लक्ष्मीनारायण दिव्यधाम में नवकुंडीय यज्ञा के साथ मनाया होली पर्व
सूरजकुंड मार्ग स्थित लक्ष्मीनारायण दिव्यधाम. सिद्धदाता आश्रम में होली महापर्व श्रद्धा, भक्ति और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मनाया गया। देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना, नवकुण्डीय यज्ञ और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। आश्रम...
सूरजकुंड मार्ग स्थित लक्ष्मीनारायण दिव्यधाम. सिद्धदाता आश्रम में होली महापर्व श्रद्धा, भक्ति और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मनाया गया। देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना, नवकुण्डीय यज्ञ और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
आश्रम के अधिष्ठाता एवं श्रीरामानुज संप्रदाय की तीर्थपीठ इंद्रप्रस्थ एवं हरियाणा के पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य के सान्निध्य में विश्व शांति, समृद्धि और लोकमंगल के लिए विशेष नवकुंडीय यज्ञ आयोजित किया गया। स्वामीजी ने वैदिक विधि-विधान से आहुति अर्पित करते हुए जनकल्याण की कामना की। आश्रम में रामानुजाचार्य स्वामी सुदर्शनाचार्य महाराज द्वारा होली महापर्व पर शुरू की गई हवन की प्राचीन परंपरा को स्वामीजी ने आगे बढ़ाया है। इस अवसर पर स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य ने कहा कि होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि भक्त प्रह्लाद की अटूट आस्था और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है।
उन्होंने बताया कि जब अहंकार और अधर्म के प्रतीक हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र की भक्ति को रोकना चाहा, तब होलिका की अग्नि भी सच्चे भक्त का कुछ नहीं बिगाड़ सकी। यह पर्व सिखाता है कि जो ईश्वर की शरणागत पा जाते हैं, उनके सभी संकट स्वत: दूर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि कलयुग में मनुष्य के लिए सबसे सरल और अंतिम उपाय समर्पण या शरणागति है।

