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भारतीय कला का वैश्विक उत्सव और आर्थिक संबल

नये साल में कला

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वर्ष 2026 भारतीय कला के लिए उत्सव का वर्ष होगा। यह साल समकालीन कला, लोक परंपराओं, और हस्तशिल्प के संगम का प्रतीक बनेगा। कला महोत्सव, डिजिटल क्यूरेशन और हस्तशिल्प मेलों के माध्यम से भारतीय कला का वैश्विक विस्तार होगा, जिससे न केवल संस्कृति, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

नयी दिल्ली में होने वाला ‘इंडिया आर्ट फेयर’, जो दक्षिण एशिया के सबसे प्रभावी कला मेलों में एक माना जाता है, यहां भारतीय कलाकारों की कलाकृतियां अंतर्राष्ट्रीय प्रशंसकों और कलाप्रेमियों का ध्यान आकर्षित करेंगी। वहीं केरल में 31 मार्च तक आयोजित होने वाली एशिया की सबसे बड़ी समकालीन कला प्रदर्शनी, ‘कोच्चि मिजरिश बिनाले’, भारतीय कला की प्रतिष्ठा को दुनिया के दो दर्जन से ज्यादा देशों तक पहुंचाएगी।

इस साल 24 फरवरी से 2 मार्च तक जहांगीर आर्ट गैलरी, मुंबई में आयोजित होने वाली 134वीं आल इंडिया एनुअल आर्ट एक्सहिबिशन की बात न की जाए तो इस साल के कला कार्यक्रमों का संदर्भ अधूरा रहेगा। दरअसल, जहांगीर आर्ट गैलरी में यह आयोजन भारत की परंपरागत और समकालीन चित्रकला समुदाय के लिए एक प्रतिष्ठित वार्षिक प्रदर्शनी है। यहां कलाकारों को पुरस्कार, पहचान और एक बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंच मिलती है। इस गैलरी की अपनी निजी प्रतिष्ठा ऐसी है कि यहां प्रदर्शित होने वाली कृतियां दुनिया के कोने-कोने तक अपनी लोकप्रियता हासिल करती हैं।

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वर्ष 2026 में भारतीय कला सिर्फ प्रदर्शनी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि लोक और हस्तशिल्प में भी एक मजबूत हस्तक्षेप करेगी। फरीदाबाद का सूरजकुंड हस्तशिल्प मेला, लोककला और शिल्पकारों के लिए अब दक्षिण एशिया की सबसे प्रतिष्ठित पहचान बन गया है। यहां कारीगरों की पीढ़ीगत कला, मिट्टी, धातु, कपड़ा और लकड़ी नए बाजार और सम्मान पाएगी। यह कला सिर्फ दीर्घाओं तक सीमित नहीं रहती, बल्कि अपने शिल्प से शिक्षण और रोजगार का विस्तार भी करती है। अनुमान है कि कई सौ करोड़ का कारोबार करने वाला यह हस्तशिल्प मेला अब दुनिया के बड़े हस्तशिल्प मेलों के साथ हाथ मिलाने की तैयारी में है। इसके बाद सूरजकुंड का यह मेला न केवल कारीगरों के लिए सफलता और कमाई के नए द्वार खोलेगा, बल्कि भारत की कला की लोकप्रियता को भी नए पंख देगा।

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इस वर्ष कई कला महोत्सव डिजिटल क्यूरेशन, एआर/वीआर अनुभव और इंटरेक्टिव इंस्टॉलेशन को भी नया विस्तार देंगे, जिससे युवा दर्शक जुड़ेंगे और परंपरा को आधुनिक भाषा मिलेगी। साथ ही, कलाकार वार्ताएं और कार्यशालाएं कला को देखने के बजाय समझने का अवसर प्रदान करेंगी। कुल मिलाकर, इस वर्ष भारतीय कला महोत्सव सिर्फ प्रदर्शन नहीं, बल्कि संवाद, समावेशन और आत्मविश्वास का उत्सव वर्ष होगा। परंपरा अपनी जगह में स्थिर रहकर नई उड़ान भरेगी और भारतीय कला इस वर्ष कई महोत्सवों के माध्यम से पूरी दुनिया में अपने चटख रंग बिखेरेगी।

इस वर्ष भारतीय कला कारोबार की दुनिया में भी छलांग लगाने की भरपूर योजना बनाई गई है। यही कारण है कि 2026 में भारतीय कला सिर्फ सौंदर्य और अभिव्यक्ति का दरवाजा नहीं खोलेगी, बल्कि ठोस आर्थिक संभावनाओं के दरवाजे पर भी दस्तक देगी। कला अब हॉबी या एलीट स्पेस से निकलकर क्रिएटिव इकोनॉमी का अहम हिस्सा बन रही है। भारत का आर्ट मार्केट 2026 में मिड-लेवल कलेक्शन के कारण काफी फैलेगा। अनुमान है कि इस साल कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स और स्टार्टअप फाउंडर्स भारतीय कला को अर्थव्यवस्था की दुनिया में अपने पैरों पर खड़ा करने की कोशिश करेंगे। हाल के सालों में इंडिया आर्ट फेयर जैसे मंचों पर देखा गया है कि 50 हजार से लेकर 5 लाख रुपये तक की कलाकृतियां बड़ी आसानी से बिकती हैं और इनकी मांग लगातार बनी रहती है। अनुमान है कि इस साल इन कलाकृतियों की कीमतों में 10 से 15 फीसदी तक की वृद्धि देखी जाएगी। इसके संकेत अभी से मिलने शुरू हो गए हैं।

इस साल लोककला और हस्तशिल्प के मजबूत कारोबार की संभावनाएं भी तेजी से उभर रही हैं। अगर बिजनेस पोटेंशियल देखें, तो लोककला और क्राफ्ट 2026 में सबसे सुरक्षित व्यापार क्षेत्र के रूप में उभरने वाले हैं। इस तरह, यह साल, जहां भारत की कलाकृतियों को नए आयामों तक पहुंचाएगा, वहीं कमाई का दरवाजा भी खोलेगा। इ.रि.सें.

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