बामसेफ व भारत मुक्ति मोर्चा ने किया प्रदर्शन
राष्ट्रीय अधिवेशन की अनुमति रद्द होने से रोष भारत मुक्ति मोर्चा और बामसेफ ने ओडिशा में अपने राष्ट्रीय अधिवेशन की अनुमति रद्द किए जाने को लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या करार देते हुए केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ राष्ट्रव्यापी...
राष्ट्रीय अधिवेशन की अनुमति रद्द होने से रोष
भारत मुक्ति मोर्चा और बामसेफ ने ओडिशा में अपने राष्ट्रीय अधिवेशन की अनुमति रद्द किए जाने को लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या करार देते हुए केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ राष्ट्रव्यापी चरणबद्ध आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है।
आंदोलन के प्रथम चरण में बुधवार को को देशभर के 725 जिलों में संगठन के पदाधिकारियों ने राष्ट्रपति के नाम उपायुक्त के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। इसी कड़ी में भिवानी में भी उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन के माध्यम से संगठन के अधिवेशन की अनुमति तत्काल बहाल किए जाने, रद्द किए गए कार्यक्रम के कारण कार्यकर्ताओं और संगठन को हुए आर्थिक नुकसान का पूरा मुआवजा सरकार देने, ओबीसी की जाति आधारित जनगणना के मुद्दे को दबाने की साजिश की जांच किसी निष्पक्ष न्यायाधीश से कराई जाने, ओडिशा सरकार द्वारा संविधान के उल्लंघन को देखते हुए वहां की सरकार को तुरंत बर्खास्त किए जाने की मांग उठाई।
आंदोलन का नेतृत्व भारत मुक्ति मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष रमेश दहिया ने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ओडिशा के कटक में 26 दिसंबर, 2025 से होने वाले बामसेफ के 42वें और भारत मुक्ति मोर्चा के 15वें राष्ट्रीय अधिवेशन की सभी कानूनी औपचारिकताएं 2 महीने पहले ही पूरी कर ली गई थी, लेकिन अंतिम समय पर आरएसएस और भाजपा के दबाव में प्रशासन द्वारा अनुमति रद्द करना न केवल हमारे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि यह ओबीसी, एससी, एसटी और मूलनिवासी समाज की आवाज को दबाने का एक सुनियोजित षड्यंत्र है।
रमेश दहिया ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

