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नूंह के चर्चित साहिब हत्याकांड में आठ साल बाद नया मोड़, केंसिलेशन रिपोर्ट रद्द

नूंह जिले के बहुचर्चित साहिब हत्याकांड में करीब आठ वर्ष बाद अहम कानूनी मोड़ आया है। नूंह की सत्र अदालत के आदेश पर कराई गई न्यायिक जांच पूरी हो गई है। साथ ही अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने पुलिस...

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साहिब हत्याकांड
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नूंह जिले के बहुचर्चित साहिब हत्याकांड में करीब आठ वर्ष बाद अहम कानूनी मोड़ आया है। नूंह की सत्र अदालत के आदेश पर कराई गई न्यायिक जांच पूरी हो गई है। साथ ही अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने पुलिस की पूर्व में स्वीकार की गई केंसिलेशन रिपोर्ट को रद्द कर दिया है। अब यह मामला आगे की कार्रवाई के लिए पुन्हाना के उपमंडल न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में भेज दिया गया है।

8 जुलाई 2018 की घटना

घटना 8 जुलाई 2018 की है। पटाकपुर गांव में पुन्हाना और उत्तराखंड पुलिस की संयुक्त टीम कथित अपराधी शब्बीर को पकड़ने पहुंची थी। पुलिस के अनुसार शब्बीर को हिरासत में ले लिया गया था, लेकिन ग्रामीणों द्वारा पथराव और कथित हमले के बाद वह छुड़ा लिया गया।

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पुलिस टीम उसका पीछा करते हुए पटपड़ बास स्थित एक इस्लामी मदरसे के पास पहुंची, जहां एक युवक गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिला। उसे नल्हड़ मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने गांव नहेड़ा, तहसील पुन्हाना निवासी साहिब पुत्र शहीद को मृत घोषित कर दिया। तत्कालीन थाना प्रभारी ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया।

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परिजनों के गंभीर आरोप

मृतक के पिता शहीद ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि उन्होंने 9 जुलाई 2018 को शिकायत दी थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उनका आरोप है कि पुलिस ने जानबूझकर अपने बयान के आधार पर मामला दर्ज कराया।

परिजनों के अनुसार, घटना के समय शहीद अपने बेटे साहिब के साथ पटपड़ बास में खेत पर मौजूद थे। तभी पुलिस वहां पहुंची और एक आरोपी की तलाश के संबंध में पूछताछ की। आरोप है कि साहिब द्वारा सहयोग से इंकार करने पर कहासुनी हुई और गुस्से में पुलिस अधिकारियों ने उसे गोली मार दी।

आंदोलन और एसआईटी जांच

घटना के बाद मेवात क्षेत्र में भारी रोष फैल गया। स्थानीय नेताओं और ग्रामीणों ने पुन्हाना अनाज मंडी में धरना दिया और पोस्टमार्टम कराने से भी इंकार कर दिया। करीब 15 दिन तक चले आंदोलन के बावजूद कोई ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आया।

पुलिस ने जांच के लिए एसआईटी का गठन किया, लेकिन परिजनों का आरोप है कि जांच में ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

कानूनी लड़ाई और नया घटनाक्रम

इसके बाद पीड़ित परिवार ने अधिवक्ता नूरुद्दीन नूर से संपर्क कर विभिन्न न्यायालयों में पैरवी शुरू की। जिला एवं सत्र न्यायाधीश के आदेश पर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी द्वारा न्यायिक जांच कराई गई।

इस बीच पुलिस ने पुन्हाना न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष अंट्रेस (केंसिलेशन) रिपोर्ट पेश की, जिसे 21 जुलाई 2023 को स्वीकार कर लिया गया। इस आदेश को चुनौती दी गई।

हाल ही में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की न्यायिक जांच में उल्लेख किया गया कि साहिब की हत्या की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। इसके बाद फाइल आगे की कार्रवाई के लिए पुन्हाना अदालत को भेज दी गई।

साथ ही अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने 21 जुलाई 2023 के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें पुलिस की केंसिलेशन रिपोर्ट स्वीकार की गई थी।

परिवार की प्रतिक्रिया

पीड़ित परिवार के वकील नूरुद्दीन नूर का कहना है कि पुलिस स्तर पर जांच के रास्ते बंद कर दिए गए थे, लेकिन परिवार के धैर्य और न्याय की उम्मीद ने मामले को फिर से जीवित कर दिया है। उन्होंने कहा कि न्याय की राह अभी लंबी है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से सच्चाई सामने लाने का प्रयास जारी रहेगा।

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