सेहत

उचित आहार, अच्छे विचार से होगा बेड़ा पार

कोरोना से उबरे तो भय और चिंता ने घेरा

उचित आहार, अच्छे विचार से होगा बेड़ा पार

रितु ढिल्लों

कोविड की दूसरी लहर ने लोगों को मानसिक आघात भी खूब पहुंचाया। यही कारण है कि कोविड से निकलने के तीन-चार माह बाद भी लोगों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। थोड़ी सी सावधानी और चिकित्सक के परामर्श से इन दिक्कतों से पार पा सकते हैं। दरअसल, इन दिक्कतों से उबरने के लिए पॉजिटिव एटिट्यूड सबसे बड़ा टॉनिक है। इसी के साथ अपनी जीवनशैली को संयमित रखें और मिनरल, प्रोटीन व विटामिन युक्त आहार लें। दिल्ली के राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की पोस्ट कोविड क्लीनिक में तैनात डाॅ. विकास कुमार का कहना है कि जो लोग दो से तीन माह पहले कोविड से उबर चुके हैं, वे भी थकान और भूलने की समस्या से जूझ रहे हैं। हाथ-पैरों में दर्द की शिकायत कर रहे हैं और साथ ही शक्ति व स्फूर्ति की कमी भी उन्हें परेशान कर रही है। थकान का कारण यह है कि संक्रमण से जूझने के दौरान उनके शरीर में माइक्रोन्यट्रिएंट्स की कमी हो गई। इसकी पूर्ति के लिए संयमित जीवनशैली और बेहतर पोषण जरूरी है। इसलिए मिनरल, प्रोटीन और विटामिन युक्त भोजन करें। शारीरिक मेहनत भी कम करें। योग करें, लेकिन विशेषज्ञ के निर्देशन में। नकारात्मक विचारों से दूर रहने का प्रयास करें। डाॅ. विकास बताते हैं कि कोविड होने के बाद शरीर में शुगर लेबल अचानक बढ जाने की शिकायतें भी आ रही हैं। निस्संदेह कोविड के उपचार के दौरान स्ट्रॉयड लेने वालों को यह समस्या ज्यादा हुई है, लेकिन जिन लोगों ने स्ट्रॉयड नहीं लिए, उन्हें भी इस तरह की शिकायतें हो रही हैं। इसलिए पोस्ट कोविड समस्याओं से जूझ रहे मरीज शुगर लेबल का ध्यान अवश्य रखें। ऐसे में शराब, सिगरेट और तंबाकू आदि के सेवन से बचें। 'जर्नल ऑफ क्लीनिकल स्लीप मेडिसिन' में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक कोविड महामारी के चलते अ‌निद्रा की शिकायतें 40 फीसदी तक बढ़ी हैं। ऐसा भय और चिंता के माहौल के चलते हुआ है।

डिप्रेशन से हो रही भूलने की बीमारी

कोविड के बाद लोगों में भूलने की शिकायतें बढ़ी हैं। कुछ देर पहले की बात भी लोग भूल रहे हैं। गाजियाबाद के जिला मानसिक रोग प्रकोष्ठ में बतौर वरिष्ठ साइकेट्रिस्ट कंसलटेंट तैनात डाॅ. साकेतनाथ तिवारी का कहना है कि कोविड के बाद काफी संख्या में लोग डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। ऐसा लंबे समय तक काम बंद रहने के कारण, या फिर नौकरी चले जाने के कारण हो रहा है। डिप्रेशन की स्थिति में कई बार हमारे सोचने का प्रोसेस बहुत तेज़ हो जाता है। मतलब एक ही समय में कई विचार हमारे मस्तिष्क में चलने लगते हैं। इस बीच यदि किसी ने कुछ कहा, या किया तो मस्तिष्क उस बात को नोटिस ही नहीं ले पाता है। नोटिस नहीं ले पाता तो वह बात हमारे मस्तिष्क में दर्ज ही नहीं हो पाती। ऐसे में वह बात याद रहे भी तो कैसे। सामान्य स्थिति में ऐसा नहीं होता। सामान्यतः दिमाग शांत रहता है तो हर बात रजिस्टर होती रहती है और जरूरत पड़ने पर मस्तिष्क उसे आसानी से रिकॉल कर लेता है। डाॅ. तिवारी बताते हैं कि डिप्रेशन का मूल लक्षण मन उदास रहना माना जाता है लेकिन कई बार डिप्रेशन के शुरुआती लक्षणों में ऐसा नहीं होता है। छोटी-छोटी बातें भूलना, शरीर थका-थका रहना, चिड़चिड़े रहना, नींद न आना, घबराहट होना और काम में मन न लगना भी लक्षण हो सकते हैं। कोविड के बाद भूलने की शिकायत लेकर लोग आ रहे है। उनका कहना है कि ऐसी शिकायत होने पर एक बार किसी अच्छे मनोचिकित्सक से सलाह अवश्य लें। शुरू में पता चल जाए तो डिप्रेशन का उपचार भी आसान होता है।

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