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एंजॉय करें बच्चों के साथ ट्रेवलिंग

एंजॉय करें बच्चों के साथ ट्रेवलिंग

शिखर चंद जैन

बच्चों के साथ सफर करना जहां एक ओर मजेदार अनुभव होता है वहीं इसमें कई प्रकार की समस्याएं भी होती हैं। लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो बच्चे और आप दोनों पर्यटन का भरपूर मजा ले सकेंगे और कई प्रकार की मुसीबतों से बच सकेंगे। वहीं बच्चे ऐतिहासिक व अन्य स्थलों का भ्रमण करेंगे तो उनकी जानकारी बढ़ेगी व प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त होगा। पढ़ाई के दौरान यह नॉलेज काम आयेगी। जानिये इस बारे काम आने वाली कुछ बातें।

हाथ में थोड़ा स्पेअर टाइम

अगर आप अक्सर फ्लाइट या ट्रेन मिस होने से बाल-बाल बचते रहे हैं तो अब इस आदत को बदल लें। बच्चों के साथ यात्रा करने के दौरान आपको अपने हाथ में कुछ अतिरिक्त समय रखना चाहिए। अकेला इंसान चाहे जैसे भागदौड़ कर सकता है या जरूरत पड़ने पर भीड़ भरी बस, ट्रेन में भी सफर कर सकता है, लेकिन बच्चों के साथ ऐसा करना संभव नहीं। वे न तो आपकी तरह भागदौड़ सकते हैं, न असुविधाजनक सफर कर सकते हैं। अगर आप एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशन पर जल्दी पहुंच जाते हैं तो कोई गेम खेलकर या गपशप करके समय बिता सकते हैं।

कुछ एक्टिविटी गेम्स रहें साथ

बच्चों को खाली बैठना बिल्कुल नहीं सुहाता। वे खाली रहेंगे तो मगजमारी करेंगे या फिर आपको परेशान करेंगे। बेहतर होगा कि उन्हें व्यस्त रखने और बोर होने से बचाने के लिए कुछ एक्टिविटी गेम्स साथ रख लें। ड्राइंग बुक, बबल ट्रबल, प्लेइंग कार्ड, प्लास्टिक टाउन, हाऊजी, बिजनेस आदि बहुत सारे गेम्स हैं जो उम्र के हिसाब से लिए जा सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे कि बच्चों को एक ही बार में सारे गेम्स न दिखाएं, इससे वे उलझ जाएंगे। जब वे एक गेम से ऊब जाएं तो दूसरा गेम पकड़ा दें।

चॉकलेट, टॉफी नहीं हैल्दी हो मंचिंग

सफर के दौरान अक्सर हल्की-फुल्की भूख लगने पर या फिर खाली बैठे कुछ न कुछ खाते रहने का मन करता है। ऐसे में पेरेंट्स बच्चों को टॉफी, चॉकलेट, बेकरी वाले केक, मीठी ब्रेड, मीठी सुपारी, चिप्स आदि दे देते हैं और खुद भी खा लेते हैं। ये चीजें काफी नुकसानदायक होती हैं। बेहतर होगा कि मंच करने के लिए रोस्टेड या प्लेन काजू, किशमिश, पिस्ता, अखरोट, पफ्ड चिवड़ा आदि दें। इसके अलावा सेब, अंगूर, केले, अमरूद जैसे फल भी साथ रख सकती हैं। सफर के दौरान खीरा, ककड़ी और टमाटर काटकर खाना भी खूब अच्छा लगता है और ये चीजें सेहत के लिए मुफीद भी हैं।

उनसे मदद लें तो बनेंगे जिम्मेदार

बच्चों के साथ सफर करते वक्त उन्हें छुईमुई जैसा बनाकर न रखें। छोटे-छोटे कामों में उन्हें इन्वॉल्व करें औऱ उनकी मदद लें। जैसे एक दूसरे को कोई चीज पकड़ाने में, पैकेट खोलकर खाने की चीज प्लेट में डालने में, छोटे-मोटे सामान जैसे पानी की बॉटल लेकर चलने में। इससे न सिर्फ वे व्यस्त रहेंगे बल्कि उनमें जिम्मेदारी का भाव आएगा और आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। ऐसा करने से वे अनावश्यक शैतानी भी नहीं करेंगे।

जेब में परिचय पत्र

सफर की भागदौड़ में या फिर पर्यटन स्थल पर अनजान जगह होने की वजह से बच्चा आपसे बिछुड़ सकता है। ऐसी स्थिति में वह घबरा जाएगा और फोन नम्बर आदि भूल भी सकता है। बेहतर होगा कि बच्चे की जेब में हमेशा आप अपने दो-तीन बिजनेस कार्ड रखें या फिर एक कागज पर मोबाइल नम्बर, घर के लैंडलाइन नंबर (नेटवर्क की समस्या में ये काम आते हैं। घर पर मौजूद कोई वयस्क घरेलू सदस्य आपको मैसेज आदि देकर ढ़ूंढ़ लेगा) और जिस होटल या धर्मशाला में आप ठहरे हैं उसका पता व फोन नंबर लिखकर रख दें।

दवाएं भी आती हैं वक्त पर काम

कटने छिलने, सर्दी-जुकाम, सिर दर्द और लूज मोशन आदि का इलाज करने वाली दवाएं, इलेक्ट्रॉल पाउडर, ग्लूकोज, एंटीसेप्टिक क्रीम और बैंडेज सरीखी जरूरी चीजें हरदम साथ रखें। बच्चों को हाथों हाथ ट्रीटमेंट मिलना जरूरी है. वरना अनजान जगह में आपको समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

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