धमाला गांव में सामाजिक बुराइयों के खिलाफ ग्रामीणों की बड़ी पंचायत
नूंह के फिरोजपुर झिरका उपमंडल के गांव धमाला में समाज में सामाजिक बुराइयों के खिलाफ, युवाओं में फैल रही गलत प्रवृत्तियों और क्षेत्र में बढ़ रहे नशे व अपराध को लेकर पंचायत आयोजित की गई। गांव की शाही जामा...
नूंह के फिरोजपुर झिरका उपमंडल के गांव धमाला में समाज में सामाजिक बुराइयों के खिलाफ, युवाओं में फैल रही गलत प्रवृत्तियों और क्षेत्र में बढ़ रहे नशे व अपराध को लेकर पंचायत आयोजित की गई। गांव की शाही जामा मस्जिद में आयोजित इस बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, बुजुर्गों, युवाओं और सामाजिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। पंचायत का उद्देश्य मेवात क्षेत्र को सामाजिक बुराइयों से मुक्त करने के लिए सामूहिक प्रयासों को मजबूत बनाना रहा।
बैठक को संबोधित करते हुए शाही जामा मस्जिद के मुफ्ती मोहम्मद शाकिर ने कहा कि समाज में सुधार लाने की जिम्मेदारी केवल प्रशासन की नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक की भी है। उन्होंने कहा कि आज के समय में बच्चों और युवाओं को शिक्षा, अच्छे संस्कार और धार्मिक मूल्यों से जोड़ना बेहद जरूरी हो गया है। यदि परिवार और समाज मिलकर सही दिशा में काम करें तो आने वाली पीढ़ी को गलत रास्तों पर जाने से रोका जा सकता है।
उन्होंने ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा कि हर व्यक्ति अपने घर और आसपास के माहौल को बेहतर बनाने में सक्रिय भूमिका निभाए। समाज में शांति, भाईचारा और नैतिक मूल्यों को मजबूत करना सभी की जिम्मेदारी है।
सामाजिक बुराइयों के खिलाफ एकजुटता पर दिया जोर
इस अवसर पर हरियाणा के पूर्व मंत्री आज़ाद मोहम्मद ने कहा कि मेवात क्षेत्र हमेशा से भाईचारे, आपसी प्रेम और सामाजिक एकता के लिए जाना जाता रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की छवि खराब करने वाली गतिविधियों को किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। समाज की एकजुटता और जागरूकता से ही सकारात्मक बदलाव संभव है।
बैठक में मौजूद ग्रामीणों ने गांव और आसपास के क्षेत्रों में फैल रही सामाजिक बुराइयों, नशाखोरी, अपराध और आपसी झगड़ों के खिलाफ मिलकर काम करने का संकल्प लिया। साथ ही युवाओं को जागरूक करने और शिक्षा की ओर प्रेरित करने पर भी जोर दिया गया। पंचायत में उपस्थित लोगों ने कहा कि यदि समाज एकजुट होकर प्रयास करे तो क्षेत्र में शांति और सौहार्द का वातावरण और मजबूत होगा।
इस दौरान जुबैर अहमद अलवरी, सुल्ली उर्फ सुलेमान, इस्माइल, ज़ाकिर हुसैन, जफरुद्दीन बाघोड़िया, मास्टर कासिम आज़ाद, सोराब सरपंच, हाकम, बसीर, आज़ाद, अहमद अशोक, रमेश, अज्जी और ईसब सहित अनेक ग्रामीण मौजूद रहे।
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दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने 2 फरवरी, 1881 को लाहौर (अब पाकिस्तान) से ‘द ट्रिब्यून’ का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है।
‘द ट्रिब्यून’ के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में 15 अगस्त, 1978 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।
हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास (प्रेसीडेंट), न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।
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