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Gurugram Land Scam : 25 साल बाद खुली भूमि अधिग्रहण घोटाले की पोल, 37 लाख के मुआवजे का गबन : कोर्ट सख्त, पुलिस कमिश्नर को FIR और SIT जांच के आदेश

सरकारी अभिलेखों में मिली गंभीर हेराफेरी : गुरुग्राम के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. गगन गीत कौर ने दिए निर्देश, पीड़ित परिवार को 2000 से नहीं मिला एक भी पैसा, मामले की अगली सुनवाई 30 अप्रैल को

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Gurugram Land Scam : गुरुग्राम में 25 साल पुराने एक चौंकाने वाले भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. गगन गीत कौर की अदालत ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए गुरुग्राम के पुलिस आयुक्त को तत्काल प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने और विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने के आदेश दिए हैं। यह कार्रवाई स्वर्गीय राम कंवर की पत्नी मुर्ती देवी व उनके परिवार की अधिग्रहित जमीन के मुआवजे में हुए फर्जीवाड़े को लेकर की गई है। फाइलों के अनुसार 37 लाख रुपये से अधिक की राशि 25 साल पहले ही वितरित कर दी गई थी, लेकिन पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्हें आज तक एक भी पैसा नहीं मिला है।

क्या है 37 लाख रुपये का यह पूरा मामला

मूर्ति देवी और उनकी पुत्रियों (कमला तथा बिमला देवी) की जमीन सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के तहत अधिग्रहित की गई थी। इसके एवज में 1 दिसंबर 2000 को 37,78,009 रुपये की राशि चेक के माध्यम से न्यायालय में जमा की गई।

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19 दिसंबर 2000 को पंचकूला के ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स से इस चेक को छह डिमांड ड्राफ्ट में बदल दिया गया। विभाग का दावा है कि यह राशि वितरित कर दी गई है। परिवार को न्याय पाने के लिए 25 वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा। 2012 में निष्पादन याचिका दायर होने और लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, 2014 में उच्च न्यायालय के निर्देश पर 5.61 करोड़ रुपये की राशि भी न्यायालय में जमा हुई थी, जिसे 2014 में ही जारी कर दिया गया था।

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अभिलेखों में मिली छेड़छाड़ और दोहरे मापदंड

हाईकोर्ट के आदेश पर याचिका बहाल होने के बाद जब अदालत ने वर्ष 2000 का मूल रिकॉर्ड और कैश बुक तलब की, तो गंभीर धांधली उजागर हुई। प्रेषण पंजिका में दोहरी प्रविष्टियां और 22 दिसंबर 2000 की रसीद पर '22' अंक ऊपर से लिखा (ओवरराइटिंग) मिला।

यही नहीं, मंगल सिंह आदि से संबंधित फाइल को जानबूझकर आवेदकों की फाइल से जोड़ दिया गया। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि 2000 में प्रचलित व्यवस्था के अनुसार मुआवजे की राशि सीधे कोषागार में जमा होनी चाहिए थी, लेकिन इसे नियमित प्रक्रिया से हटकर डिमांड ड्राफ्ट में बदला गया, जो स्वयं में संदेहास्पद है। बैंक के अधिकारी और भूमि अधिग्रहण विभाग भी अदालत में पैसों के भुगतान या ड्राफ्ट भुनाने का कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके।

अब मामले की सुनवाई 30 अप्रैल को

 न्यायालय ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश कार्यालय के माध्यम से आदेश की प्रति पुलिस आयुक्त को भेजने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, मामले के मूल अभिलेख न्यायालय के पाठक (रीडर) की कस्टडी में सुरक्षित रखे जाएंगे। उच्च न्यायालय के आदेश से याचिका पुनर्स्थापित होने के कारण, आदेश की प्रति उच्च न्यायालय के महारजिस्ट्रार को भी सूचनार्थ भेजी जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 30 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।

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