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फेस्टिवल की उमंग साड़ियों के संग

फेस्टिवल की उमंग साड़ियों के संग

स्वाति गुप्ता

नवरात्रि के साथ ही त्योहारों का सीजन शुरू हो चुका है। त्योहारों का मतलब उमंग। यह मौका होता है परंपरा के रंग में रंगने और सजने-संवरने का। जब हम परंपरागत तरीके से सजने-संवरने की बात करते हैं तो साड़ी की बात होना लाजिमी है। तो आइये जानते हैं कुछ ऐसी ही पारंपरिक साड़ियों के बारे में जिन्हें त्योहारों पर पहन सकते हैं। इन्हें ऑनलाइन मंगवाया जा सकता है या पहले से घर में रखी ऐसी साड़ियों को इस सीज़न में निकालकर पहना जा सकता है। कुछ ऐसी साड़ियां हैं, जिनकी हमेशा मांग रहती है।

संबलपुरी साड़ी यह साड़ी बुनाई प्रक्रिया से पहले टाई रंगाई द्वारा तैयार की जाती है। ओडिशा इन साड़ियों का केन्द्र है जहां के विभिन्न जिलों में इन साड़ियों को तैयार किया जाता है। इन साड़ियों में मुख्य रूप से डिजाइनों में चक्र, शंख, मोर और फूलों की तरह पारंपरिक रूपांकनों को शामिल किया जाता है।

पटोला साड़ी : पटोला साड़ी को गुजरात के पाटन में बनाया जाता है। ये काफी महंगी होती हैं। इस साड़ी पर रेशम की हाथों से बुनाई की जाती है जिसको बनाने में कारीगर को काफी ज्यादा समय लगता है। इसको तैयार करना बड़ा जटिल काम है। इसकी जटिलता के कारण ही इसकी लागत ज्यादा पड़ती है और रेट काफी हाई रहते हैं।

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