फर्जी पहचान, बदला आधार कार्ड और फरारी… ED ने गुरुग्राम से ऐसे दबोची हीरा ग्रुप चीफ नौहरा शेख
Heera Group Scam: गुरुग्राम से गिरफ्तारी के बाद सीधे हैदराबाद ले गई ईडी
Heera Group Scam: देशभर में करीब 3000 करोड़ रुपये के कथित निवेश घोटाले में वांछित नौहरा शेख को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुग्राम से गिरफ्तार कर लिया। लंबे समय से फरार चल रही हीरा ग्रुप की चेयरपर्सन को ईडी ने हरियाणा पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई में सेक्टर-45 स्थित एक एयर बीएनबी प्रॉपर्टी से पकड़ा।
एजेंसियों के मुताबिक वह फर्जी पहचान और कथित रूप से जाली दस्तावेजों के सहारे वहां छिपकर रह रही थी। ईडी की हैदराबाद जोनल ऑफिस टीम ने गत दिवस यह कार्रवाई की। गिरफ्तारी के तुरंत बाद आरोपी को हैदराबाद ले जाया गया, जहां देर रात विशेष पीएमएलए कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
1.72 लाख निवेशकों से 3000 करोड़ की ठगी का आरोप
ईडी के अनुसार मामला तेलंगाना और आंध्र प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर पर आधारित है। जांच एजेंसी का दावा है कि हीरा ग्रुप और उससे जुड़े लोगों ने देशभर के 1 लाख 72 हजार 114 निवेशकों से 3000 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जुटाई।
जांच में सामने आया कि निवेशकों को हीरा ग्रुप की विभिन्न कंपनियों में निवेश के नाम पर करीब 36 प्रतिशत सालाना रिटर्न का लालच दिया गया। बाद में न तो तय मुनाफा लौटाया गया और न ही मूल रकम वापस की गई। ईडी का आरोप है कि निवेशकों की रकम को कंपनी खातों के जरिए निजी खातों में ट्रांसफर किया गया और उससे भारी मात्रा में चल-अचल संपत्तियां खरीदी गईं।
सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करने के भी आरोप
जांच एजेंसी ने दावा किया कि नौहेरा शेख ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं के जरिए जांच को प्रभावित और लंबा खींचने की कोशिश की। ईडी के मुताबिक अदालत के सामने ऐसे हलफनामे दिए गए जिनमें तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया गया। एजेंसी ने कहा कि एक चरण में यह दावा किया गया कि एक व्यक्ति 580 करोड़ रुपये की संपत्तियां खरीदने को तैयार है, लेकिन जांच में संबंधित बैंक खातों में पर्याप्त राशि नहीं मिली। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित व्यक्ति के खिलाफ अवमानना कार्रवाई के आदेश भी दिए थे।
ईडी की अटैच संपत्तियां बेचने का आरोप
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ संपत्तियां, जिन्हें ईडी पहले ही अटैच कर चुकी थी, उन्हें कथित रूप से गलत हलफनामों के आधार पर बेच दिया गया। एजेंसी ने इसे प्रोसीड्स ऑफ क्राइम से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए अलग एफआईआार दर्ज कराई। ईडी ने सुप्रीम कोर्ट को अलग-अलग स्टेटस रिपोर्ट देकर इन तथ्यों से अवगत कराया। इसके बाद अदालत ने पहली बार ईडी को ट्रायल पूरा होने से पहले अटैच संपत्तियों की नीलामी कर निवेशकों का पैसा लौटाने की अनुमति दी।
122 करोड़ की नीलामी, लेकिन फिर शुरू हुआ टकराव
ईडी ने अदालत के आदेश के बाद नीलामी प्रक्रिया शुरू की और कुछ संपत्तियों की बिक्री से करीब 122 करोड़ रुपये जुटाए। लेकिन एजेंसी का आरोप है कि नीलामी के बाद भी नौहेरा शेख ने सफल खरीदारों के पक्ष में सेल डीड निष्पादित करने में सहयोग नहीं किया और लगातार प्रक्रिया में रुकावट डालती रहीं। इस पर ईडी फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंची। अदालत ने 8 अप्रैल 2026 के आदेश में आरोपी को एक सप्ताह के भीतर जेल में सरेंडर करने और दो महीने में 16 नीलाम संपत्तियों की सेल डीड पूरी करने के निर्देश दिए थे। अदालत ने यह भी कहा था कि आदेश नहीं मानने पर गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) और जमानत रद्द करने जैसी कार्रवाई हो सकती है।
‘सरेंडर’ का दावा भी निकला गलत
ईडी के अनुसार आरोपी ने विशेष पीएमएलए कोर्ट में हलफनामा देकर दावा किया था कि उसने हैदराबाद जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया, लेकिन जेल प्रशासन ने उसे हिरासत में नहीं लिया। बाद में अदालत द्वारा पूछताछ किए जाने पर जेल अधिकारियों ने बताया कि वह कभी सरेंडर करने पहुंची ही नहीं। इसके बाद विशेष अदालत ने 7 मई को उसके खिलाफ एनबीडब्ल्यू जारी कर दिया और जमानत भी रद्द कर दी।
गुरुग्राम में फर्जी पहचान के साथ रह रही थी आरोपी
ईडी अधिकारियों ने हैदराबाद और बेंगलुरु समेत कई स्थानों पर तलाश की, लेकिन आरोपी हाथ नहीं लगी। बाद में स्थानीय खुफिया इनपुट से पता चला कि वह गुरुग्राम में छिपी हुई है। जांच एजेंसी के अनुसार नौहेरा शेख सेक्टर-45 स्थित सॉल्ट स्टेज नामक एयर बीएनबी प्रॉपर्टी में ‘शेख खमर जहां’ नाम के आधार कार्ड पर रह रही थी। उसके साथ उसका सहयोगी समीन खान भी मौजूद था। इसके बाद ईडी और हरियाणा पुलिस ने संयुक्त ऑपरेशन चलाकर उसे गिरफ्तार कर लिया।
पहले भी गिरफ्तार हो चुका है इंपोस्टर
ईडी ने बताया कि जनवरी 2026 में कल्याण बनर्जी नामक एक व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया गया था। उस पर आरोप था कि वह खुद को वकील और वरिष्ठ नेताओं-ब्यूरोक्रेट्स का करीबी बताकर नीलामी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा था। ईडी ने कहा है कि जांच में बाधा डालने, कानूनी प्रक्रिया से बचने या निवेशकों का पैसा लौटाने की कार्रवाई रोकने की किसी भी कोशिश से सख्ती से निपटा जाएगा। मामले की जांच अभी जारी है।
