उपभोक्ता अधिकार

ऑक्सीजन संकट हांफते मरीजों के लिए व्यवस्था जिम्मेदार

ऑक्सीजन संकट हांफते मरीजों के लिए व्यवस्था जिम्मेदार

पुष्पा गिरिमाजी

कोविड-19 के इलाज के लिए दिल्ली के एक निजी अस्पताल में भर्ती मेरी पत्नी की मौत ऑक्सीजन की कमी के कारण हो गई। मुझे इस बात पर बहुत गुस्सा आया कि अस्पताल ने मुझे ऑक्सीजन की कमी के बारे में सूचित नहीं किया। यदि वे मुझे बताते तो मैं सिलेंडर का इंतजाम कर लेता। पत्नी की हालत सुधर रही थी और मैं उसके घर लौटने का इंतजार कर रहा था। अचानक एक सुबह मुझे बताया गया कि उसकी मृत्यु हो गई। बाद में मुझे पता चला कि ऑक्सीजन की कमी के कारण ऐसा हुआ। क्या मैं अस्पताल से मुआवजा मांग सकता हूं?

इन दुखद परिस्थितियों में आपकी पत्नी की असामयिक मृत्यु के बारे में सुनकर वास्तव में मुझे बहुत खेद है। डॉक्टर, नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मी जान बचाने के लिए वाकई में कड़ी मेहनत कर रहे हैं। दुर्भाग्य से, ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी के कारण देशभर के विभिन्न अस्पतालों में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है।

वास्तव में यह बहुत चौंकाने वाली बात है कि न तो केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकारों और यहां तक कि अस्पतालों ने भी दूसरी लहर के लिए कोई तैयारी नहीं की थी। इसके कारण लोगों को इतनी पीड़ा हुई कि उसे बयां नहीं किया जा सकता, पीड़ितों के परिजन अस्पतालों में बिस्तर एवं ऑक्सीजन और जीवन रक्षक दवाओं के लिए यहां से वहां भागते रहे। यह और भी भयावह है कि मरीजों से अत्यधिक राशि वसूलने वाले कुछ निजी अस्पतालों ने न तो अपने यहां के ऑक्सीजन संयंत्रों में निवेश किया था और न ही दूसरी लहर के दौरान अत्यधिक मांग को पूरा करने के लिए अतिरिक्त आपूर्ति की कोई व्यवस्था की थी। वे अच्छी तरह से जानते हैं कि मेडिकल ऑक्सीजन दूर-दराज के स्थानों से आती है और अल्प सूचना पर तुरंत नहीं पहुंच सकती।

दिल्ली हाईकोर्ट ने अब सभी अस्पतालों-मौजूदा और नए, को अपने स्वयं के ऑक्सीजन संयंत्र स्थापित करने का निर्देश दिया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी इसी तरह के निर्देश जारी किए हैं। उम्मीद है, कम से कम तीसरी लहर में, मेडिकल ऑक्सीजन के अभाव में मरीज दम नहीं तोड़ेंगे।

मुझे यह भी उल्लेख करना चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्यों से कहा है कि अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी के पीड़ितों को मुआवजे की मांग करने वाली जनहित याचिकाओं को ‘रीप्रेजेंटेशन’ के रूप में माना जाए और पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे की नीति के साथ सरकार अपना जवाब प्रस्तुत करे।

खैर, अब विशेष रूप से आपके प्रश्न पर आते हैं, हां, आप अस्पताल के खिलाफ शिकायत दर्ज कर सकते हैं, नुकसान के लिए मुआवजे की मांग कर सकते हैं। हालांकि, ऐसा करने के लिए, आपको सबसे महत्वपूर्ण सबूत इकट्ठा करने होंगे कि आपकी पत्नी की मृत्यु अस्पताल में ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी के कारण हुई थी।

क्या वे सच बताएंगे? ऑक्सीजन की कमी से संबंधित मौतों की संख्या का आकलन करने के लिए दिल्ली सरकार द्वारा गठित एक समिति (अदालत के आदेश पर) के सामने एक अस्पताल में जांच के बाद पेश केस फाइलों में ‘ऑक्सीजन की कमी’ का कोई उल्लेख नहीं था। वहां ‘श्वसन विफलता’ को मृत्यु के कारण के रूप में निर्दिष्ट किया गया था। चूंकि रक्त में ऑक्सीजन का स्तर बहुत कम होने के कारण श्वसन विफलता हो सकती है, यह अस्पताल के लिए रोगी को ऑक्सीजन प्रदान नहीं करने का संकेत हो सकता है। इसलिए आपको उनके इलाज से संबंधित सभी कागजात एकत्र करने होंगे और उनकी जांच करनी होगी। मृत्यु के सही कारण का पता लगाने के लिए आपको अपने स्तर पर भी जांच करने की आवश्यकता हो सकती है। कुछ अस्पतालों ने ऑक्सीजन हासिल करने में अदालत के हस्तक्षेप की मांग करते हुए खुद ऐसी कमी के कारण हुई मौतों के बारे में बात की थी। आपको ऐसे सभी सबूतों की जांच करनी होगी।

आपके लिए यह बेहतर हो सकता है कि आप उन लोगों में शामिल हो जाइये जिन्होंने समान परिस्थितियों में अपने परिवार के सदस्यों को खोया है। सामूहिक रूप से, आप अधिक जानकारी एकत्र कर सकते हैं और अपने तर्कों को पुष्ट करने के लिए विशेषज्ञ की राय ले सकते हैं। आपके मामले में, अस्पताल की लापरवाही है कि ऑक्सीजन की कमी के बारे में आपको पहले से सूचित करना चाहिए था, वह ऐसा करने में विफल हुआ। बेशक यह लापरवाही की श्रेणी में आता है। लेकिन इस बात को साबित करने के लिए आपको पहले अपनी पत्नी की मौत का कारण साबित करना होगा। 

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