करोड़ों खर्च करने के बाद भी निगम की नई बिल्डिंग विवाद का केंद्र बनी : कमल दिवान
सोनीपत शहरी कांग्रेस जिलाध्यक्ष कमल दिवान ने नगर निगम की नई बिल्डिंग विवाद के बाद इसे जनता के पैसे की बर्बादी करार देते हुए इसकी गंभीर देरी और लगातार बढ़ती लागत पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह बिल्डिंग...
सोनीपत शहरी कांग्रेस जिलाध्यक्ष कमल दिवान ने नगर निगम की नई बिल्डिंग विवाद के बाद इसे जनता के पैसे की बर्बादी करार देते हुए इसकी गंभीर देरी और लगातार बढ़ती लागत पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह बिल्डिंग आधुनिकीकरण का प्रतीक बनकर अब विवादों के घेरे में आ गई है।
कमल दिवान ने बताया कि वर्ष 2020-21 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य 2022 के अंत तक पूरा होना था, लेकिन अब 2026 में प्रवेश करने के बाद भी यह अधूरा पड़ा है। उन्होंने कहा कि लगभग 58 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद प्रशासन अब 28 करोड़ रुपये अतिरिक्त बजट की मांग कर रहा है, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और गलत योजना का संकेत है।
उन्होंने यह भी कहा कि बिल्डिंग के मूल प्रस्ताव में केवल नगर निगम की सुविधाओं—मेयर, निगम आयुक्त और पार्षदों के कार्यालय—को समाहित किया गया था, लेकिन अब इसे सोनीपत महानगर विकास प्राधिकरण (एसएमडीए) के संयुक्त मुख्यालय के रूप में विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। इससे भविष्य में जगह की कमी की समस्या उत्पन्न होगी और फिर करोड़ों रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ सकते हैं।
कमल दिवान ने पुरानी बिल्डिंग में जगह की कमी का हवाला देकर इस प्रोजेक्ट को शुरू करने पर भी सवाल उठाए। निर्माण में देरी के कारण आज भी शहरवासी सुविधाओं के लिए खिड़की-दर-खिड़की भाग रहे हैं।
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नई बिल्डिंग विवाद- जांच और जवाबदेही की मांग
कांग्रेस नेता ने मांग की कि इस प्रोजेक्ट की शुरुआत से अब तक किए गए भुगतान और निर्माण गुणवत्ता की न्यायिक जांच कराई जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शेष कार्य को युद्ध स्तर पर पूरा नहीं किया गया और लागत बढ़ाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो कांग्रेस इस मुद्दे को जनता की अदालत में लेकर जाएगी।
कार्यक्रम में कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं और स्थानीय नागरिकों ने भी इस परियोजना में हुई देरी और भ्रष्टाचार के संकेतों की निंदा की।

