रेवाड़ी में रंगों के पावन पर्व होली के अवसर पर हिन्दी सेवा समिति ने नाई वाली चौक स्थित सैंड पाइपर टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स के सभागार में भव्य 'होली मिलन एवं कवि सम्मेलन' का आयोजन किया। समारोह में साहित्य, हास्य और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। कवियों ने अपनी रचनाओं से फागुन की मस्ती बिखेरी। कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षाविद् प्रो. रमेश चंद्र शर्मा ने की। त्रिलोक चंद फतेहपुरी के काव्य संग्रह 'काव्य मंथन' का विमोचन भी किया गया।
संपूर्ण समारोह का मुख्य आकर्षण अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि हलचल हरियाणवी रहे, जिन्होंने अपनी ठेठ हरियाणवी शैली और तीखे कटाक्षों से श्रोताओं को लोटपोट कर दिया। उन्होंने 'मौसम है आशिकाना, मदहोश फिजा है' कविता पढ़ी। कवि त्रिलोक चंद फतेहपुरी ने हास्य के मुक्तक प्रस्तुत कर मनोरंजन किया।
डा. देवी राम शर्मा और गौतम इलाहाबादी ने रचनाओं 'उल्टे सारे हो रहे, आज जगत में काम-दशरथ हैं, बनवास में घर में रहते राम' के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार किया। गजलकार राजेश भुलक्कड़ ने 'कपड़ों पर यदि रंग ना हो तो कैसी होली—बच्चे नंगे धड़ंग न हो तो कैसी होली' कविता प्रस्तुत की। गोपाल वशिष्ठ ने गीतों के माध्यम से फागुन के पारंपरिक उल्लास को जीवंत किया। पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी धर्मवीर सिंह बल्डोदिया ने 'कोई मंदिर में जाता, कोई गिरजा जाता है—पीरों फकीरों की दुआ का वह प्रसाद लाता है' रचना के माध्यम से प्रेम का संदेश दिया।
सैंड पाइपर टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स के मैनेजर महेंद्र सिंह नंगलिया ने सभी काव्य मनीषियों और श्रोताओं के माथे पर चंदन का तिलक लगाकर होली की बधाई दी। समारोह में संजय लखानी, डॉ. ओमप्रकाश, संदीप कुमार, नवीन कुमार, उमेद सिंह, रमेश कुमार, नवरंग शर्मा आदि मौजूद रहे।

