चाय पर ‘सौहार्द’ बनाये रखने की चर्चा

चाय पर ‘सौहार्द’ बनाये रखने की चर्चा

गुरुग्राम में मंगलवार को मेयर के आवास पर हुई टी-पार्टी में पहुंचे पार्षद और निगम अधिकारी।-हप्र

नवीन पांचाल/हप्र

गुरुग्राम, 19 जनवरी

पार्षदों का विरोध मेयर मधु आजाद को सालने लगा है। आखिरकार तीन साल बाद मेयर ने विरोध को साधने के लिए पार्षदों को टी-पार्टी दी। मेयर के निवास पर आयोजित इस चाय पार्टी में अफसरों के साथ टीम मेयर व पार्षदों ने ‘आपसी सौहार्द’ बनाये रखने पर चर्चा की गई।

यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है कि तीन साल के विकास कार्यों व निगम सदन द्वारा पास प्रस्तावों की समीक्षा बैठक कई बार निर्धारित किए जाने के बाद भी नहीं हो पाई। पांच जनवरी को बैठक पुनः रद्द कर दी गई तो 24 पार्षदों ने एकजुट होकर ‘आरपार की लड़ाई’ का बिगुल बजा दिया। इससे पहले पार्षद निगम के अधिकारियों के खिलाफ त्यौरियां चढ़ाए हुए रहे हैं लेकिन कुर्सी को खतरा भांपकर मेयर मधु आजाद ने पार्षदों को साधना ही बेहतर समझा। उन्होंने टी-पार्टी का आयोजन किया। इसमें निगम कमिश्नर विनय प्रताप सिंह, सभी एडिशनल व ज्वाइंट कमिश्नर्स के साथ-साथ 35 सदस्यीय सदन में से 30 पार्षद मौजूद रहे। खास बात यह है कि दो घंटे से ज्यादा चली इस टी पार्टी के दौरान किसी भी तरह के गिले-शिकवे या अधिकारिक चर्चा नहीं हुई। टी-पार्टी की शुरूआत में कुछ पार्षदों ने इस बात पर नाराजगी जरूर जताई कि निगम अधिकारी उनकी सुनवाई नहीं कर रहे, लेकिन बाद में ये शिकायतें भी गौण हो गई।

बैठक में नरेश बरवाल, राकेश यादव, विरेंद्र यादव, अनूप कुमार, दिनेश सैनी, गजे सिंह कबलाना, योगेंद्र सारवान, ब्रहम यादव, संजय प्रधान, सीमा पाहूजा, सुभाष सिंगला, अश्वनी शर्मा, कपिल दुआ, धर्मबीर सिंह, नीरज यादव, सुनील गुर्जर, फौजी, उदयवीर, हेमंत कुमार, कुलदीप यादव, महेश दायमा, कुलदीप बोहरा, पूर्व सरपंच अनिल यादव, सतीश यादव, आरएस राठी व लीलू यादव भी मौजूद रहे।

तो अब नहीं होगी समीक्षा बैठक

तीन साल के विकास कार्यों व सदन के प्रस्तावों को लेकर आयोजित की जाने वाली समीक्षा बैठक फिलहाल होने की संभावना नहीं है। यह बैठक 8 जनवरी को दोबारा रखना प्रस्तावित था, लेकिन उस दिन सीएम के गुरुग्राम आ जाने के कारण फैसला आगे खिसकाना पड़ा। अब निगम कमिश्नर विनय प्रताप सिंह कुछ समय के लिए छुट्टी पर जा रहे हैं। ऐसे में अब समीक्षा बैठक के आयोजन की गुंजाइश नहीं दिखती।

पहले संभाल लिया मोर्चा

तीन सालों में यह दूसरा मौका था पार्षदों ने बगावती बिगुल फूंक दिया। कुर्सी पर खतरे की आशंका भांपकर मेयर ने बातचीत के जरिये हल निकालने का रास्ता अपनाना ही बेहतर समझा। बताते हैं कि पार्षदों के विरोध को शांत करने के लिए एक पूर्व पार्षद ने ही मेयर को यह सलाह दी। इसी पूर्व पार्षद ने मेयर को पार्षदों से नियमित मुलाकात करने तथा समय-समय पर इस तरह की पार्टी या बैठकों के आयोजन के लिए भी राजी कर लिया। इससे पहले आरएस राठी ग्रुप के पार्षदों ने मेयर के खिलाफ मोर्चा खोला था। इस गुट ने मेयर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने तक की तैयारी कर ली थी लेकिन ऐन मौके पर उनके हाथ से पार्षदों का बहुमत फिसल गया।

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