इस जश्न के मूल में निहित है मोदी का हिमाचल प्रेम

इस जश्न के मूल में निहित है मोदी का हिमाचल प्रेम

शशिकांत शर्मा

आठ वर्षों के कार्यकाल की उपलब्धियों के जश्न के लिए अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिमला को चुना है तो इसकी अपनी एक खास वजह है। दरअसल, हिमाचल मोदी के शुरुआती दिनों की राजनीतिक कार्यस्थली रही है। वे अक्सर कहते हैं कि उनकी राजनीतिक जीवन की शुरुआत हिमाचल से ही हुई है। इस प्रदेश से उनका गहरा नाता रहा है।

नरेंद्र मोदी लगभग ढाई दशक पहले जब पहली बार हिमाचल आए थे तो उन्होंने खुद भी यह नहीं सोचा था कि इस देवभूमि से शुरू हुआ उनका ये राजनीतिक सफर गुजरात के रास्ते से होते हुए उन्हें एक दिन दिल्ली की राजगद्दी तक ले जाएगा। सन‍् 1998 में बनी हिमाचल की धूमल सरकार से पहले राज्य भाजपा प्रभारी बन कर यहां आए नरेंद्र मोदी ने अपनी विलक्षण प्रतिभा, राजनीतिक सूझबूझ और कड़ी मेहनत के बलबूते पर देश में ही नहीं बल्कि दुनियाभर में आज अपनी जो जगह बनाने में कामयाबी हासिल की है उसकी शुरुआत हिमाचल से ही हुई है। मोदी हिमाचल के चप्पे-चप्पे से वाकिफ हैं। यहां के लोगों के साथ आज भी उनके अंतरंग सम्बंध हैं। उनके शुरुआती सफर की यादें राजधानी शिमला के साथ हिमाचल भर में बिखरी

पड़ी हैं।

मोदी के काम करने के अपने स्टाइल को आज भी यहां के लोग याद करते नहीं थकते। बताते हैं कि प्रदेश में आते ही सबसे पहला काम उन्होंने ये किया की पुराने ढर्रे पर चल रहे हिमाचल भाजपा के कार्यालय को आधुनिक साधनों से सुसज्जित कर दिया। कार्यालय में नए कम्प्यूटर लगाए गए और धीरे-धीरे सारा काम कम्प्यूटरों पर होने लगा। इतना ही नहीं काम की गति में तेजी लाने के लिए नयी गाड़ियां भी खरीदी गयीं। हिमाचल भाजपा पर ज़्यादा आर्थिक बोझ न पड़े इसके लिए उन्होंने अपने संबंधों का इस्तेमाल करके डोनेशन के जरिए पैसा भी जुटाया। उनसे पहले कभी किसी प्रभारी ने ऐसा नहीं किया था। भाजपा की बैठकों में रणनीति बनाए जाने के स्वरूप को भी उन्होंने बदल डाला। बैठकों में मोदी खुद भी डायरी लेकर बैठते थे और सुनिश्चित करते थे कि बाकी सारे नेता भी डायरी लेकर बैठें। हर बैठक की शुरुआत पिछली बैठक में लिए गए निर्णयों पर हुए काम से होती थी। इससे पार्टी के काम की गति ऐसी तेज हुई कि भाजपा में नया जोश आ गया।

मोदी को जब भी वक्त मिलता था वे शिमला के माल रोड का चक्कर जरूर लगाते थे। माल रोड पर कॉफी हाउस में पत्रकारों के साथ बैठना और उनसे गप्पबाजी करना उन्हें बहुत अच्छा लगता था। वे इस बात पर बहुत खुश होते थे कि कहां तो नेता लोग पत्रकारों को चाय-कॉफी पिलाते हैं, कहां कॉफी हाउस में बैठने वाले पत्रकार उनके कॉफी का पैसा भी खुद देते हैं।

मालरोड से सटे दीपक भोजनालय में भी वो अक्सर आते-जाते थे। यह भोजनालय भाजपा के एक कार्यकर्ता का ही है। दीपक का छोटा-सा घर भी इसी गली में भोजनालय के ठीक सामने है। कभी-कभी दिन में आराम करने के लिए मोदी यहां आकर घर के एक तख्तपोश पर लेट जाते थे। दीपक और उनके परिवार के सदस्यों को मोदी जी के साथ बिताया गया वो समय आज भी याद है।

हिमाचल में भाजपा की सरकार बनने के बाद मोदी जब तक यहां रहे उन्होंने आम लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ अपने आपको पूरी तरह से जोड़े रखा। लेकिन इसके बावजूद वे हिमाचल में चलने वाली तबादला राजनीति में कभी नहीं पड़े। एक बार कॉफी हाउस में अपने एक खासमखास कार्यकर्ता की सिफारिश पर तबादला करने से उन्होंने यह कहते हुए साफ मना कर दिया कि वो इस तरह के कामों में नहीं पड़ते।

मोदी का मानना था कि किसी भी मुख्यमंत्री या सरकार को तबादलों जैसे अनुत्पादक कामों में समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री बन गए तो लेखक को उनसे गांधी नगर में मिलने का मौका मिला। बातचीत कि दौरान मुस्कुराते हुए उन्होंने अचानक कहा कि हिमाचल और गुजरात के सचिवालय में आपको एक अंतर नजर आया होगा। गुजरात सचिवालय में लोगों की उतनी भीड़ नहीं दिखी होगी, जितनी हिमाचल में दिखती है। उनका कहना था कि हिमाचल में कोई भी मुख्यमंत्री हो वहां छोटे से छोटे कर्मचारी का तबादला भी मुख्यमंत्री करते हैं और इस वजह से वो नीति निर्धारण जैसे कामों के लिए अधिक समय नहीं दे पाते। वो तबादलों में ही उलझे रहते हैं जबकि गुजरात में मेरी कोशिश रहती है कि मैं प्रदेश में निवेश लाने और विकास सम्बन्धी गतिविधियों पर अधिक समय लगाऊं। आज भी सुबह से मैं एक विदेशी प्रतिनिधिमंडल के साथ लम्बी बैठक में था। इस बैठक से गुजरात में करीब सोलह हजार करोड़ के निवेश का रास्ता साफ हुआ है। मुझे लगता है कि सरकार में जो काम जिसके जिम्मे है उसे ही करना चाहिए। अगर किसी मंत्री या अधिकारी से काम की सिफारिश लेकर कोई मेरे पास आता है तो मैं उसे शिकायत मानता हूं सिफारिश नहीं। इस बारे में उन्होंने राजकोट जिले में तैनात एक युवा आईएएस अधिकारी का एक उदाहरण भी दिया जो हिमाचल के सिरमौर जिले से सम्बंध रखता था।

हिमाचल में जिस दिन सन‍् 1998 में पहली बार धूमल सरकार बनी थी उस दिन शपथ ग्रहण समारोह के बाद भी एक ऐसा वाकया हुआ जो मोदी को अन्य नेताओं से अलग करता है। हुआ यह कि शपथ ग्रहण से पहले मोदी और प्रोफ़ेसर प्रेम कुमार धूमल पार्टी की टाटा सूमो जीप में राजभवन आए। शपथ के बाद जब मोदी और धूमल राजभवन से वापस जाने लगे तो मुख्यमंत्री के लिए सरकारी पायलट और ऐसकोर्ट वाला काफिला बाहर लगा था। धूमल के लिए ड्राइवर ने जैसे ही कार का दरवाजा खोला उन्होंने साथ खड़े मोदी से कहा कि पहले आप बैठिए। लेकिन मोदी ने यह कह कर सबको चौंका दिया कि धूमल जी ये कार आपकी है। आप बैठिए मैं पार्टी की गाड़ी में ही आऊंगा।

मोदी को हिमाचल छोड़े भले ही लम्बा समय हो गया हो लेकिन यह प्रदेश आज भी उनके दिल में बसा है। यहां के लोगों के साथ उनका संपर्क आज भी कायम है। यहां के लोगों द्वारा भेजे जाने वाली चिट्ठियों और ग्रीटिंग्स कार्ड को न केवल वह संभाल कर रखते हैं बल्कि यह सुनिश्चित करते हैं कि उनका जवाब भी जाए। भारी व्यस्तताओं के बावजूद जब भी उन्हें मौका मिलता है वे प्रदेश में जरूर आते हैं। चुनाव नजदीक होने के कारण अब तो प्रचार के लिए भी उनका यहां आना-जाना रहेगा। प्रदेश के लोगों को उम्मीद है कि उनके बार-बार आने से प्रदेश को जरूर फायदा होगा। अटल बिहारी वाजपेयी के बाद मोदी ऐसे दूसरे प्रधानमंत्री हैं, जिनकी तरफ हिमाचल प्रदेश टकटकी लगाए देख रहा है। अब देखना यह होगा कि हिमाचल के लोगों की उम्मीदें किस हद तक पूरी हो पाती हैं।

बिजली महादेव के प्रति श्रद्धा

कुल्लू में लगभग 2460 मीटर ऊंची पहाड़ी पर स्थित भगवान शिव के प्राचीन बिजली महादेव के मंदिर के प्रति प्रधानमंत्री मोदी के मन में आज भी अगाध श्रद्धा है। इस मंदिर की खासियत है कि स्थानीय लोग मंदिर में आसपास के गांवों से इकट्ठा किए गए मक्खन से बनी शिवजी की पिंडी को पूजते हैं। मोदी पूरा दिन की ट्रैकिंग करके यहां पहुंचते थे। यह उनकी श्रद्धा ही है कि उन्होंने केंद्र सरकार की पर्वतमाला योजना के तहत पिछले साल ही 200 करोड़ का एक रोपवे प्रोजेक्ट मंजूर कराया है।

गुजरात में शुरू करवाई पैराग्लाइडिंग

मोदी को सन‍् 1997 में मनाली के मशहूर पर्यटन स्थल सोलंग नाला में रोशन ठाकुर नाम के एक स्थानीय युवक ने पैराग्लाइडिंग करायी थी। गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद मोदी ने रोशन को गुजरात बुलाया और वहां के एकमात्र हिल स्टेशन सापूतारा में उनकी मदद से इस रोमांचक खेल की शुरुआत करायी। आज भी हिमाचल के पैराग्लाइडर्स सापूतारा में समय-समय पर होने वाले पैराग्लाइडिंग कम्पीटिशन में भाग लेने जाते हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी एक बार जब कुल्लू आए तो उन्होंने अपनी जनसभा में पैराग्लाइडिंग सिखाने वाले रोशन ठाकुर का जिक्र भी किया। प्रधानमंत्री के मुंह से अपना नाम सुनते ही इसी जनसभा में मौजूद रोशन इतना भावुक हो गया की उसकी आंखों में आंसू आ गए।

बरकरार है कॉफी का स्वाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब पिछली बार मौजूदा सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए 27 दिसंबर, 2017 को शिमला आए थे तो मालरोड पर स्थित कॉफी हाउस की अपनी खास कॉफी को पीने का मौका उन्होंने तब भी नहीं छोड़ा था। तत्कालीन राज्यपाल आचार्य देवव्रत के साथ कार में मालरोड पहुंचे मोदी का काफिला जब अचानक कॉफी हाउस के सामने रुक गया तो सभी लोग हैरान रह गए। उन्होंने कॉफी हाउस के बाहर ही कॉफी की चुस्कियां लीं और इस दौरान वहां मौजूद लोगों के साथ सेल्फी भी खिंचवाई। इस मौके पर इस लेखक के साथ एक अनौपचारिक बातचीत में वे यह कहना भी नहीं भूले कि शिमला आकर कॉफी न पी जाए ऐसा हो नहीं सकता। जल्दी-जल्दी ही सही कॉफी का मजा तो आया। यह भी संभव है कि मोदी कल की अपनी यात्रा के दौरान भी मौका मिलने पर कॉफी हाउस की अपनी इस पसंदीदा कॉफी की चुस्की लगा जाएं।

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