ग्राम पंचायत थुराणा सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त, शुरू हुआ निशुल्क बर्तन बैंक
हांसी में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ग्राम पंचायत थुराणा ने भूमि मित्र फाउंडेशन के सहयोग से गांव को सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त करने की ऐतिहासिक पहल की है। इस अवसर पर पर्यावरण...
हांसी में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ग्राम पंचायत थुराणा ने भूमि मित्र फाउंडेशन के सहयोग से गांव को सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त करने की ऐतिहासिक पहल की है। इस अवसर पर पर्यावरण भवन थुराणा में आयोजित कार्यक्रम में गांव में प्लास्टिक के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की गई तथा ग्रामीणों के लिए निशुल्क बर्तन बैंक का शुभारंभ किया गया।
सरपंच रामदिया पन्नू की अध्यक्षता में शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य गांव को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाना है। बर्तन बैंक के माध्यम से ग्रामीण किसी भी सामाजिक या पारिवारिक आयोजन जैसे शादी, धार्मिक कार्यक्रम या सामूहिक भोज के लिए स्टील के बर्तन निशुल्क प्राप्त कर सकेंगे। इससे डिस्पोजेबल प्लास्टिक प्लेट, कप और अन्य सामग्रियों के उपयोग पर रोक लगेगी।
अन्य पंचायतों को लिये मिसाल बनी थुराणा ग्राम पंचायत
सरपंच और भूमि मित्र फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने ग्रामीणों से अपील की कि वे पर्यावरण संरक्षण के लिए प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह बंद करें और इस सुविधा का अधिकतम लाभ उठाएं। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पर्यावरणविद् सुनीता रहेजा उपस्थित रहीं। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि थुराणा पंचायत ने बर्तन बैंक स्थापित कर अन्य ग्राम पंचायतों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए जनभागीदारी और संस्थागत सहयोग बेहद आवश्यक है।
इस अवसर पर गांव में जागरूकता अभियान की भी शुरुआत की गई, जिसमें लोगों को प्लास्टिक से होने वाले स्वास्थ्य और पर्यावरणीय नुकसान के बारे में जागरूक किया गया। सरपंच रामदिया पन्नू ने आश्वासन दिया कि पर्यावरण भवन के माध्यम से गांव के विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए ऐसे प्रयास आगे भी जारी रहेंगे।
कार्यक्रम में श्याम लाल, प्रवीन कुमार, मास्टर राजबीर सिंह, अनिल पन्नू, सोनू वत्स, भूमि मित्र नसीब कुमार, अजय, सुमित सिंहमार, मुन्ना मलिक, राकेश सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं उपस्थित रहीं।
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दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने 2 फरवरी, 1881 को लाहौर (अब पाकिस्तान) से ‘द ट्रिब्यून’ का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है।
‘द ट्रिब्यून’ के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में 15 अगस्त, 1978 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।
हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास (प्रेसीडेंट), न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।
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