गुरुग्राम में कांग्रेस के शहरी जिला अध्यक्ष पंकज डावर ने शहर में बनाए गए फुटओवर ब्रिजों को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि महावीर चौक–पुलिस लाइन के पास बना फुटओवर ब्रिज बिना जरूरत के तैयार किया गया है और इस पर जनता के टैक्स के करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए।
जारी बयान में डावर ने कहा कि दिनभर निगरानी करने के बावजूद एक भी व्यक्ति इस फुटओवर ब्रिज का उपयोग करता नजर नहीं आया। उनका कहना है कि नीचे से सड़क पार करने के रास्ते मौजूद हैं और ब्रिज पर सामान लेकर चढ़ना भी मुश्किल है, इसलिए लोग इसका इस्तेमाल नहीं करते।
उन्होंने बताया कि महावीर चौक पर अंडरपास और फुटओवर ब्रिज का उद्घाटन 5 नवंबर 2022 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा किया गया था। डावर ने आरोप लगाया कि यात्रियों की सुविधा के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन इसका कोई व्यावहारिक लाभ नहीं दिख रहा।
बस अड्डे को लेकर भी उठाए सवाल
पंकज डावर ने कहा कि यदि इसी राशि में थोड़ा और धन जोड़ा जाता तो शहर में बस अड्डा बनाया जा सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बस अड्डे को शहर से बाहर ले जाने की योजना बना रही है, जबकि मौजूदा जरूरतों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
उन्होंने परिवहन मंत्री अनिल विज पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मंत्री बनने के बाद एक बार दौरा करने के बावजूद बस अड्डे के मुद्दे पर कोई ठोस पहल नहीं हुई। डावर ने दावा किया कि गुरुग्राम प्रदेश को भारी राजस्व और सीएसआर फंड देता है, इसके बावजूद शहर की आधारभूत सुविधाओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा।
एनएच-48 के फुटओवर ब्रिज भी सवालों के घेरे में
डावर ने राष्ट्रीय राजमार्ग 48 (एनएच-48) पर बने फुटओवर ब्रिजों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इफको चौक, सिग्नेचर टावर चौक और राजीव चौक पर बने ब्रिजों के एस्केलेटर आज तक पूरी तरह संचालित नहीं हो पाए हैं। उनका आरोप है कि कई स्थानों पर उपकरण भी चोरी हो चुके हैं, जिससे सरकारी धन की बर्बादी स्पष्ट होती है।
फुटपाथ पर लगी ग्रिल पर आपत्ति
कांग्रेस नेता ने एमजी रोड से लेकर पुराने सिविल अस्पताल तक फुटपाथों पर लगाई गई ग्रिल को लेकर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सड़क और फुटपाथ की स्थिति पहले ही संतोषजनक नहीं है, ऊपर से ग्रिल लगाकर आवाजाही और अधिक बाधित कर दी गई है।
डावर ने आरोप लगाया कि यह विकास नहीं बल्कि भ्रष्टाचार का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि जनता के टैक्स के पैसे का उपयोग जनसुविधाओं के लिए होना चाहिए, न कि ऐसे निर्माण कार्यों पर जिनका व्यावहारिक लाभ नजर न आए।

