Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
search-icon-img
Advertisement

इतिहास, आस्था, कला और जीवन का संगम

शिग्मो उत्सव

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
Advertisement

गोवा का शिग्मो उत्सव वसंत के आगमन और फसल कटाई के बाद मनाया जाने वाला रंगीन लोक पर्व है, जो नृत्य, संगीत, शोभा यात्राओं और ग्रामीण-शहरी सांस्कृतिक परंपराओं का जीवंत उत्सव है।

भारत के पश्चिमी तट पर स्थित गोवा अपनी समुद्री सुंदरता के कारण पर्यटकों के बीच जितना लोकप्रिय है, उतना ही अपने सम‍ृद्ध लोक संस्कृति के कारण भी यह प्रसिद्ध है। गोवा लोक संस्कृति का सबसे समृद्ध घर है और इस समृद्ध लोक संस्कृति का सबसे जीवंत और रंगीन प्रतीक है शिग्मो फेस्टिवल या शिग्मो उत्सव। शिग्मो उत्सव केवल एक अनुष्ठानिक पर्व भर नहीं है बल्कि गोवा के ग्रामीण जीवन, लोक परंपराओं, लोक नृत्यों और ऐतिहासिक स्मृतियों का संवेदनशील और सामूहिक उत्सव है। वास्तव में शिग्मो गोवा का पारंपरिक वसंत उत्सव है, जो होली से शुरू होकर चैत्र माह में एक पखवाड़े तक मनाया जाता है। इसलिए शिग्मो उत्सव को गोवा की लोक आत्मा का उत्सव कहते हैं। इसमें यहां के किसान, मजदूर और ग्रामीण समुदायों की जीवनशैली, उनकी आस्था और उनकी ऐतिहासिक चेतना पूरी भव्यता के साथ अभिव्यक्त होती है। शिग्मो का अर्थ है शिशिरोत्सव अर्थात‍‍् शीत ऋतु के अंत और वसंत के आगमन का उत्सव। यह पर्व प्राचीनकाल से गोवा के प्रसिद्ध समुदाय द्वारा मनाया जाता रहा है। फसल कटाई के बाद जब किसान अपनी मेहनत के फल से संतुष्ट होते हैं तो प्रकृति और देवताओं के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए शिग्मो उत्सव मनाते हैं।

इतिहासकारों के मुताबिक शिग्मो की परंपरा कम से कम 1000 साल पुरानी है। पुर्तगाली शासन के दौरान भी गोवा के स्थानीय लोग ने इस उत्सव को अपनी सांस्कृतिक पहचान के रूप में बनाये रखा। वास्तव में यह उत्सव गोवा के हिंदू समुदाय के लिए विशेष मायने रखता है। लेकिन इसकी लोक, रंगत और सांस्कृतिक आकर्षण के कारण आज इसमें सभी समुदायों की भागीदारी होती है। शिग्मो उत्सव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके पारंपरिक लोकनृत्य और संगीत हैं। इन नृत्यों मंे गोवा के ग्रामीण जीवन, युद्ध कथाओं, पौराणिक प्रसंगों और सामाजिक घटनाओं को प्रस्तुत किया जाता है। शिग्मो उत्सव में शामिल प्रमुख लोक नृत्यों मंे घोड़े मोदनी नृत्य सबसे प्रमुख है। वास्तव में यह योद्धाओं का नृत्य है। माना जाता है कि प्राचीनकाल में विजयी योद्धा घोड़ों पर सवार होकर नृत्य किया करते थे। लेकिन आज लोक कलाकार घोड़े की आकृति पहनकर और हाथ में तलवार लेकर नृत्य करते हैं। यह नृत्य वास्तव में गोवा के वीर इतिहास का प्रतीक है। इस उत्सव का दूसरा प्रमुख नृत्य हैं—रोमातामेल। यह सामूहिक नृत्य है, इसमें कलाकार ढोल, ताशा और झांझे की धुन पर नाचते हैं। तीसरा प्रमुख नृत्य जो इस उत्सव में खूब देखने को मिलता है उसे फुगड़ी और जागर नृत्य कहते हैं। यह नृत्य गोवा के ग्रामीण और आदिवासी जीवन को दर्शाता है। इन प्रमुख नृत्यों के माध्यम से गोवा में लोग शिग्मोत्सव में सदियों से चली आ रही अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करते हैं।

Advertisement

शिग्मो उत्सव के दौरान गोवा के प्रमुख शहरों जैसे पणजी, मडगांव, वास्को, पोंडा और मापुसा में भव्य शोभा यात्राएं भी निकाली जाती हैं। इन शोभा यात्राओं मंे रंग-बिरंगी झांकियां होती हैं, जो पौराणिक कथाओं, ऐतिहासिक घटनाओं और सामाजिक विषयों को दर्शाती हैं। इन झांकियों में रामायण और महाभारत के दृश्य, गोवा के लोक देवताओं की कथाएं तथा पर्यावरण संरक्षण व सामाजिक जागरूकता के संदेश दिए जाते हैं। यह परंपरा आधुनिक, सामाजिक चेतना का अनूठा मिश्रण प्रस्तुत करती है। ग्रामीण और शहरी शिग्मो वैसे एक-दूसरे से थोड़े भिन्न होते हैं, लेकिन ये दो रूप भले अलग हों, लेकिन उनकी आत्माएं एक होती हैं। इन दो अलग-अलग यानी शहरी और ग्रामीण शिग्मो को क्रमशः धाकटो शिग्मो यानी छोटा शिग्मो और व्हाडलो शिग्मो यानी बड़ा शिग्मो कहा जाता है। छोटा शिग्मो ग्रामीण क्षेत्रों में मनाया जाता है, जब कहीं ज्यादा पारंपरिक होता है और बड़ा शिग्मो शहरी क्षेत्रों में आयोजित होता है और इसमें बड़े पैमाने पर सांस्कृतिक झांकियां और शोभा यात्राएं निकाली जाती हैं। ग्रामीण शिग्मो में ज्यादा पारंपरिक और धार्मिक तत्व शामिल होते हैं, जबकि शहरी शिग्मो में पर्यटन और बहु-सांस्कृतियों का प्रदर्शन अधिक होता है, क्योंकि शहरी शिग्मो में बड़े पैमाने पर यहां आने वाले पर्यटक भी हिस्सा लेते हैं। शिग्मो उत्सव यहां के लोगों को उनकी जड़ों से जोड़ता है और उन्हें अपनी परंपरा पर गर्व करने का अवसर देता है।

Advertisement

वास्तव में यह उत्सव गोवा की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रमाण है। यह एक ऐसा उत्सव है, जिसमें इतिहास, आस्था, कला और जीवन का आनंद एक साथ प्रवाहित होता है। इ.रि.सें.

Advertisement
×