ग्राम पंचायत प्रतिनिधि गांवों में पर्यावरण और जल संरक्षण के प्रति लोगों को करें जागरूक : प्रो. दीप्ति धर्मांणी
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शुक्रवार को चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय (सीबीएलयू) के पुराने परिसर में पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र एवं समाज कार्य...
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शुक्रवार को चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय (सीबीएलयू) के पुराने परिसर में पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र एवं समाज कार्य विभाग तथा प्राणीशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इस वर्ष की थीम ‘प्रकृति से प्रेरित, जलवायु के लिए हमारे भविष्य के लिए’ रही।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. दीप्ति धर्मांणी, कुलसचिव प्रो. भावना शर्मा, विभिन्न विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ, पर्यावरणविद् और जिलेभर से आए सरपंच एवं पंच शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन समाजशास्त्र एवं समाज कार्य विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार तेवतिया ने किया।
अपने संबोधन में कुलगुरु प्रो. दीप्ति धर्मांणी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिवस का विषय नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों से अपने-अपने गांवों में पर्यावरण संरक्षण और जल संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने का आह्वान किया।
'जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी'
कुलसचिव प्रो. भावना शर्मा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम जनप्रतिनिधियों को पर्यावरण संरक्षण संबंधी योजनाओं और व्यावहारिक उपायों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं।
मुख्य वक्ता पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के प्रो. डॉ. विनोद चौधरी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें समाज की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने प्राकृतिक खेती, बायोचार तकनीक और रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
हरियाणा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के पूर्व परियोजना निदेशक मनोज जैन ने ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा सहित स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को अपनाने की अपील की। वहीं ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी, देहरादून के प्रो. डॉ. वी.पी. उनियाल ने ऑनलाइन माध्यम से जैव विविधता संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कीट प्रजातियों के विलुप्त होने का कृषि क्षेत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
जल एवं पर्यावरण कार्यकर्ता अधिवक्ता रमेश गोयल ने जल संरक्षण को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए वर्षा जल संचयन और जल संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रतिभागियों को जल संरक्षण विषयक ‘जल चालीसा’ पुस्तिका भी वितरित की।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी शैलेंद्र अरोड़ा ने बढ़ते प्रदूषण पर चिंता व्यक्त करते हुए पर्यावरण अनुकूल गतिविधियों और प्रभावी कचरा प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने पर बल दिया।
इस कार्यक्रम के समापन पर विश्वविद्यालय परिसर में पौधारोपण किया गया। मुख्य अतिथियों और जनप्रतिनिधियों को पौधे भेंट कर सम्मानित किया गया। उपस्थित जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनकी देखभाल सुनिश्चित करने का संकल्प लिया।
अंत में प्राणीशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. ललिता गुप्ता ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
