मतदाता सूची की शुद्धता लोकतंत्र की रक्षा के लिए जरूरी : प्रदीप नरवाल
भिवानी की जाट धर्मशाला में शुक्रवार को भिवानी, तोशाम और बवानीखेड़ा विधानसभा क्षेत्रों के कांग्रेस कार्यकर्ताओं एवं बूथ स्तरीय अभिकर्ताओं (बीएलए-2) के लिए एक दिवसीय विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कांग्रेस ग्रामीण...
भिवानी की जाट धर्मशाला में शुक्रवार को भिवानी, तोशाम और बवानीखेड़ा विधानसभा क्षेत्रों के कांग्रेस कार्यकर्ताओं एवं बूथ स्तरीय अभिकर्ताओं (बीएलए-2) के लिए एक दिवसीय विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कांग्रेस ग्रामीण जिला अध्यक्ष अनिरुद्ध चौधरी और शहरी जिला अध्यक्ष प्रदीप जोगी ने संयुक्त रूप से की।
शिविर में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय सचिव एवं बवानीखेड़ा से पूर्व प्रत्याशी प्रदीप नरवाल तथा भिवानी जिले के एसआईआर प्रभारी एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी विनय यादव मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के दौरान बीएलए-2 को ‘वोट बचाओ, लोकतंत्र बचाओ’ अभियान के तहत निर्वाचन आयोग की प्रक्रियाओं और तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
प्रदीप नरवाल ने कहा कि वर्तमान समय में मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखना लोकतंत्र की मजबूती और देशहित के लिए आवश्यक है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
विनय यादव ने प्रतिभागियों को प्रशासनिक प्रक्रियाओं, निर्वाचन व्यवस्था तथा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21(3) से जुड़े कानूनी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कार्यकर्ताओं को तकनीकी रूप से दक्ष बनने और निर्वाचन संबंधी नियमों की सही समझ विकसित करने पर जोर दिया।
अध्यक्षीय संबोधन में अनिरुद्ध चौधरी और प्रदीप जोगी ने कहा कि आने वाले समय में जिले के विभिन्न ब्लॉकों और मंडलों में भी इसी प्रकार के प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने बीएलए-2 को निर्देश देते हुए कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य में सरकारी बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के साथ समन्वय बनाकर कार्य किया जाए, ताकि प्रत्येक पात्र मतदाता का नाम सूची में सुनिश्चित किया जा सके।
इस अवसर पर जिला कांग्रेस कमेटी के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने 2 फरवरी, 1881 को लाहौर (अब पाकिस्तान) से ‘द ट्रिब्यून’ का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है।
‘द ट्रिब्यून’ के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में 15 अगस्त, 1978 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।
हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास (प्रेसीडेंट), न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।
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