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आदिवासी कलाओं का उत्सव और सांस्कृतिक संवाद

ट्राइब्स आर्ट फेस्ट 2-13 मार्च

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ट्राइब्स आर्ट फेस्ट 2026 एक राष्ट्रीय कला-संस्कृति उत्सव है, जो 2 से 13 मार्च तक नई दिल्ली के त्रावणकोर पैलेस में आयोजित होगा। यह आयोजन भारत सरकार के ट्राइबल अफेयर मंत्रालय और ‘नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट’ के सहयोग से आदिवासी कला और संस्कृति को वैश्विक मंच पर एक नई पहचान दिलाने का उद्देश्य रखता है।

ट्राइब्स आर्ट फेस्ट 2026 एक राष्ट्रीय स्तर का कला-संस्कृति उत्सव है, जो 2 से 13 मार्च तक नई दिल्ली के त्रावणकोर पैलेस में आयोजित होगा। यह आयोजन भारत सरकार के ट्राइबल अफेयर मंत्रालय की पहल पर 'नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट' के संयोजन से किया गया है। इसका उद्देश्य देश की आदिवासी कला और संस्कृति को राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर एक नई पहचान दिलाना है।

आदिवासी विरासत का प्रदर्शन

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भारत दुनिया के सबसे विविध समाजों में से एक है, जहां 700 से ज्यादा आदिवासी जातियां अपने विशिष्ट सांस्कृतिक, भाषायी और कलात्मक तरीकों को जीवित रखे हुए हैं। यह कला संवेदनाओं, लोककथाओं, पारंपरिक ज्ञान और सामाजिक जीवन की गहन अभिव्यक्ति है। ट्राइब्स आर्ट फेस्ट 2026 का मुख्य लक्ष्य इन कलाओं को संरक्षित करना तथा युवा पीढ़ी को समान रूप से आम जनता के सामने प्रस्तुत करना है, ताकि वे इसे केवल संग्रहालयी वस्तु के रूप में न देखें, बल्कि एक जीवित, सांस लेने वाली संस्कृति के रूप में अनुभव करें। इस फेस्ट का व्यापक कार्यक्रम तैयार किया गया है, जिसमें कलाकारों की कलाकृतियां, हस्तशिल्प, वस्त्र कला, मूर्तियां, संगीत, नृत्य और प्रदर्शन कलाओं का आयोजन किया जाएगा। आयोजन में परंपरागत कलाकृतियों के साथ-साथ आधुनिक और समकालीन आदिवासी कलाकारों के कार्य भी प्रदर्शित किए जाएंगे। इस पारंपरिक कौशल को आधुनिक दृष्टिकोण के साथ जोड़ा गया है, जिससे यह कला वर्तमान समय की मांगों और रुचियों के अनुरूप प्रतीत होती है।

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कला-संस्कृति पर राष्ट्रीय संवाद

इस फेस्ट में न केवल प्रदर्शनियां आयोजित की जाएंगी, बल्कि कलाकारों के साथ सक्रिय कार्यशालाओं और कला संवाद से जुड़े विशेषज्ञों की चर्चाएं भी की जाएंगी। यह सत्र कलाकारों को उनके अनुभव साझा करने का मंच देता है और दर्शकों को आदिवासी कला की तकनीक, इतिहास और अर्थ को समझने का अवसर प्रदान करता है। परंपरागत आदिवासी संगीत एवं नृत्य अपने आप में सांस्कृतिक संवाद हैं, जो पीढ़ी दर पीढ़ी अभिव्यक्त होते रहे हैं। इस फेस्ट में विभिन्न आदिवासी समुदायों के पारंपरिक गीत और नृत्य प्रदर्शित होंगे, जो दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ते हैं और उनके सांस्कृतिक मूल्यों को प्रदर्शित करते हैं।

कला उत्पादों की बिक्री

इस फेस्ट में आयोजित कार्यशालाओं में कलाकार अपने कौशल को प्रत्यक्ष रूप से दर्शकों के सामने प्रदर्शित करेंगे, जैसे प्राकृतिक रंगों का उपयोग, पारंपरिक डिजाइन प्रक्रिया, बनावट और प्रतिमाओं को उत्पन्न करना। यह अनुभव दर्शकों को कला के पीछे की तकनीकों के साथ-साथ कलाकारों के जीवन से भी अवगत कराता है। यह उत्सव एक प्रमुख व्यापारिक अवसर भी साबित होगा, क्योंकि इस फेस्ट में अनेक आदिवासी संगठन शामिल होंगे, जहां कलाकारों के लिए उनके कला उत्पादों की बिक्री का मंच भी प्रदान किया जाएगा। इसका मतलब है कि कलाकार अपनी कलाओं से संबंधित विभिन्न उत्पादों को इस मंच के माध्यम से सीधे खरीदारों को बेच सकेंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होती है और वे आत्मनिर्भर बनते हैं। इसके साथ ही, इससे कलाकारों की कला को आर्थिक आधार मिलता है और इस आधार से इन कलाओं को जीवित रखने में सहूलियत होती है।

कलाओं की जीवंतता

ट्राइब्स आर्ट फेस्ट 2026 केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह भारत की विविधता, सांस्कृतिक समृद्धि और पारंपरिक कलाओं की जीवंतता का प्रतीक है। यह आयोजन हमारे आदिवासी समुदायों की कला, संस्कृति और जीवनमूल्यों को संरक्षित रखने के साथ-साथ उनके सम्मान और विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से कलाप्रेमियों, शोधकर्ताओं, छात्रों और आम दर्शकों को एक ऐसा मंच मिलेगा, जहां वे भारतीय संस्कृति की गहराई और सुंदरता को समझ सकते हैं और उससे प्रेरणा ले सकते हैं। इ.रि.सें.

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