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हथीन के छायसां में हैपेटाइटिस का प्रकोप, 15 मौतों के बाद विधानसभा में गूंजेगा मामला

पलवल जिले के गांव छायसां में हैपेटाइटिस बी और सी का प्रकोप लगातार गहराता जा रहा है। अब तक 15 लोगों की मौत के बाद हालात चिंताजनक हो चुके हैं। दिल्ली के करीब बसे इस मुस्लिम बहुल गांव में 60...

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पलवल के गांव छांयसा में निरीक्षण करते स्वास्थ्य विभाग हरियाणा की टीम के सदस्य डॉ. सुशील माही, डॉ. डौली गंभीर व अन्य।
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पलवल जिले के गांव छायसां में हैपेटाइटिस बी और सी का प्रकोप लगातार गहराता जा रहा है। अब तक 15 लोगों की मौत के बाद हालात चिंताजनक हो चुके हैं। दिल्ली के करीब बसे इस मुस्लिम बहुल गांव में 60 से अधिक लोग संक्रमण की चपेट में हैं और आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों में भय और असुरक्षा का माहौल है।

स्थानीय विधायक ने स्पष्ट किया है कि इस पूरे मामले और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र में प्रमुखता से उठाया जाएगा। गांव में 865 परिवार निवास करते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने 15 में से 7 मौतों को हैपेटाइटिस बी से संबंधित माना है। हाल ही में 4 नए मामलों की पुष्टि हुई है, जिनमें हैपेटाइटिस सी के मरीज भी शामिल हैं। फिलहाल 7 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं और उनकी हालत पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

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प्रारंभिक जांच में दूषित पेयजल और संभावित रक्त संक्रमण को बीमारी फैलने का मुख्य कारण माना गया है। अब तक 1107 लोगों का उपचार किया जा चुका है, 2000 ग्रामीणों की स्क्रीनिंग की गई है और 1700 लोगों के रक्त नमूने लिए गए हैं। करीब 1200 लोगों को बचाव के इंजेक्शन लगाए गए हैं।

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केंद्र और राज्य की टीमें डटीं

पेयजल के 100 नमूनों में से 57 असुरक्षित पाए गए हैं। इसके बाद क्लोरीन की गोलियां वितरित की गईं और पूरे गांव में फॉगिंग करवाई गई। केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त टीमें गांव में तैनात हैं। उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने बताया कि कई मरीजों में तीव्र लिवर फेलियर और मल्टी ऑर्गन फेलियर जैसी गंभीर स्थिति सामने आई है, जिससे हालात की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

तीव्र लिवर फेलियर के मामले मिले, स्थिति गंभीर : डीसी

पलवल (हप्र) : गांव छायसां में हैपेटाइटिस बी और सी संक्रमण के बढ़ते मामलों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। डीसी डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने बताया कि जांच के दौरान कई मरीजों में तीव्र लिवर फेलियर की स्थिति सामने आई है।

ऐसे मामलों में जीवन रक्षक संकेत तेजी से गिरते हैं और मल्टी ऑर्गन फेलियर का खतरा उत्पन्न हो जाता है, जिससे हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। प्रशासन ने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य की आपात स्थिति मानते हुए निगरानी और उपचार व्यवस्था को और मजबूत किया है। स्वास्थ्य विभाग अब तक 7 मौतों की पुष्टि कर चुका है, हालांकि ग्रामीणों का दावा है कि संख्या इससे अधिक हो सकती है। संक्रमण के लगातार फैलाव से गांव और आसपास के क्षेत्रों में भय और असमंजस का माहौल है। कई परिवार एहतियात के तौर पर अपने स्तर पर भी जांच और उपचार की जानकारी जुटा रहे हैं।

जांच, उपचार और सख्त निगरानी

केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त टीमें गांव में तैनात हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा प्रत्येक मरीज की मेडिकल समरी तैयार की जा रही है। अब तक 1107 लोगों का उपचार, 2000 की स्क्रीनिंग और 1700 रक्त नमूनों की जांच की जा चुकी है। 4 मरीजों में हैपेटाइटिस सी की पुष्टि हुई है। पेयजल के 100 में से 57 नमूने असुरक्षित पाए गए, जिसके बाद क्लोरीन की गोलियां वितरित की गईं और पूरे गांव में फॉगिंग अभियान चलाया गया। करीब 1200 लोगों को हेपेटाइटिस से बचाव के इंजेक्शन लगाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि स्थिति पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है और आवश्यकता अनुसार अतिरिक्त मेडिकल टीमें भी तैनात की जाएंगी।

नूंह में भी हाई अलर्ट

नूंह (निस)  : पलवल के हथीन उपमंडल के छायंसा गांव में पिछले 15 दिनों के भीतर संदिग्ध हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमण से 12 लोगों की मौत के बाद मेवात क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है। मृतकों में 5 स्कूली बच्चे भी बताए जा रहे हैं।

ग्रामीणों का दावा है कि मौतों का आंकड़ा 20 तक हो सकता है, जबकि प्रशासन ने अब तक 7 मौतों की पुष्टि की है। स्थिति को देखते हुए नूंह स्वास्थ्य विभाग ने जिले में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सर्वे और जांच अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। नोडल अधिकारी डॉ. मनप्रीत तेवतिया के अनुसार जिले में हेपेटाइटिस बी के 88 और हेपेटाइटिस सी के 77 मरीजों का इलाज चल रहा है। जच्चा बच्चा केंद्रों पर अनिवार्य जांच और टीकाकरण सुनिश्चित किया जा रहा है तथा पिछले एक वर्ष के रिकॉर्ड की समीक्षा के आदेश दिए गए हैं।संक्रमित सुइयों का बार-बार उपयोग और नशे की लत को संक्रमण का संभावित कारण माना गया है।

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