर्ट मिल गई है। अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है। घोर लापरवाही बरतते हुए अस्पताल ने गैरजिम्मेदारी वाला कार्य किया है। यदि उन्हें फिर भी जांच अधिकारी पर विश्वास नहीं है तो दूसरी टीम से जांच करवा दी जाएगी।''

-डॉ़ विरेंद्र यादव, सीएमओ 

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