जुलाना मंडी में किसान-आढ़तियों का धरना, कांग्रेस ने दिया समर्थन
जुलाना मंडी में किसान-आढ़तियों का धरना, कांग्रेस ने दिया समर्थन. जुलाना कस्बे की नई अनाज मंडी में शुक्रवार को किसानों और आढ़तियों ने नई सरकारी नियमावली के विरोध में हड़ताल कर धरना शुरू कर दिया। पूरे दिन मंडी में...
जुलाना मंडी में किसान-आढ़तियों का धरना, कांग्रेस ने दिया समर्थन. जुलाना कस्बे की नई अनाज मंडी में शुक्रवार को किसानों और आढ़तियों ने नई सरकारी नियमावली के विरोध में हड़ताल कर धरना शुरू कर दिया। पूरे दिन मंडी में खरीद-फरोख्त ठप रही और किसानों ने भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
धरने को समर्थन देने पहुंचे ऋषिपाल हैबतपुर ने कहा कि प्रदेश सरकार ऐसे निर्णय ले रही है, जो सीधे किसानों और आढ़तियों के हितों के खिलाफ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नए नियम थोपकर मंडियों की व्यवस्था और किसानों की परेशानियों को बढ़ा रही है।
जुलाना मंडी में बायोमेट्रिक प्रणाली को अनिवार्य करने समेत इन नियमों पर जताया ऐतराज
ऋषिपाल ने विशेष रूप से ट्रैक्टर पर नंबर प्लेट और बायोमेट्रिक प्रणाली को अनिवार्य करने, मंडी समय को सुबह 6 बजे से शाम 8 बजे तक सीमित करने और अन्य नियमों पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि ये नियम ग्रामीण हकीकत के अनुरूप नहीं हैं और कई किसानों के लिए अव्यवहारिक साबित होंगे।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार इन फैसलों को तुरंत वापस नहीं लेती, तो कांग्रेस पार्टी किसानों और आढ़तियों के साथ मिलकर बड़े स्तर पर आंदोलन करेगी। साथ ही उन्होंने मांग की कि गेहूं की खरीद पुरानी प्रणाली के अनुसार की जाए और मंडियों में पानी, बिजली, शौचालय सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं तुरंत उपलब्ध करवाई जाएं। धरने में किसानों और आढ़तियों ने भी सरकार के खिलाफ रोष जताया और कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा।
इस दौरान पूर्व प्रदेश प्रवक्ता जगबीर डिगाना, संगठन महासचिव पवन दूहन, मंडी प्रधान पवन करसोला, हरिओम शर्मा, राजेंद्र तायल, जस्सा प्रधान, नरेश ढांडा, अनिल लाठर, जॉनी, राममेहर मलिक गतोली, राकेश सिहाग, जयभगवान, बिककर शामलो, कुलवंत लाठर, सुरजीत करसोला, कोषाध्यक्ष इशाक भट्टी, महासचिव सुरेश शर्मा, दलबीर फौजी, सचिव बंसीलाल गोहियाँ, सचिव कुलवंत लाठर, संदीप सरपंच शादीपुर, सुभाष लाठर काला नम्बरदार, जयदीप लाठर, मंजीत लाठर, साहिल खान आदि उपस्थित रहे।
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दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने 2 फरवरी, 1881 को लाहौर (अब पाकिस्तान) से ‘द ट्रिब्यून’ का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है।
‘द ट्रिब्यून’ के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में 15 अगस्त, 1978 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।
हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास (प्रेसीडेंट), न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।
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