आसमानी खौफ से पृथ्वी बचाने का मिशन : The Dainik Tribune

कवर स्टोरी

आसमानी खौफ से पृथ्वी बचाने का मिशन

आसमानी खौफ से पृथ्वी बचाने का मिशन

आसमानी खतरा बने क्षुद्रग्रहों की अतीत में पृथ्वी से जब भी टक्कर हुई तो भारी तबाही हुई। वैज्ञानिक उन क्षुद्रग्रहों पर नजर रख रहे हैं जो पृथ्वी की निकटवर्ती कक्षाओं में हैं। अंतरिक्ष एजेंसियां खतरनाक क्षुद्रग्रहों की दिशा बदलने के संभावित तरीकों पर काम कर रही हैं।

मुकुल व्यास

लेखक विज्ञान संबंधी विषयों के जानकार हैं।

क्षुद्रग्रहों के बारे में सुन कर मन में खौफ-सा पैदा होता है क्योंकि हमारी पृथ्वी अतीत में इनके विनाशकारी प्रभाव देख चुकी है। करीब 6.6 करोड़ वर्ष पहले मैक्सिको के युकाटन प्रायद्वीप के निकट उथले समुद्र में एक क्षुद्रग्रह गिरा था जिसके बाद हमारे ग्रह पर भारी उथल-पुथल हुई। डायनासोरों का सफाया हो गया और पृथ्वी पर जीव विज्ञान में एक नये युग की शुरुआत हुई। जिस स्थान पर यह क्षुद्रग्रह गिरा वहां पर एक विशाल क्रेटर बना जिसका व्यास 180 किलोमीटर और गहराई 20 किलोमीटर है। इसे चिक्सुलुब क्रेटर के नाम से जाना जाता है। अब एक नई रिसर्च के अनुसार, इस क्षुद्रग्रह ने एक दैत्याकार सुनामी भी उत्पन्न की जो पृथ्वी पर मानव अस्तित्व के दौरान देखी गई किसी भी प्रचंड लहर से हजारों गुणा ज्यादा शक्तिशाली थी। इस क्षुद्रग्रह के तगड़े प्रहार ने पृथ्वी पर गहरे निशान छोड़े । पिछले साल शोधकर्ताओं ने पता लगाया कि इस प्रहार के बाद उत्पन्न लहरों ने अमेरिका के मध्य लुइसियाना के नीचे पृथ्वी की पर्पटी पर विशाल लहरें उत्कीर्ण कर दी थीं। अब अमेरिका के मिशिगन विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक मोली रेंज द्वारा किए गए नये अध्ययन में कहा गया है कि इस क्षुद्रग्रह से उत्पन्न हुई सुनामी ऊर्जा और आकार की दृष्टि से अब तक की सबसे शक्तिशाली लहर थी जिसने समुद्र तल को साफ कर हजारों किलोमीटर दूर तक तलछट मिटा दिए।

क्षुद्रग्रहों के भयावह इतिहास को देखते हुए वैज्ञानिक उन क्षुद्रग्रहों पर खास नजर रख रहे हैं जो पृथ्वी की निकटवर्ती कक्षाओं में हैं। पिछले दिनों वैज्ञानिकों ने सूरज की चकाचौंध में छिपे एक 'प्लेनेट किलर' क्षुद्रग्रह का पता लगाया जो किसी दिन पृथ्वी से टकरा सकता है। 1.5 किलोमीटर चौड़ा क्षुद्रग्रह,जिसका नाम 2022 एपी 7 है,कई बड़ी अंतरिक्ष शिलाओं में से एक है जिन्हे खगोलविदों ने हाल में पृथ्वी और शुक्र की कक्षाओं के पास खोजा है। इस समय 2022 एपी7 पृथ्वी की कक्षा को पार करता है जबकि हमारा ग्रह सूर्य की विपरीत दिशा में है लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि हजारों वर्षों में,क्षुद्रग्रह और पृथ्वी धीरे-धीरे एक ही बिंदु को एक साथ पार करना शुरू कर देंगे, जिससे विनाशकारी टक्कर की संभावना बढ़ जाएगी। वैज्ञानिकों ने चिली में सेरो टोलोलो इंटर-अमेरिकन ऑब्जर्वेटरी का उपयोग करते हुए इस क्षुद्रग्रह की खोज की है। उन्होंने दो अन्य पृथ्वी-समीप क्षुद्रग्रहों की भी खोज की है। वैज्ञानिक पृथ्वी की निकटवर्ती कक्षाओं में स्थित क्षुद्रग्रहों को नियर अर्थ एस्टेरॉइड (एनइए) भी कहते हैं। नये खोजे गए क्षुद्रग्रहों का वर्णन द एस्ट्रोनॉमिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

अमेरिका के कार्नेगी इंस्टीट्यूशन फॉर साइंस के एक खगोलशास्त्री और इस अध्ययन के प्रमुख लेखक स्कॉट शेपर्ड ने कहा,अब तक हमें दो बड़े पृथ्वी-समीप क्षुद्रग्रह मिले हैं जो लगभग एक किलोमीटर चौड़े हैं। इस आकार के पिंड को हम प्लेनेट किलर कहते हैं। प्लेनेट किलर क्षुद्रग्रह ऐसी बड़ी अंतरिक्ष चट्टानें हैं जो पृथ्वी से टकराने पर वैश्विक पैमाने पर सामूहिक विलुप्ति की घटना का कारण बनती हैं। इन क्षुद्रग्रहों को खोजने के लिए खगोलविदों ने आंतरिक सौरमंडल पर सेरो टोलोलो टेलीस्कोप के डार्क एनर्जी कैमरे को आंतरिक सौर मंडल पर लक्षित किया। सूरज की चकाचौंध के कारण दिन के अधिकांश समय पर्यवेक्षण असंभव होता है। शोधकर्ताओं के पास पर्यवेक्षण के लिए हर रात सिर्फ 10 मिनट का गोधूलि का समय था। शेपर्ड ने बताया कि सूर्य की चकाचौंध के समीप देखने में कठिनाई के कारण केवल 25 क्षुद्रग्रहों की खोज की गई है जिनकी कक्षाएं पूरी तरह से पृथ्वी की कक्षा के भीतर हैं। समान आकार के कुछ पृथ्वी-समीप क्षुद्रग्रह खोजे जाने बाकी हैं। नासा लगभग 28,000 क्षुद्रग्रहों के स्थानों और कक्षाओं को ट्रैक करता है और उनका एटलस सिस्टम से अनुसरण करता है। यह सिस्टम चार दूरबीनों की एक शृंखला है जो हर 24 घंटे में पूरी रात के आकाश को स्कैन कर सकती है। अमेरिकी अंतरिक्ष प्रशासन पृथ्वी के 19.3 करोड़ किलोमीटर के भीतर आने वाले किसी भी अंतरिक्ष ऑब्जेक्ट को 'पृथ्वी-समीप ऑब्जेक्ट' के रूप में चिह्नित करता है और हमारे ग्रह के 75 लाख किलोमीटर के भीतर किसी भी बड़े पिंड को 'संभावित रूप से खतरनाक' के रूप में वर्गीकृत करता है।

एटलस को 2017 में ऑनलाइन किया गया था। तब से इसने 700 से अधिक पृथ्वी-समीप क्षुद्रग्रहों और 66 धूमकेतुओं को देखा है। एटलस द्वारा खोजे गए दो क्षुद्रग्रह, 2019 एमओ और 2018 एलए वास्तव में पृथ्वी से टकराए। पहला,प्यूर्टो रिको के दक्षिणी तट पर फटा और दूसरा बोत्सवाना और दक्षिण अफ्रीका की सीमा के पास टकराया। सौभाग्य से ये क्षुद्रग्रह छोटे थे और नुकसान नहीं हुआ।

100 वर्ष तक खतरा नहीं, पर...

नासा ने सदी के अंत तक सभी पृथ्वी-समीप पिंडों की दिशाओं का अनुमान लगाया है। उसके अनुसार पृथ्वी को कम से कम अगले 100 वर्षों तक विनाशकारी क्षुद्रग्रह टक्कर से कोई ज्ञात खतरा नहीं है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि खगोलविदों को उन्हें देखना बंद कर देना चाहिए। उदाहरण के लिए,मार्च 2021 में एक बॉलिंग बॉल के आकार की उल्का 200 किलोग्राम टीएनटी के बल के साथ अमेरिका में वर्मोंट के ऊपर विस्फोटित हुई थी। रूस के चेल्याबिंस्क के ऊपर 2013 में एक उल्कापिंड का विस्फोट हुआ था जिसकी ताकत लगभग 400 से 500 किलोटन टीएनटी के बराबर थी। विस्फोट की ताकत हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम द्वारा उत्पन्न ऊर्जा से 26 से 33 गुणा अधिक थी और इससे लगभग 1,500 लोग घायल हुए थे।

रक्षा प्रणाली का परीक्षण

अंतरिक्ष वैज्ञानिक और ग्रह रक्षा विशेषज्ञ क्षुद्रग्रहों के खतरों से भलीभांति परिचित हैं और इनसे पृथ्वी की रक्षा के उपाय खोजते रहते हैं। दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियां खतरनाक क्षुद्रग्रहों की दिशा बदलने के संभावित तरीकों पर काम कर रही हैं। गत वर्ष 26 सितंबर को पृथ्वी की ग्रह रक्षा प्रणाली के पहले परीक्षण में नासा का डार्ट अंतरिक्ष यान गैर-खतरनाक क्षुद्रग्रह डिमोर्फोस से जानबूझ कर टकराया था। इस टक्कर के बाद क्षुद्रग्रह की कक्षा में 32 मिनट का परिवर्तन हो गया था। चीन भी क्षुद्रग्रहों की दिशा मोड़ने की योजना बना रहा है। उसका क्षुद्रग्रह-पुनर्निर्देशित मिशन प्रारंभिक नियोजन चरणों में है। उसकी योजना बेन्नू क्षुद्रग्रह पर 23 लांग मार्च-5 रॉकेट दागने की है। यह क्षुद्रग्रह 2175 और 2199 के बीच पृथ्वी की कक्षा के 74 लाख किलोमीटर भीतर आएगा।

साइकि मिशन की अहमियत

नासा के आगामी मिशनों में साइकि मिशन की सबसे ज्यादा प्रतीक्षा है। यह यान मंगल और बृहस्पति के बीच क्षुद्रग्रह पट्टी के लिए 45 करोड़ किलोमीटर दूर उड़ान भरेगा। इसका मकसद यह पता लगाना है कि क्या यह बड़ा धातु-समृद्ध चट्टानी पिंड पृथ्वी के गर्भ के निर्माण जैसी परिस्थितियों में निर्मित हुआ था। साइकि को प्रारंभिक ग्रह का प्राचीन गर्भ भाग माना जाता है। साइकि की चट्टानी सामग्री के अध्ययन से यह समझने में मदद मिलेगी कि हमारे सौरमंडल ने किस तरह अपनी अराजक शुरुआत को झेला और पृथ्वी जैसे ग्रहों का निर्माण कैसे हुआ। नासा ने बीते साल की शुरुआत में साइकि मिशन को लांच करने की योजना बनाई थी,लेकिन अंतरिक्ष यान के उड़ान सॉफ्टवेयर और नौचालन उपकरण देर से मिलने के कारण मिशन अपनी निर्धारित तिथि पर नहीं छोड़ा जा सका। चूंकि नासा के पास लांच से पहले सिस्टम पर प्रारंभिक परीक्षण पूरा करने का समय नहीं था,इसलिए मिशन को अक्तूबर 2023 तक खिसका दिया गया। नासा की योजनाओं में जानूस मिशन भी है जो दो क्षुद्रग्रहों की प्रणाली का अध्ययन करेगा।

क्यों जरूरी है अध्ययन

सभी क्षुद्रग्रह खतरनाक नहीं हैं। ये हमारे सौरमंडल के बहुत महत्वपूर्ण पिंड हैं। अनेक वैज्ञानिक मानते हैं कि सौरमंडल के निर्माण की कहानी को बेहतर ढंग से समझने के लिए क्षुद्रग्रहों का गहन अध्ययन जरूरी है। अंतरिक्ष अन्वेषण के लिहाज से क्षुद्रग्रह विज्ञान तेजी से वैज्ञानिकों की प्रमुख प्राथमिकता बन रहा है। नासा का लुसी अंतरिक्ष यान बृहस्पति के ट्रोजन क्षुद्रग्रहों की 12 साल की यात्रा पर है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का आगामी हेरा मिशन डिमॉर्फोस क्षुद्रग्रह पर नासा के यान की टक्कर के दृश्य का सर्वेक्षण करने के लिए इस क्षुद्रग्रह की यात्रा करेगा। अभी तक दुनिया की अंतरिक्ष एजेंसियों ने क्षुद्रग्रहों की जांच करने के लिए लगभग 15 मिशन छोड़े हैं। कुछ अन्य भविष्य में छोड़े जाएंगे। आम तौर पर ब्रह्मांड के बड़े पिंड अंतरिक्ष अनुसंधान की सुर्खियों में रहते हैं। फिर ऐसी कौन सी चीज है जो इन भटकते चट्टानी पिंडों को हमारी वैज्ञानिक जांच के योग्य बनाती है? नासा में ग्रह विज्ञान विभाग के एक विज्ञानी टॉम स्टेटलर के अनुसार ऐसा इसलिए है क्योंकि क्षुद्रग्रहों के बारे में कई पहलू हमारे लिए आज भी एक रहस्य बने हुए हैं। क्षुद्रग्रहों के बारे में सीख कर हम यह समझने लगे हैं कि वे वास्तव में कितने विविध हैं। उस विविधता को समझना और हमारे सौरमंडल की कहानी को बताना एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है।

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