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एनजीटी के निर्देशों पर प्रशासन हरकत में, अकेड़ा झील का निरीक्षण, प्रवासी पक्षियों के शिकार पर रोक

जिले की प्रसिद्ध अकेड़ा झील, जिसे कोटला-आकेड़ा या कोटला आकेड़ा वेटलैंड के नाम से भी जाना जाता है, में प्रवासी पक्षियों के अवैध शिकार को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दायर शिकायत के बाद जिला प्रशासन और वन्य जीव...

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नूंह में आकेड़ा झील का निरक्षण करते जिला प्रशासन के अधिकारी। -निस
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जिले की प्रसिद्ध अकेड़ा झील, जिसे कोटला-आकेड़ा या कोटला आकेड़ा वेटलैंड के नाम से भी जाना जाता है, में प्रवासी पक्षियों के अवैध शिकार को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दायर शिकायत के बाद जिला प्रशासन और वन्य जीव विभाग ने संयुक्त रूप से निरीक्षण किया। यह निरीक्षण एनजीटी में जवाब दाखिल करने से पहले वास्तविक स्थिति का आकलन करने के उद्देश्य से किया गया।निरीक्षण टीम का नेतृत्व नूंह के एसडीएम अंकित पवार ने किया। इस दौरान सिंचाई विभाग, पंचायत विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, आकेड़ा थाना पुलिस तथा वन्य जीव विभाग के अधिकारी व कर्मचारी मौके पर मौजूद रहे। टीम ने करीब एक घंटे तक झील क्षेत्र का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि पहले लगाए गए जाल हटा दिए गए हैं और प्रवासी पक्षियों का शिकार पूरी तरह बंद है।

वन्य जीव विभाग के कर्मचारियों द्वारा झील क्षेत्र में लगातार निगरानी की जा रही है, जिससे किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर रोक लगी हुई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि भविष्य में शिकार की किसी भी कोशिश पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने झील के पानी का नमूना लिया, जिसे जल गुणवत्ता की जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा गया है।

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जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। वन्य जीव विभाग के जिला अधिकारी आर.के. जांगड़ा ने बताया कि एनजीटी में दायर मामला प्रवासी पक्षियों के शिकार से जुड़ा है। यह क्षेत्र जैव-विविधता की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। निरीक्षण के बाद तैयार रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर एनजीटी में जवाब दाखिल किया जाएगा। प्रशासन यह भी जांच कर रहा है कि क्या इस क्षेत्र को औपचारिक रूप से वेटलैंड घोषित किया जा सकता है।

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