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Ghaziabad Sisters Death: कोरियन नामों से सोशल मीडिया अकाउंट चलाती थीं तीनों बहनें, बड़ी संख्या में थे फॉलोअर्स

Ghaziabad Sisters Death: तीनों बहनें मिलकर एक सोशल मीडिया अकाउंट चलाती थीं, जहां वे कोरियन स्टाइल नामों से अपनी पहचान बनाती थीं

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आत्महत्या करने वाली तीनों बहनों की फाइल फोटो।
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Ghaziabad Sisters Death:  उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में नौवीं मंज़िल से गिरकर जान गंवाने वाली तीन नाबालिग बहनों के मामले में चौकाने वाले नए तथ्य सामने आए हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, तीनों बहनें कोरियन पॉप कल्चर (K-Pop और K-Drama) से गहराई से प्रभावित थीं और उन्होंने कोरियन नामों से सोशल मीडिया अकाउंट बना रखे थे, जिन पर बड़ी संख्या में फॉलोअर्स थे।

मृतक बहनों की पहचान निशिका (16), प्राची (14) और पाकी (12) के रूप में हुई है। पुलिस का कहना है कि घटना बुधवार सुबह हुई, जब तीनों बहनें अपने अपार्टमेंट की नौवीं मंज़िल से नीचे गिर गईं।

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मोबाइल फोन छीने जाने के बाद मानसिक तनाव

पुलिस जांच में सामने आया है कि घटना से पहले पिता चेतन कुमार ने कथित तौर पर बेटियों के मोबाइल फोन ले लिए थे। इसके बाद तीनों बहनें मानसिक रूप से बेहद परेशान हो गईं, क्योंकि वे न तो कोरियन ड्रामा देख पा रही थीं और न ही सोशल मीडिया तक पहुंच बना पा रही थीं।

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पुलिस सूत्रों के अनुसार, चेतन कुमार पेशे से व्यापारी हैं और करीब 2 करोड़ रुपये के कर्ज में डूबे हुए हैं। घरेलू खर्चों को पूरा करने के लिए उन्होंने बेटियों के मोबाइल फोन बेचकर बिजली का बिल चुकाया था। पुलिस का कहना है कि बहस के दौरान पिता ने कथित तौर पर बेटियों की शादी कराने की बात कह दी थी।

कोरियन पहचान और डिजिटल दुनिया में डूबा जीवन

सूत्रों के मुताबिक, तीनों बहनें मिलकर एक सोशल मीडिया अकाउंट चलाती थीं, जहां वे कोरियन स्टाइल नामों से अपनी पहचान बनाती थीं। वे नियमित रूप से कोरियन ड्रामा, म्यूज़िक और फैशन से जुड़े वीडियो व पोस्ट साझा करती थीं। इस अकाउंट पर अच्छी-खासी ऑनलाइन फॉलोइंग थी।

पड़ोसियों ने पुलिस को बताया कि तीनों बहनें एक-दूसरे के बेहद करीब थीं। वे पढ़ाई, खाना, नहाना और समय बिताना, सब कुछ साथ करती थीं। उनका बढ़ता स्क्रीन टाइम परिवार के लिए चिंता का विषय बन चुका था। पिता ने यह भी बताया कि बेटियां अक्सर कहा करती थीं कि वे कोरिया जाना चाहती हैं।

मनोवैज्ञानिक की राय: भावनात्मक दूरी बड़ी वजह

क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट श्वेता शर्मा ने पीटीआई से बातचीत में कहा कि बच्चों में कोरियन पॉप कल्चर का आकर्षण अक्सर माता-पिता की भावनात्मक अनुपलब्धता से जुड़ा होता है। उन्होंने कहा, “आज के समय में माता-पिता के पास बच्चों के लिए समय नहीं है। भावनात्मक जुड़ाव की कमी के कारण बच्चे ऐसी संस्कृतियों की ओर आकर्षित होते हैं, जहां दोस्ती, अपनापन और प्यार को प्रमुखता से दिखाया जाता है।”

ब्लू व्हेल चैलेंज जैसी घटनाओं से तुलना

इस घटना की तुलना 2017 के ब्लू व्हेल चैलेंज से भी की जा रही है, जिसमें दुनिया भर में 130 से अधिक युवाओं की मौत हुई थी। वहीं, 2024 में महाराष्ट्र की तीन स्कूली छात्राएं बिना पासपोर्ट और पैसे के अपने पसंदीदा कोरियन बैंड BTS से मिलने कोरिया जाने निकल पड़ी थीं, जिन्हें समय रहते वापस लाया गया था।

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