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सूरजकुण्ड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेले में देश-विदेश की संस्कृतियों का रंगारंग संगम

सूरजकुण्ड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेले का छठा दिन भी दर्शकों की उमड़ती भीड़ और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रौनक के साथ बीता। मेले में युवा, कालेज के छात्र और परिवार सहित लोग खरीदारी, नृत्य और पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लेते नजर...

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सूरजकुण्ड मेले में ब्रज के कलाकार फूलों की होली खेलते हुए।-हप्र
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सूरजकुण्ड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेले का छठा दिन भी दर्शकों की उमड़ती भीड़ और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रौनक के साथ बीता। मेले में युवा, कालेज के छात्र और परिवार सहित लोग खरीदारी, नृत्य और पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लेते नजर आए। बंचारी के नंगाड़ों की थाप पर युवतियां झूमती रही, वहीं मुख्य चौपाल पर देश-विदेश के लोक कलाकार सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दे रहे थे।

मुख्य चौपाल पर रंग-बिरंगी प्रस्तुतियां

सूरजकुण्ड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेले
सूरजकुण्ड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेले

बृहस्पतिवार को मुख्य चौपाल पर उत्तर प्रदेश के कलाकारों ने वृंदावन की होली नृत्य प्रस्तुत की, जिसे देखकर दर्शक झूम उठे। मोजाम्बिक का पारंपरिक नृत्य शिंजो मैना व शिगुबो, बुर्किना फासो का मिक्स अफ्रो डांस, इजिप्ट के लोक गीत, कजाकिस्तान के शत्तिक नृत्य समूह, गुरुग्राम के आरपीएस स्कूल द्वारा भंगड़ा, हरियाणवी और राजस्थानी गीतों पर नृत्य की शानदार प्रस्तुतियां दिखाई गईं। इसके साथ ही इथोपिया, जॉर्डन, सेनेगल, इराक, जाम्बिया, साउथ सूडान और जिम्बाब्वे के कलाकारों ने पारंपरिक एवं आध्यात्मिक नृत्य प्रस्तुत किए।

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सूरजकुण्ड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेले में कार्निवाल परेड ने खिंचाई भीड़

सूरजकुण्ड मेले में शाम को छह बजे आयोजित कार्निवाल परेड ने पर्यटकों का भरपूर मनोरंजन किया। मिस्त्र, उत्तर प्रदेश, मेघालय सहित अन्य देशों और राज्यों के कलाकार पारंपरिक वेशभूषा और वाद्य यंत्रों के साथ परेड में शामिल हुए। दर्शक मुख्य रोड और गेट नंबर एक से लेकर वीआईपी धनतेसरी गेट तक खड़े होकर इस रंगीन परेड का आनंद ले रहे थे। सेल्फी और वीडियो बनाने में पर्यटक व्यस्त रहे। ढोल, बीन, तंबूरे, गिटार, वायलिन, फ्लूट, क्लेरिनेट, ड्रम्प्ट आदि वाद्य यंत्रों की धुन पर दर्शक थिरकते नजर आए।

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दक्षिण भारत की चित्रकला का वैभव

मेले में स्टॉल नंबर 917 पर तमिलनाडु के शिल्पकार केशव की तंजौर पेंटिंग पर्यटकों का आकर्षण बनी। 12 हजार से 12 लाख रुपए तक की पेंटिंग्स में तिरुपति बालाजी की 12 लाख रुपए की पेंटिंग विशेष आकर्षण रही। शुद्ध सोने की पन्नी और कीमती रत्नों से सजी यह कला 16वीं शताब्दी की पारंपरिक तंजौर शैली की प्रतिमूर्ति है।

स्थानीय हस्तशिल्प से महिला सशक्तिकरण

थीम स्टेट उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के शिल्पकार मुनेन्द्र कुमार ने मूंज और काश से बने 30-35 प्रकार के उत्पाद स्टॉल नंबर 312 पर प्रदर्शित किए। इन उत्पादों में फल टोकरी, पूजा डोर, लॉन्ड्री बास्केट, सजावटी टोकरी और घरेलू भंडारण आइटम शामिल हैं। इस काम से लगभग 250 ग्रामीण महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जो स्वरोजगार और आत्मनिर्भर बन रही हैं।

मेले में पर्यटक, युवा और परिवार दिनभर नृत्य, संगीत और शिल्पकला का आनंद लेते हुए देशी-विदेशी संस्कृतियों के मेलजोल के साक्षी बन रहे हैं।

सूरजकुंड मेले में मन्नत नूर की लाइव परफॉर्मेंस, सुरीली आवाज पर झूमा पंडाल

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