Haryana News : 11 स्टेशनों पर न टिकट, न पानी... फिर कैसे बढ़ेंगे हाइड्रोजन ट्रेन के यात्री?
86 किलोमीटर के मार्ग में केवल गोहाना स्टेशन पर टिकट, पेयजल और शेड की व्यवस्था, 25 रुपये किराये के बावजूद नहीं बढ़ रहीं सवारियां
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के रूप में शुरू की गई जींद-सोनीपत रेल सेवा आधुनिक तकनीक और सस्ते किराये के बावजूद यात्रियों को आकर्षित नहीं कर पा रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह 86 किलोमीटर लंबे इस मार्ग के 12 में से 11 स्टेशनों पर टिकट, पेयजल और शेड जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जुलाई को जींद में आयोजित समारोह में इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।
जींद से सोनीपत के बीच कुल 12 रेलवे स्टेशन हैं। इनमें केवल गोहाना स्टेशन पर टिकट, पेयजल और शेड जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। शेष 11 हाल्ट स्टेशनों पर न टिकट बिक्री की व्यवस्था है, न पीने के पानी की सुविधा और न ही धूप-बारिश से बचाव के लिए पर्याप्त शेड। अधिकांश स्टेशन ठेका आधारित टिकट बिक्री व्यवस्था वाले हैं, जहां अब तक ठेकेदार नहीं मिल सके हैं। इसका सीधा असर यात्रियों पर पड़ रहा है।
15 फीसदी कमीशन से नहीं मिल रहे ठेकेदार
रेलवे से जुड़े जानकारों के अनुसार विभाग कई बार टिकट बिक्री के लिए नोटिस जारी कर चुका है, लेकिन केवल 15 प्रतिशत कमीशन और कम यात्री संख्या के कारण कोई भी व्यक्ति यह ठेका लेने को तैयार नहीं होता। अधिकांश प्लेटफॉर्म दिनभर सुनसान पड़े रहते हैं। कई स्टेशनों पर लगी सोलर लाइटें भी चोरी हो चुकी हैं और बैठने के लिए बेंच तक नहीं हैं। सफीदों क्षेत्र के भंभेवा हाल्ट पर ही प्लेटफॉर्म के किनारे विकसित पेड़ दिखाई देते हैं। पूरे रेलमार्ग में केवल गोहाना स्टेशन पर ही यात्रियों की अपेक्षाकृत अधिक चहल-पहल दिखाई देती है।
सस्ता किराया भी नहीं बढ़ा सका यात्रियों की संख्या
जींद से सोनीपत तक 86 किलोमीटर की यात्रा का किराया मात्र 25 रुपये है। ट्रेन में राजकीय रेल पुलिस के दो जवान तैनात रहते हैं। इसके बावजूद यात्री संख्या अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक ट्रेन चलाने के साथ-साथ मार्ग के सभी स्टेशनों पर टिकट, पेयजल, शेड और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है। तभी इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य पूरा हो सकेगा।

