सूरजकुंड शिल्प मेले में सुरों की सौगात, तरन्नुम मलिक जैन ने लूटी वाहवाही
सांस्कृतिक संध्या में तालियों से गूंजा पंडाल
सूरजकुंड मेले में मुख्य चौपाल पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या संगीत प्रेमियों के लिए यादगार बन गई। प्रसिद्ध पाश्र्व गायिका तरन्नुम मलिक जैन ने अपनी मधुर एवं ऊर्जावान प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत तरन्नुम मलिक जैन ने अपने लोकप्रिय गीत ‘सैयारा’, ‘लग जा गले के, फिर ये हसीं पल’ और ‘बड़े अच्छे लगते हैं’ से की, जिसने पूरे वातावरण को संगीतमय बना दिया। इसके पश्चात् जब उन्होंने ‘कुछ न कहो’ और ‘आज की रात होना है क्या’ जैसे सुपरहिट गीत प्रस्तुत किए, तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
छोटी चौपाल पर कलाकारों ने बिखेरे लोक संस्कृति के रंग
मेले की छोटी चौपाल पर देश-प्रदेश के ख्याति प्राप्त कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां लगातार दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रही हैं। बुधवार को दिनभर चले कार्यक्रमों में लोकनृत्य, शास्त्रीय नृत्य, सूफी संगीत, नाटक, रागनी और हास्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों से खूब तालियां बटोरीं। कार्यक्रम की शुरुआत नरेंद्र भारद्वाज मोंटी पार्टी की ओर से प्रस्तुत हरियाणवी सांस्कृतिक लोकनृत्य से हुई। इसके बाद शालू श्रीवास्तव ने शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुति से दर्शकों को कला की बारीकियों से रूबरू कराया। संगीत प्रेमियों के लिए निशांत शकलानी एवं सह कलाकारों द्वारा प्रस्तुत हिंदी सूफी बैंड खास आकर्षण रहा। नाट्य प्रेमियों को न्यू उथान थिएटर, कुरुक्षेत्र के कलाकारों ने उजबक राजा नाटक की प्रस्तुति देकर सामाजिक संदेश के साथ भरपूर मनोरंजन किया। वहीं शेखर श्रीवास्तव, नीरोत्तम व अंश की गिटार प्रस्तुति और कनिष्क करुती का केरो के पर कार्यक्रम दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर गया। लोक धुनों में राजू नाथ बीन पार्टी, जिया लाल डेरु पार्टी तथा राजकुमार की रागनी ने हरियाणवी रंग को और गाढ़ा किया। कार्यक्रम के बीच-बीच में हास्य कलाकार सतीश हरियाणवी ने चुटकुले सुनाकर दर्शकों का खूब मनोरंजन किया।
खूबसूरती को चार चांद लगा रही एलिफेंटा की त्रिमूर्ति
प्रसिद्ध एलिफेंटा गुफा की त्रिमूर्ति सूरजकुंड मेला की खूबसूरती को चार चांद लगा रही है और हर आने-जाने वाले को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। इस त्रिमूर्ति पर दूर से ही पर्यटकां की नजर पड़ जाती है और इस मूर्ति की नायाब खूबसूरती पर आकर ठहर जाती है।
एलिफेंटा की गुफाएं कलात्मक कलाकृतियों की श्रृंखला है जो कि एलिफेंटा आईलैंड में स्थित है। मुंबई के गेटवे आफ इंडिया से लगभग 12 किमी की दूरी पर अरब सागर में स्थित टापू है। जहां भगवान शिव के कई रूपों को उकेरा गया है।
लकड़ी की गजब नक्काशी
सूरजकुंड मेला हरियाणा प्रदेश ही नहीं अपितु देश के अन्य राज्यों के हस्तशिल्पियों को भी अपनी हस्तकला का प्रदर्शन करने के लिए बेहतरीन मंच प्रदान कर रहा है। सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला में आए ऐसे ही एक हस्तशिल्पी हैं तिरुपति बालाजी से आए फूला चंदू। फूला चंदू सूरजकुंड मेला में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोक व आत्मनिर्भर भारत विजन को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। फूला चंदू को को लकड़ी पर नक्काशी करने में महारथ हासिल है, जिसके माध्यम से वे लकड़ी पर गजब की नक्काशी करते हैं और लकड़ी को भगवान की मूर्तियों का रूप देते हैं। फूला चंदू द्वारा लगाई गई स्टॉल दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करने के साथ-साथ लोगों की आस्था का केंद्र बनी हुई है। फूला चंदू ने गेट नंबर-3 पर फूला वुड कार्विंग के नाम से शॉप लगाई हुई है। उन्होंने बताया कि मूर्तियां व अन्य सामान बेशक लकड़ी से बनाया जाता हैं लेकिन ये सालों तक चलती है और इनकी चमक भी सालों-साल बरकरार रहती है। मूर्तियां बनाने में सागवान, महागनी आदि लकड़ियों का प्रयोग किया जाता है। नक्काशी से लकड़ी पर तराशे गए भगवान श्री गणेश, भगवान बुद्ध, भगवान श्री कृष्ण, श्री वैंकटेश्वर, भगवान श्रीहरि विष्णु और तिरुपति बालाजी की मूर्तियां व अन्य सामान लोगों को सहज ही अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। वे सूरजकुंड मेला में विभिन्न देवी-देवताओं व अन्य प्रकार की 1 फीट से 6 फीट तक की लकड़ी की मूर्तियां लेकर आए हैं। दशरथ बताते हैं कि 6 फीट की एक प्रतिमा को बनाने में करीब 6 महीने का समय लगता है।

