जैव विविधता दिवस

जीवन के लिए साझे भविष्य का सपना

जीवन के लिए साझे भविष्य का सपना

मुकुल व्यास

जैव विविधता ने हमारी पृथ्वी को एक जीवंत ग्रह बनाया है। जिस हवा से हम सांस लेते हैं और जो खाना हम खाते हैं,वह सब जैव विविधता पर निर्भर हैं। जैव विविधता दरअसल पृथ्वी के जीवन की संपूर्ण तस्वीर है। पृथ्वी की मिट्टी में पाए जाने वाले सूक्ष्मतम बैक्टीरिया से लेकर समुद्र में पाई जाने वाली वेल मछली तक हर जीव पृथ्वी की जैव विविधता का हिस्सा है। लेकिन जैव विविधता का संबंध सिर्फ प्रजातियों से नहीं है। यह समस्त जीव रूपों और उनके पर्यावास के बीच संबंधों को भी अभिव्यक्त करती है। इसमें समुद्र के सूक्ष्मतम जीव प्लैंक्टन और विशालकाय व्हेल का रिश्ता भी शामिल है जो वायुमंडल में ऑक्सीजन उत्पन्न करने में मदद करते हैं। इसमें बीजों और गैंडों का रिश्ता शामिल है जो जंगल लगाने में मदद करते हैं। इसमें बैक्टीरिया और पौधों का रिश्ता शामिल है जो मिट्टी की रासायनिक संरचना को बदलते हैं। जैव विविधता में प्रत्येक प्रजाति में आनुवंशिक अंतरों के अलावा जंगलों,नदियों,तालाबों, नदियों,रेगिस्तानों और खेतों की विविधता भी शामिल है। जैविक विविधता वाले संसाधन ऐसे मजबूत खंभें हैं जिन पर हम अपनी सभ्यताएं निर्मित करते हैं। करीब 80 प्रतिशत मानव आहार की व्यवस्था पेड़-पौधे करते हैं। विकासशील देशों के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले 80 प्रतिशत से अधिक लोग अपनी बुनियादी स्वास्थ्य जरूरतों के लिए वनस्पति आधारित दवाओं पर निर्भर हैं। दुनिया के 3 अरब लोगों को 20 प्रतिशत पशु प्रोटीन मछलियों से मिलता है।

मनुष्य जैव विविधता समुदाय का अंग है और हमारी अपनी सांस्कृतिक विविधता को स्थानीय जैव विविधता का उत्पाद माना जाता है। संस्कृति का संबंध उस प्रकृति से है जहां से मानव समुदायों का उदय हुआ है। जब हम जैविक-सांस्कृतिक विविधता की बात करते हैं तो उसका अभिप्राय मानव संस्कृति और आसपास की पारिस्थितिकी से होता है। यह देखा गया है कि ठंडे और ध्रुवीय क्षेत्रों की तुलना में उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में जैव विविधता अधिक है क्योंकि वहां प्रजातियों की संख्या अधिक है और आनुवंशिक डेटा भी अधिक है। पारिस्थितिकी के आधार पर वहां ज्यादा जटिल अंतर-क्रियाएं होती हैं। दूसरी तरफ हम जैव विविधता में ठंडे प्रदेशों की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं कर सकते। ध्रुवीय समुद्रों से लेकर सबसे गहरी गुफाओं तक ठंडी और अंधेरे वाली जगहों पर भी प्रचुर जीव रूप मौजूद हैं। इनमें से प्रत्येक जीव रूप हमारे पर्यावरण के लिए कुछ न कुछ योगदान करता है। हमारी मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म जैव विविधता उन रासायनिक परिस्थितियों को उत्पन्न करती हैं जो स्वस्थ, संधारणीय और भरपूर फसल के लिए आवश्यक हैं।

जैव विविधता से मिलने वाली जीवनदायक सेवाओं को मानव टेक्नोलॉजी के स्तर पर दोहराया नहीं जा सकता और न ही आर्थिक स्तर पर उनका मूल्यांकन किया जा सकता है। फिर भी एक मोटे अनुमान के अनुसार जैव विविधता से मिलने वाली सेवाओं का मूल्य विश्व के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) से दुगना है। पृथ्वी की जैव विविधता हमारा सबसे बहुमूल्य और सर्वाधिक आवश्यक संसाधन है। यह पृथ्वी के जीवमंडल अथवा बायोस्फीयर की प्राथमिक स्रोत है। हवा,पानी और भोजन जैसी मनुष्य की हर जरूरत यह जीवमंडल पूरी करता है। ऐसे कई ग्रह हो सकते हैं जहां पृथ्वी से ज्यादा बहुमूल्य खनिज मौजूद हों,लेकिन हम ऐसे दूसरे ग्रह को नहीं जानते जहां मानव सभ्यताओं के लिए आवश्यक परिस्थितियां मौजूद हों। हमारी पृथ्वी जैव विविधता से संपन्न है,हालांकि अनेक प्रजातियों की खोज अभी बाकी है। लेकिन मनुष्य की गतिविधियों के कारण अनेक मौजूदा प्रजातियों के अस्तित्व को खतरा पैदा हो गया है।

पृथ्वी की शानदार जैव विविधता इस समय संकट में है। मनुष्य की अनियंत्रित गतिविधियों के अलावा अब जलवायु परिवर्तन ने भी जैव विविधता के खिलाफ एक नया मोर्चा खोल दिया है। जलवायु परिवर्तन की वजह से होने वाले पर्यावरणीय परिवर्तन से प्रजातियों के प्राकृतिक आवास अस्त-व्यस्त हो रहे हैं। इस बात के स्पष्ट संकेत हैं कि बढ़ता हुआ तापमान जैव विविधता को प्रभावित कर रहा है जबकि वर्षा के पैटर्न में परिवर्तन,विषम मौसमीय घटनाओं और समुद्रों के अम्लीकरण से उन प्रजातियों पर दबाव पड़ रहा है जो पहले से मनुष्य की गतिविधियों की वजह से संकट में हैं। आने वाले समय में जैव विविधता पर जलवायु परिवर्तन का खतरा बढ़ेगा,हालांकि फलती-फूलती जैव प्रणालियों में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने की समुचित क्षमता है। यदि पृथ्वी के गर्म होने का वर्तमान सिलसिला जारी रहा तो 2030 तक वैश्विक तापमान औद्योगिक क्रांति से पूर्व की अवधि की तुलना में 1.5 सेल्सियस से ज्यादा बढ़ सकता है। जैव विविधता पर जलवायु परिवर्तन के प्रमुख प्रभाव आग,तूफानों की तीव्रता और अकालों की अवधि में वृद्धि के रूप में सामने आ रहे हैं। आस्ट्रेलिया में 2019 के अंत में और 2020 के आरंभ में भीषण आग से 97000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले जंगल और आसपास के पर्यावास नष्ट हो गए थे। समझा जाता है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से यह संकट ज्यादा विकराल हुआ। जाहिर है कि जंगलों की आग ने जैव विविधता के लिए भी खतरा उत्पन्न किया। समझा जाता है कि आग की घटनाओं की वजह से इस क्षेत्र में उन प्रजातियों की संख्या 14 प्रतिशत घट गई होगी जो पहले से ही खतरे में हैं।

आग और जंगलों के विनाश से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में ब्राजील के अमेजॉन के घने जंगलों का उल्लेख किया जा सकता है। 2020 में वहां आग लगने की 2500 से अधिक घटनाएं हुईं। इनमें 41 प्रतिशत से अधिक घटनाएं जंगलों में हुईं। अमेजॉन के जंगल विश्व के ऑक्सीजन और कार्बन चक्र को नियमित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। ये जंगल दुनिया की करीब 6 प्रतिशत ऑक्सीजन का उत्पादन करते हैं। इन जंगलों को 'कार्बन सिंक' भी माना जाता है क्योंकि ये वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड की बहुत बड़ी मात्रा सोख लेते हैं। दुनिया में पेड़-पौधों और जानवरों की आधी से अधिक प्रजातियां ब्राजील के अमेजॉन जैसे वर्षा-वनों में रहती हैं। ये वर्षा-वन दुनिया के फेफड़े माने जाते हैं। दुनिया की करीब 20 प्रतिशत ऑक्सीजन इन वनों द्वारा उत्पन्न की जाती हैं। इन जंगलों के पेड़ वायु प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं।

विश्व में जैव-विविधता के बारे में वर्तमान पूर्वानुमान विचलित करने वाले हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक ताजा रिपोर्ट में अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष निकाला है कि अगले 80 वर्षों में हम दस लाख से अधिक प्रजातियों को खो सकते हैं। मतलब आठ में से एक प्रजाति। इनके अलावा कई जानवरों की प्रजातियां पहले से ही कम हो चुकी हैं। बाघों ने अपनी 97 प्रतिशत आबादी खो दी है। घुमंतू पक्षी अपनी 70 प्रतिशत आबादी खो चुके हैं। जैव विविधता को सबसे बड़ा खतरा पर्यावास छिनने से है जिसका संबंध धरती पर और समुद्र में खाद्य उत्पादन से है। जैव विविधता को अस्तित्व बनाये रखने के लिए जगह चाहिए। हर जानवर को घर चाहिए। वह घर जंगल में होता है। जब हम जंगलों को हटा कर वहां कारखाने लगाते हैं तो हम एक तरह से उस लैंडस्केप को हटा देते हैं जो हमारे अपने जीवन के अस्तित्व के लिए आवश्यक है। जब हम जैव विविधता को खो देते हैं तब हम जलवायु परिवर्तन से लड़ने,स्वस्थ और संधारणीय फसलें उगाने,स्वच्छ जल प्राप्त करने,महामारियों से लड़ने और अपने बच्चों के लिए अच्छा भविष्य बनाने की क्षमता भी खो देते हैं। जैव विविधता खोने से जानवरों से मनुष्यों में फैलने वाले रोगों का खतरा बढ़ता है। यदि हम अपनी जैव विविधता को बनाए रखते हैं तो हम कोरोना जैसे वायरसों से होने वाली महामारियों को रोकने की बेहतर स्थिति में होंगे। मनुष्यों को जैव विविधता की आवश्यकता है। चूंकि जैव विविधता में गिरावट मनुष्य की वजह से हो रही है,जैव विविधता भी हम से अपेक्षा रखती है कि हम अपना व्यवहार सुधारें। यह उचित ही है कि संयुक्त राष्ट्र ने इस वर्ष 22 मई को अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर 'समस्त जीवन के लिए एक साझा भविष्य के निर्माण' का नारा दिया है। पृथ्वी की जैव विविधता बचाने के लिए हमें इसी नारे को लेकर आगे बढ़ना होगा।

भारत का आठवां स्थान

भारत दुनिया का आठवां सर्वाधिक जैव विविध क्षेत्र है। विविधता सूचकांक पर भारत का स्कोर 0.46 बायोडी है। यहां पशु-पक्षियों की 102,718 प्रजातियां हैं। 2020 में देश के भौगोलिक क्षेत्र के 23.39 प्रतिशत हिस्सों में वनों और वृक्षों का आवरण था। भारत में विस्तृत जैव क्षेत्र हैं। इनमें ऊंचे पहाड़,रेगिस्तान,उष्णकटिबंधीय और शीतोष्ण वन,दलदली भूमि,मैदानी क्षेत्र,घास भूमि,नदियों के आसपास के क्षेत्र और द्वीपों के समूह शामिल हैं। भारत में जैव विविधता के चार हॉटस्पॉट हैं। ये हैं हिमालय,पश्चिमी घाट,हिंद-बर्मा क्षेत्र और निकोबार द्वीप सहित संडलैंड। दक्षिण-पूर्वी एशिया के एक खास जैव-भौगोलिक क्षेत्र को संडलैंड कहा जाता है। इन हॉट स्पॉट्स में अनेकों स्थानिक प्रजातियां हैं। भारत के कुल क्षेत्र के करीब 5 प्रतिशत क्षेत्र को औपचारिक रूप से संरक्षित क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

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