भारत रंग महोत्सव (भारंगम), राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा आयोजित एक अंतर्राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव है, जिसमें 277 नाटक, सात महाद्वीपों के 40 केंद्रों पर प्रदर्शित होंगे।
सत्ताईस जनवरी से शुरू हुआ ‘भारत रंग महोत्सव’ (भारंगम ) 22 फरवरी तक चलेगा। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, दिल्ली (एनएसडी) के इस अंतर्राष्ट्रीय आयोजन में कुल 277 नाटकों का मंचन होगा। इनमें 136 चयनित भारतीय और 12 विदेशी नाटक शामिल हैं। नाटकों का प्रदर्शन देश के 40 केंद्रों पर किया जाएगा। साथ ही सातों महाद्वीपों के कम से कम एक देश में भी ड्रामा शोज़ होंगे।
थियेटर का महाकुंभ
एनएसडी के निदेशक के अनुसार ‘थियेटर का ये महाकुंभ- जनता का, जनता द्वारा और जनता के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव है। यहां पर कई संस्कृतियों और विचारधाराओं का संगम देखने को मिलता है। ज्ञान का आदान-प्रदान होता है।’ उपाध्यक्ष के अनुसार, ‘भारंगम, विश्व का सबसे बड़ा नाट्य महोत्सव है, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है। यह हमारे लोकतंत्र का प्रतीक है। यही महोत्सव की बड़ी विशेषता है, जिस पर ज़ोर दिया जाना चाहिए।’
रेडियो, पॉडकास्ट और ओटीटी
एनएसडी के निदेशक ने महोत्सव के शुभारंभ पर रेडियो-पॉडकास्ट की घोषणा की। उन्होंने कहा, रेडियो, पॉडकास्ट और ओटीटी चैनल के लिए राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के पास नाटकों का विशाल ख़ज़ाना है, जिसका लाभ इन प्रसार माध्यमों से दुनिया भर के नाट्य प्रेमियों को मिल सकेगा।
जश्न-ए-बचपन और बाल संगम
इस बार के महोत्सव में जश्ने बचपन और बाल संगम की प्रस्तुतियां भी होंगी। बाल रंगमंच की गतिविधियां 2019 के बाद से थमी हुई थीं, लेकिन 25वें संस्करण से इनकी वापसी हो रही है। इनमें आदिवासियों की कला और शिल्प का ‘आदि रंग महोत्सव’ भी शामिल है। इस बार के संस्करण में कई देशी और विदेशी सांस्कृतिक और शैक्षणिक संस्थानों का सहयोग मिला है। इनमें विभिन्न अकादमियां भी शामिल हैं। संस्कृति मंत्रालय के अधीन सभी अकादमियों-विभागों में बेहतर समन्वयन है।
यहां उपलब्ध टिकट
इस रंग महोत्सव के टिकट ‘बुक माय शो’ से ही उपलब्ध हैं। यह एक बेहतर और सर्वसुलभ डिजिटल व्यवस्था है। टिकट दरों में मामूली वृद्धि की गई है, जो केवल मंच के सामने की पंक्तियों पर लागू होगी। इससे विद्यालय को कुछ अतिरिक्त आय होगी, जो वर्तमान टिकट दरों की तुलना में बहुत कम है।
चयन और भाषाई विविधता
इस बार भारंगम में हिस्सेदारी के लिए देश भर से 817 और विदेशों से 34 आवेदन प्राप्त हुए थे। दो राउंड की स्क्रीनिंग के बाद चयन समितियों के 90 सदस्यों ने 136 नाटकों का चयन किया। सभी के लिए एक सी प्रक्रिया अपनाई गई। चाहे वह भारत के किसी सुदूर अंचल से आया नाटक हो या फिर रूस, अमेरिका से। सभी में परफॉरमेंस या प्रस्तुति के स्तर को ही देखा गया। उसके बाद ही उन्हें चयनित किया गया।
थियेटर के विदेशी समूह
भारंगम में विदेशी नाट्य संस्थाओं और थियेटर एजुकेशन से जुड़े संस्थानों ने भी नाट्य विद्यालय के इस महोत्सव में अपने स्तर पर जुड़ने में ख़ासी रुचि दिखाई है। वे परफॉर्म करने के साथ ही खर्च भी वहन कर रहे हैं। पोलेंड से लेकर, मैड्रिट और मास्को तक परफॉरमेंस होंगे। हर महाद्वीप के कम से कम एक देश में नाट्य प्रस्तुति 25वें भारंगम का हिस्सा बनेंगी। इसमें इंडियन डायस्पोरा का महत्वपूर्ण योगदान है।
नाट्य विद्यालय के निदेशक के मुताबिक़ महोत्सव में भगवान बिरसा मुंडा, लोकमाता अहिल्या बाई, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसी ऐतिहासिक हस्तियों और रतन थियम, दया प्रकाश सिन्हा, बंसी कौल तथा आलोक चटर्जी जैसी थिएटर हस्तियों को याद किया जाएगा। इब्राहिम अलकाजी की जन्मशती पर उनके योगदान को लेकर एक विशेष सेमिनार आयोजित होगा। विविध संस्कृतियों के इस समागम में कई विशेष हस्तियां भी शामिल होंगी जो संवाद और संगीत कार्यक्रमों में भाग लेंगी।
श्रद्धांजलि और विशेष आयोजन
इस रजत जयंती आयोजन में वरिष्ठ नागरिकों, सेक्स वर्करों, ट्रांसजेंडर और विशेष बच्चों की भागीदारी भी हो रही है। इस बार 33 महिला निर्देशकों, 19 विश्वविद्यालयों और 14 स्थानीय समूह भी अपनी प्रस्तुतियां दे रहे हैं। कुल 277 प्रस्तुतियों में 228 भाषाओं और बोलियों का समावेश भारंगम में होगा। इसके साथ ही, 17 नई पुस्तकों का विमोचन भी किया जाएगा। इ.रि.सें.

