बंगाल में भाजपा की जीत लोकतंत्र और जनविश्वास का प्रतीक : डॉ. अरविंद शर्मा
रोहतक में हरियाणा के सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने पश्चिम बंगाल में भाजपा को मिले प्रचंड बहुमत पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे लोकतंत्र की ताकत और जनता के विश्वास का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi...
रोहतक में हरियाणा के सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने पश्चिम बंगाल में भाजपा को मिले प्रचंड बहुमत पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे लोकतंत्र की ताकत और जनता के विश्वास का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi की नीतियों और विकास योजनाओं पर जनता ने भरोसा जताया है, जबकि Mamata Banerjee के नेतृत्व वाली सरकार को नकार दिया।
डॉ. शर्मा ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में लंबे समय से अराजकता और भय का माहौल बना हुआ था, जिससे जनता परेशान थी। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता ने सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सुरक्षा के लिए परिवर्तन का रास्ता चुना और कुशासन से मुक्ति पाई।
सहकारिता मंत्री मंगलवार को रोहतक में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इससे पहले उन्होंने केंद्रीय मंत्री Manohar Lal Khattar के जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शिरकत की। उन्होंने सुभाष रोड स्थित मुल्तानी सेवा समिति शनिधाम मंदिर परिसर में आयोजित निशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का उद्घाटन भी किया।
डॉ. शर्मा ने मनोहर लाल के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हुए उनके प्रशासनिक योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में हरियाणा में सुशासन और पारदर्शिता को मजबूती मिली। साथ ही “बिना पर्ची-बिना खर्ची” के आधार पर युवाओं को रोजगार देने की नीति से सरकारी व्यवस्था में विश्वास बढ़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि विकास कार्यों में क्षेत्रवाद, जातिवाद और भाई-भतीजावाद जैसी प्रवृत्तियों पर प्रभावी रोक लगाई गई।
उन्होंने असम और पुडुचेरी में भाजपा सरकार के दोबारा गठन को भी कार्यकर्ताओं की मेहनत, संगठन की मजबूती और जनसेवा के प्रति समर्पण का परिणाम बताया। डॉ. शर्मा ने कहा कि ये चुनाव परिणाम देश में विकास और सुशासन को और मजबूती देंगे। इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष रणबीर ढाका, पूर्व मेयर मनमोहन गोयल, राजकुमार उर्फ राजू सहगल, जेपी गौड़ सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने 2 फरवरी, 1881 को लाहौर (अब पाकिस्तान) से ‘द ट्रिब्यून’ का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है।
‘द ट्रिब्यून’ के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में 15 अगस्त, 1978 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।
हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास (प्रेसीडेंट), न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।
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