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Haryana Bachelor Crisis : भाजपा प्रत्याशी को जिताओ.. कुंवारों की शादी कराना मेरी जिम्मेदारी...रेवाड़ी निकाय चुनाव में विधायक का अनोखा वादा

भाजपा प्रत्याशी विनीता पिप्पल के समर्थन में आयोजित रैली में पटौदी विधायक का बयान वायरल, मंच पर मौजूद स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने भी ली चुटकी

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Haryana Bachelor Crisis :  हरियाणा में जारी नगर निकाय चुनाव के प्रचार के दौरान एक बेहद दिलचस्प और अनोखा चुनावी वादा सामने आया है। पटौदी से भाजपा विधायक बिमला चौधरी ने रेवाड़ी में भाजपा प्रत्याशी की चुनावी रैली में मतदाताओं से वादा किया कि यदि वे भाजपा को वोट देकर जिताते हैं, तो क्षेत्र के कुंवारे युवाओं की शादी कराने की जिम्मेदारी वे खुद लेंगी। हंसी-मजाक और ठहाकों के बीच आए इस बयान ने दक्षिण हरियाणा में वर्षों से गहराए लिंगानुपात संकट और युवाओं के शादी न हो पाने की गंभीर समस्या (बैचलर क्राइसिस) पर एक बार फिर नई बहस छेड़ दी है।

स्वास्थ्य मंत्री बोलीं- 'विधायक जी ने खोल लिया मैरिज ब्यूरो'

यह पूरा वाकया रेवाड़ी नगर परिषद की भाजपा प्रत्याशी विनीता पिप्पल के समर्थन में गुरुवार को आयोजित एक चुनावी जनसभा का है। रैली को संबोधित करते हुए विधायक बिमला चौधरी ने कहा, "आप बस हमें वोट देकर विजयी बनाइए और मैं इन युवा कुंवारे लड़कों का घर बसाने यानी शादी कराने की पूरी जिम्मेदारी लेती हूं।" मंच पर उनके साथ मौजूद हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने भी इस पर चुटकी लेते हुए मजाकिया लहजे में कहा कि विधायक जी ने तो अब रेवाड़ी में 'मैरिज ब्यूरो' ही खोल लिया है। बाद में पत्रकारों से बातचीत में बिमला चौधरी ने अपने बयान का बचाव किया और दावा किया कि वे पहले भी कई कुंवारे लड़कों की शादियां पलवल और आसपास के जिलों की लड़कियों से करवाने में मदद कर चुकी हैं।

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हंसते चेहरों के पीछे छिपी है कड़वी सामाजिक हकीकत

चुनावी रैली में भले ही इस बयान को हल्के-फुल्के अंदाज में लिया गया हो, लेकिन इसके पीछे दक्षिण हरियाणा का एक गंभीर और संवेदनशील सामाजिक सच छिपा है। हरियाणा लंबे समय से कन्या भ्रूण हत्या और लैंगिक भेदभाव के कारण देश के सबसे खराब लिंगानुपात वाले राज्यों में से एक रहा है।

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वर्ष 2011 की जनगणना के डराने वाले आंकड़े बताते हैं कि राज्य में प्रति 1,000 पुरुषों पर केवल 879 महिलाएं थीं, जबकि बाल लिंगानुपात तो और भी चिंताजनक (प्रति 1,000 लड़कों पर महज 834 लड़कियां) था। विशेषज्ञों के मुताबिक, इसी असंतुलन के कारण आज रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, झज्जर और गुरुग्राम के ग्रामीण अंचलों में 30 और 40 की उम्र पार कर चुके हजारों युवाओं को शादी के लिए लड़कियां नहीं मिल पा रही हैं, और परिवारों को दूसरे राज्यों से बहुएं लानी पड़ रही हैं।

राजनीतिक मंचों पर पुराना है 'दुल्हन' का मुद्दा

हरियाणा की राजनीति में 'शादी' और 'दुल्हन' का मुद्दा नया नहीं है। इससे पहले साल 2014 के चुनावों के दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता ओ.पी. धनखड़ ने भी कुंवारे युवाओं के लिए बिहार से दुल्हनें लाने की बात कही थी, जिस पर राष्ट्रव्यापी विवाद खड़ा हुआ था।

फिलहाल रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव के लिए आगामी 10 मई को मतदान होना है, और नतीजे 13 मई को घोषित किए जाएंगे। लेकिन इस चुनावी वादे ने यह साफ कर दिया है कि युवाओं के घर बसाने का यह संकट राजनीतिक और सामाजिक रूप से कितना संवेदनशील और अहम बन चुका है।

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