जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें: डॉ. कृष्ण लाल मिड्ढा
डिप्टी स्पीकर ने जन संवाद में अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
जींद (जुलाना) में हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर डॉ. कृष्ण लाल मिड्ढा ने शनिवार को अपने आवास पर आयोजित जन संवाद कार्यक्रम में नागरिकों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी मामलों का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार जनता को पारदर्शी, संवेदनशील और जवाबदेह प्रशासन देने के लिए प्रतिबद्ध है। जन संवाद कार्यक्रमों का उद्देश्य सीधे जनता से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं को सुनना और उनका त्वरित समाधान करना है, ताकि लोगों को सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें।
डिप्टी स्पीकर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पेयजल, बिजली, सड़क, सफाई, पेंशन, राजस्व और अन्य जनहित से जुड़े मामलों को गंभीरता से लें तथा लंबित शिकायतों का शीघ्र निस्तारण करें।
उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाना प्रशासन की जिम्मेदारी है। प्रत्येक अधिकारी संवेदनशीलता के साथ कार्य करे और जनता के प्रति जवाबदेह बने।
डॉ. मिड्ढा ने कहा कि जनता की सेवा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में निरंतर प्रयास जारी रहेंगे। जन संवाद कार्यक्रम में विभिन्न गांवों और शहरी क्षेत्रों से आए नागरिकों ने अपनी समस्याएं रखीं।
इस अवसर पर विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।
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दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने 2 फरवरी, 1881 को लाहौर (अब पाकिस्तान) से ‘द ट्रिब्यून’ का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है।
‘द ट्रिब्यून’ के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में 15 अगस्त, 1978 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।
हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास (प्रेसीडेंट), न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।
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