जींद के निडाना गांव में करोड़ों खर्च के बाद भी पानी की किल्लत, ग्रामीणों ने खुद उठाया समाधान
ग्रामीणों ने निजी ट्यूबवेल से पूरी की 70% पेयजल सप्लाई
निडाना गांव में करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद पीने के पानी की समस्या जमीनी हकीकत में जस की तस बनी हुई है। डीसी मोहम्मद इमरान रजा के औचक दौरे और जलघर की साफ-सफाई के निर्देशों के बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि पर्याप्त और सतत पेयजल की सप्लाई न होने से उनके परिवारों की बहु-बेटियों के सिर पर आज भी पानी के मटके हैं।
हर घर में नल, हर नल में पानी का दावा खोखला
भारत सरकार के जल जीवन मिशन के तहत ‘हर घर में नल, हर नल में जल’ का दावा निडाना में केवल कागजों तक सीमित है। गांव में लगभग 70 प्रतिशत पेयजल ग्रामीणों की अपनी व्यवस्था, यानी कम्युनिटी ट्यूबवेलों, से आता है। ये ट्यूबवेल ग्रामीणों ने अपने पैसे और मेहनत से जलघर में स्थापित किए हैं। इनमें से कुछ बिजली की मोटर और कुछ डीजल इंजन से चलते हैं, जिसका खर्च भी ग्रामीण उठाते हैं। नंबरदार राममेहर मलिक के अनुसार, जब जन स्वास्थ्य विभाग पानी की आपूर्ति में नाकाम रहा, तब ग्रामीणों ने यह कदम उठाया।
सालों की कोशिशों के बावजूद समस्या जस की तस
लगभग 7 साल पहले गांव में पीने के पानी की कमी के कारण एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत हो चुकी थी। इसके बाद विधानसभा में मामला उठाया गया और विभाग ने करोड़ों रुपए खर्च किए। फिर भी आज भी विभाग की सप्लाई केवल 30 प्रतिशत तक सीमित है।
विभाग का समाधान और भविष्य की योजना
एसडीओ हर्ष कुमार ने बताया कि नहरी पानी स्टोर करने के लिए एक और वाटर टैंक का निर्माण योजना में है। पहले नहर में पानी 20 दिन बाद आता था, अब 40 दिन में। इसी कारण अतिरिक्त टैंक की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि गांव में पानी की कमी नहीं है, बल्कि पानी की बर्बादी हो रही है, जिसे नलों पर टैप लगाकर रोका जाएगा। एसई विक्रम मोर ने कहा कि विभाग निडाना में अपनी पेयजल सप्लाई की वास्तविक स्थिति का पता लगाएगा।

