जादूगर सम्राट शंकर जादू को साधना और समाज सेवा बनाकर लुप्त होती कला को नई पहचान दे रहे हैं।
विश्व-विख्यात जादूगर सम्राट शंकर अब तक विश्व भर में 30,000 से अधिक मैजिक शो कर चुके हैं, जिनमें से लगभग 20,000 शो उन्होंने चैरिटी के लिए किए हैं। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड द्वारा विश्व जादू प्रतियोगिता में उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है। देश और विदेश में अपनी विशिष्ट कला के माध्यम से उन्होंने जादू को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता का माध्यम बनाया है।
जादूगर बनने का सपना
सम्राट शंकर का बचपन से ही सपना जादूगर बनने का था। बहुतों ने उन्हें इंजीनियर बनने की सलाह दी, किसी ने आईएएस बनने को कहा। पिता की फैक्ट्री होने के कारण वे चाहते थे कि शंकर बिजनेसमैन बनें। लेकिन जब 12 वर्ष की उम्र में उन्होंने जादूगर देव कुमार का शो देखा—उस समय लोग जादू के दीवाने थे—तभी उन्होंने तय कर लिया था कि वे कुछ ऐसा करेंगे जिससे देश-दुनिया उन्हें याद रखे। उनका मानना है कि डॉक्टर, इंजीनियर और बिजनेसमैन बहुत हैं, लेकिन हर व्यक्ति को अपनी एक अलग पहचान और उद्देश्य तय करना चाहिए, ताकि वह समाज और देश के लिए कुछ कर सके।
कला को लेकर चिंता
जादूगर सम्राट शंकर को इस बात का मलाल है कि 140 करोड़ की आबादी वाले देश में आज 140 जादूगर भी नहीं बचे हैं। उनका मानना है कि धीरे-धीरे यह कला लुप्त होती जा रही है। देश एवं विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित शंकर का कहना है कि इस कला को बचाने और आगे बढ़ाने के लिए सरकार को ठोस नीति बनानी चाहिए। उनके अनुसार जादू कोई दिखावा नहीं, बल्कि साधना है—और साधना का अर्थ निरंतर अभ्यास होता है। इसमें अनेक ट्रिक होती हैं, जिन्हें वर्षों की मेहनत से साधा जाता है।
रोचक अनुभव
लंदन में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बताया कि शो शाम 6 से 8 बजे तक था, लेकिन वे वहां 7 बजे पहुंचे। लोगों में नाराजगी देखकर उन्होंने सभी से कहा कि अपनी घड़ियां देखें। सभी की घड़ियों में समय 5:55 दिख रहा था। यह देखकर दर्शक हैरान भी हुए और खुश भी।
भ्रम और धोखे का अंतर
जादूगर सम्राट शंकर स्पष्ट करते हैं कि जो आपकी समझ में न आए, वही जादू है। हिप्नोटिज्म अंग्रेज़ी शब्द है, सम्मोहन उसका हिंदी रूप है और नजरबंदी भी उसी प्रकार की प्रक्रिया है। हाथ की सफाई एक कला है, जिसे उन्होंने कला के रूप में स्वीकार किया है। वे अगाह करते हैं कि कुछ लोग जादू के नाम पर सोना या नोट दोगुना करने का लालच देकर लोगों को ठगते हैं—असल नोट लेकर भाग जाते हैं और नकली थमा देते हैं। यह जादू नहीं, धोखा है।
अंधविश्वास के विरुद्ध
जादूगर सम्राट शंकर कहते हैं कि वे अपनी कला के माध्यम से अंधविश्वास को दूर करते हैं। वे चाहते तो धार्मिक वेश में लोगों को भ्रमित कर पैसा कमा सकते थे, लेकिन उनका उद्देश्य लोगों को जागरूक करना है। तथाकथित लोग दो-चार ट्रिक सीखकर जनता को गुमराह करते हैं, जबकि वे भ्रम को तोड़ने का काम करते हैं।
सामाजिक निहितार्थ
जादूगर सम्राट शंकर बताते हैं कि वे अपने जादू के माध्यम से समाज को महत्वपूर्ण संदेश देते हैं—जैसे एक पेड़ अवश्य लगाना चाहिए, कन्या भ्रूण हत्या एक महापाप है और सामाजिक बुराइयों से दूर रहना चाहिए।
उनका कहना है कि सरकार लोगों को जागरूक करने के लिए जिन अभियानों पर लाखों रुपये खर्च करती है, वही कार्य वे अपने शो के माध्यम से निःशुल्क करते हैं। इसे वे अपना कर्तव्य मानते हैं।
कला और समाज सेवा का समन्वय
शंकर का मानना है कि आर्ट केवल कला नहीं, बल्कि सामाजिक सेवा भी है। वे कला के माध्यम से समाज सेवा करते हैं। दिल्ली में उन्होंने ‘स्कूल ऑफ मैजिक’ नाम से एक प्राइवेट अकादमी स्थापित की है, जहां जादू सिखाया जाता है। उनका कहना है कि यदि सरकार सहयोग करे तो इस लुप्त होती कला को नई ऊर्जा मिल सकती है।
सम्मान की मांग
उन्होंने कहा कि आर्ट और सोशल वर्क के लिए पद्म पुरस्कार दिए जाते हैं, लेकिन वर्ष 1964 के बाद आज तक जादू की कला को यह सम्मान नहीं मिला। उनका मानना है कि यदि यह पुरस्कार दिया जाता है, तो वह किसी जादूगर का नहीं, बल्कि पूरी कला का सम्मान होगा।
योग और साधना
उनकी मान्यता है कि जादू एक उच्चकोटि की कला है, जिसमें निरंतर अभ्यास के साथ-साथ दर्शकों के मनोविज्ञान को समझना आवश्यक है। जादूगर को अपने शरीर और मन—दोनों को साधना पड़ता है। इसी कारण वे जादू के साथ-साथ योग साधना को भी अत्यंत महत्व देते हैं। उन्होंने स्वामी देवी दयाल जी महाराज और श्रीलाल जी से योग शिक्षा ग्रहण की, जिससे उनके जादुई कारनामों में और निखार आया। शंकर मानते हैं कि वे आज जहां भी हैं, वह सब स्वामी जी के आशीर्वाद का ही परिणाम है।
जादू की विरासत
शंकर का मानना है कि प्राचीन काल में भारत जादू के क्षेत्र में विश्व में शिरोमणि था, लेकिन कालांतर में इसमें गिरावट आई। यदि जादू को पूर्ण प्रोत्साहन मिले, तो आज भी भारत इस क्षेत्र में किसी से पीछे नहीं है। सम्मोहन, विज्ञान और हाथ की सफाई के मिश्रण को जादू मानने वाले शंकर का कहना है कि कोई भी कला समर्पण भाव के बिना उन्नति नहीं कर सकती। उनका विचार है कि आज जिस प्रकार मनोरोग और मानसिक विकृतियां दिन-प्रतिदिन बढ़ रही हैं, उनका निवारण योग साधना के माध्यम से किया जा सकता है।
युवाओं के लिए संदेश
शंकर युवाओं से अपील करते हैं कि वे अपने जीवन के उद्देश्य के अनुसार पढ़ाई करें। बुराइयों और नशे से दूर रहें। जो लोग आपको गलत दिशा में ले जाने की कोशिश करें, उनसे दूरी बनाएं। योग, प्राणायाम और कंसन्ट्रेशन मेडिटेशन को जीवन का हिस्सा बनाएं। मन को एकाग्र करके पढ़ाई करें—यही सफलता का मार्ग है।

