दुनिया अब दूरियों में नहीं, शहरों में सिमटने लगी है। चीन के शेनजेन का ‘विंडो ऑफ द वर्ल्ड’ जहां एक ही परिसर में विश्व के अजूबों के दीदार कराता है, वहीं दुबई 172 देशों के लोगों को साथ जीने-काम करने का अवसर देता है। पर्यटन और रोज़गार के बहाने यहां सचमुच वैश्विक गांव बसता दिखाई देता है।
दुनिया के हर देश में दूसरे देशों की छोटी- छोटी बस्तियों होती ही हैं। जैसे मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, कनाडा, इंग्लैंड वगैरह में लिटिल इंडिया और चाइना टाउन नामों की भारतीयों और चीनियों के लिए बाकायदा कॉलोनियां हैं। दिल्ली में भी तिब्बतियों और अफ़्रीकियों के लिए खास-ख़ास बस्तियां है, जहां जाकर तिब्बती और अफ़्रीकी रहन-सहन, खान-पान, पूजा-अर्चना और संस्कृति की बखूबी झलक से रू-ब-रू होने का नायाब मौका मिलता है। अब तो कई देशों के शहरों में ऐसे थीम पार्क भी हैं, जहां दूसरे देशों के आश्चर्यों और अजूबों को देख सकते हैं। ऐसा दसेक साल पहले तक नसीब नहीं होता था। सैलानियों को उसी देश में जाकर अनुभव करना पड़ता था।
दुनिया की सैर का अनुभव
शायद चीन की आईटी सिटी शेनजेन दुनिया का ऐसा पहला शहर है, जिसने अपनी किस्म का अकेला थीम पार्क ‘विंडो ऑफ द वर्ल्ड’ बनाकर आकर्षित किया। तब एक ही शहर में दुनिया की सैर करने के अनुभव पर सैलानियों को यकीन नहीं होता था। एक ही शहर में जाकर, दुनिया की सैर करवाने वाला चीनी शहर हांगकांग से करीब आध-पौना घंटे की सड़क सफर की दूरी पर है। नाम है- शेनजेन। शेनजेन से सबसे नजदीक हांगकांग ही है।
तमाम एयरलाइन्स की उड़ानें दिल्ली को रोज़ हांगकांग से जोड़ती हैं। सीधी उड़ान में वक्त लगता है करीब 6 घंटे। शेनजेन चीन की जानी-मानी आईटी सिटी है- बिल्कुल अपने बंगलुरू की तरह। शेनजेन मे जोरदार सड़कों, फ्लाई ओवरों, स्काई हाई बिल्डिंगों, रात के जगमग जलवे वगैरह के अलावा सबसे बड़ा आकर्षण यही थीम पार्क है। दुनिया भर के लैंडमार्क्स को सबसे पहले एक ही जगह पर करीब से देखने का मौका सबसे पहले यहीं मिला बताते हैं।
आज भी यह लोकप्रिय टूरिस्ट आकर्षण है। करीब 5 लाख वर्ग मीटर में फैला लम्बा-चौड़ा थीम पार्क दुनिया के 130 से ज्यादा आकर्षणों को आप के सामने ला खड़ा करता है। पार्क कुल आठ सीनिक एरियों में बंटा है- वर्ल्ड स्क्वेयर, एरिया ऑफ एशिया, एरिया ऑफ ओशनिया, एरिया ऑफ यूरोप, एरिया ऑफ अफ्रीका, एरिया ऑफ अमेरिका, स्कल्पचर पार्क और इंटरनेशनल स्ट्रीट।
कितने आश्चर्य, एक जगह
आप यहां क्या देखना चाहेंगे? बस नाम लो और लैंडमार्क हाजिर है। पार्क के बीचोंबीच खड़ा है 108 मीटर ऊंचा एफिल टॉवर। इसकी ऊपरी मंजिल तक चढ़कर, शेनजेन और हांगकांग तक का नजारा दिखाई देता है। और है मिनीएचर यानी छोटे रूप में नियाग्रा फाल्स। खास बात है कि पानी का बहाव का असली नियाग्रा फाल्स जैसा वास्तविक अनुभव दिलाता है। फाल्स पर हू-ब-हू असली जैसा इन्द्रधनुष भी बराबर उभरता है। यही नहीं, हवाएं ज्वालामुखी और पिघलता लावा भी सराहा जाता है।
वर्ल्ड लैंडमार्क
अपना ताजमहल भी है, मिस्र के पिरामिड ऑफ गिज्जा भी। और हैं- सिडनी, ऑस्ट्रेलिया का ओपेरा हाउस, ब्रिटेन का बकिंघम पैलेस, लंदन टॉवर ब्रिज व हाउस ऑफ पार्लियामेंट, कुवैत टॉवर, स्पेन का एलकेजर कैसल, इटली का कोलोसियम, वेनिस (इटली) का सेंट मार्क स्कवेयर, ग्रीस का एक्रोपोलिस ऑफ एथेन्स, अफ्रीका का केन्या नेशनल पार्क, अमेरिका का व्हाइट हाउस व मैनहेटन की गगनचुम्बी इमारतें व स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी, मेक्सिको की स्टेच्यू ऑफ वैरियर्स वगैरह कुल 66 वर्ल्ड लैंडमार्क को एक साथ देखने का अद्भुत मौका और कहां मिलेगा?
ओपन एयर थियेटर
‘विंडो ऑफ द वर्ल्ड’ प्रवेश पर ही है वर्ल्ड स्कवेयर। करीब 10,000 दर्शकों के लिए ओपन एयर थियेटर। शुरू में बाईं तरफ अपना राष्ट्रीय चिह्न सत्यमेव जयते है। हर शाम यहां ‘एपिक रोमांटिक’ नामक स्टेज शो आयोजित किया जाता है, जिसमें दुनिया की क्रीम सभ्यताओं की दिलकश झलक पेश की जाती है। मल्टी नेशनल गीत-संगीत और डांस-नाच से पार्क की रातें यादगार बन जाती हैं। यही नहीं, यूरोपीय स्ट्रीट में रेस्तरां, दुकानों और सुस्ताने की जगहें भी है। एशियन स्ट्रीट और इस्लामिक स्ट्रीट भी देखने लायक हैं। कुल मिला कर बड़ी मस्त है दुनिया की सैर।
एक शहर में बसे 172 देश
उधर वर्ल्ड सिटी होने के नाते दुबई का मिज़ाज तो और भी निराला है। दुबई में देश- देश के अजूबे तो नहीं, लेकिन देश-दुनिया के नागरिकों से घुलने-मिलने का सबसे शानदार अनुभव मिलता है। कैसे? दुनिया में कुल 195 देश हैं, और अकेले दुबई में 172 देशों से आ कर लोग काम कर रहे हैं। दुबई के एयरपोर्ट से होटल की टैक्सी का ड्राइवर अपने उत्तराखंड का मिल जाए, तो कोई अचरज की बात नहीं है। दुबई में 20 फीसदी आबादी पाकिस्तानियों की है, जबकि हिंदुस्तानी भी इतने ही हैं। दुबई दुनिया का अकेला शहर है, जहां दुनिया भर के देशों के लोग काम करने आते हैं। रूस के हालात ख़राब होने के बाद रूसी भी यहां काम- धंधे के लिए सेटल होने लगे हैं।
मिसाल के तौर पर, दुबई मॉल में अमेरिका के फ़ैशन ब्रांड ‘माइकल कोरस’ के शोरूम में 17 के स्टाफ में 11 देशों के लोगों से मिलने का मौका मिलता है। कंपनी अमेरिका की है, जबकि मैनेजर इंग्लैंड का, गार्ड मिस्र का, और बाक़ी स्टाफ में भारत, पाकिस्तान, चीन, भूटान, सीरिया, उज़्बेकिस्तान, कज़ाख़िस्तान, केन्या, फ़िलिपींस वगैरह देशों तक के लोग शामिल हैं।
मॉल ऑफ इमिरेट्स जैसे दुबई के किसी अन्य आलीशान मॉल में घूमें, स्टारबक्स में कॉफ़ी पीने की तलब जागे, वहां ऑर्डर और केश लेने वाली युवती नेपाल की होगी। कॉफी बनाने वाली म्यांमार की, और देने वाला श्रीलंका का। ज्यादातर ऐसे खाने-पीने के ऑउटलेट्स में 14 जनों का स्टाफ होता है, जिनमें भारत, नेपाल, भूटान, फ़िलिपींस समेत 7-8 देशों के लोग हैं। कर्मियों का कहना है कि विश्व सदस्य हो कर रहने में बड़ा मज़ा आता है। इतने सारे देशों की बातें, भाषा, खान-पान, रहन-सहन और त्योहार साथ-साथ मनाते हैं।
दुनिया के किसी अन्य शहर में इतने देशों के लोग नहीं मिलेंगे, सिंगापुर में भी नहीं। खास बात है कि सभी देशों के कामगार दुबई में दिल लगा कर काम कर रहे हैं। दुबई में कई देशों से आए काम करने वालों ने बताया कि ज़्यादातर देशों की करेंसी गिर रही है। इसलिए दुबई में काम करके लोग अपने देश के हिसाब से बहुत ज्यादा कमा लेते हैं।
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