Yeti Drone: हिमालय की ऊंचाइयों पर क्या करेगा 'येति' ड्रोन? सरकार ने विकास के लिए दिए 151 करोड़ रुपये
4,000 से 6,000 मीटर तक की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेना तक हथियार, राशन और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए विकसित होगा हेवी-लिफ्ट ऑटोनॉमस ड्रोन
Yeti Drone: हिमालय की दुर्गम चौकियों तक गोला-बारूद, राशन और अन्य जरूरी सामान पहुंचाना भारतीय सेना के लिए हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। इसी चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने ड्रोन निर्माता ideaForge Technology Ltd. को 151 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मंजूर की है। इस राशि से कंपनी 'Yeti' नाम का स्वदेशी हेवी-लिफ्ट ऑटोनॉमस ड्रोन विकसित करेगी, जिसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सैन्य रसद (मिलिट्री लॉजिस्टिक्स) को मजबूत बनाने के उद्देश्य से तैयार किया जाएगा।
यह वित्तीय सहायता भारत सरकार की रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (RDI) योजना के तहत दी गई है। एक लाख करोड़ रुपये की इस योजना का उद्देश्य रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, अंतरिक्ष और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में निजी कंपनियों के नेतृत्व में स्वदेशी तकनीक के विकास को बढ़ावा देना है। ideaForge इस योजना के तहत वित्तीय सहायता पाने वाली शुरुआती कंपनियों में शामिल है। यह इस योजना के तहत औपचारिक रूप से स्वीकृत शुरुआती वित्तपोषणों में से एक है।
क्या है 'Yeti' ड्रोन ?
'Yeti' एक हेवी-लिफ्ट ऑटोनॉमस एरियल प्लेटफॉर्म है, जिसे दुनिया के सबसे कठिन भौगोलिक और मौसम संबंधी हालात में काम करने के लिए डिजाइन किया जा रहा है। इसे विशेष रूप से हिमालय के ऊंचाई वाले इलाकों, रेगिस्तानी क्षेत्रों और समुद्री क्षेत्रों में विश्वसनीय संचालन के लिए विकसित किया जाएगा।
यह एक स्वायत्त (Autonomous) ड्रोन होगा, जो पूर्व निर्धारित मिशन के अनुसार सीमित मानवीय हस्तक्षेप के साथ उड़ान भरने में सक्षम होगा।
सरकार को इसकी जरूरत क्यों महसूस हुई ?
भारत की सीमाएं विविध भौगोलिक परिस्थितियों से होकर गुजरती हैं। उत्तर में 4,000 से 6,000 मीटर तक की ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्र, पश्चिम में रेगिस्तान, पूर्वोत्तर के जंगल और दलदली इलाके तथा लंबी समुद्री सीमा सेना के लिए रसद पहुंचाने को कठिन बनाते हैं।
ऐसे क्षेत्रों में खराब मौसम और दुर्गम भूभाग के कारण कई बार गोला-बारूद, खाद्य सामग्री, दवाइयों और अन्य आवश्यक उपकरणों की आपूर्ति प्रभावित होती है। Yeti ड्रोन का उद्देश्य ऐसी परिस्थितियों में तेज और भरोसेमंद हवाई रसद उपलब्ध कराना है।
Yeti ड्रोन की प्रमुख विशेषताएं
- 200 किलोग्राम तक पेलोड क्षमता: एक बार में 200 किलोग्राम तक सामान ले जाने में सक्षम होगा।
- 200 किलोमीटर तक रेंज: एक उड़ान में लगभग 200 किलोमीटर तक संचालन कर सकेगा।
- छोटे लॉन्च पैड से उड़ान: छोटे और अर्ध-तैयार (Semi-prepared) लॉन्च पैड से भी उड़ान भर सकेगा।
- दिन और रात दोनों समय संचालन: दिन और रात, दोनों समय मिशन पूरा करने के अनुरूप विकसित किया जाएगा।
किन कार्यों में होगा इस्तेमाल?
Yeti का प्राथमिक उपयोग भारतीय सेना के लिए होगा। इसके माध्यम से अग्रिम चौकियों तक गोला-बारूद, हथियार, राशन, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचाई जा सकेगी।
इसके अलावा इसका उपयोग निम्न क्षेत्रों में भी किया जा सकता है—
- आपदा राहत और बचाव अभियान
- औद्योगिक लॉजिस्टिक्स
- आधारभूत ढांचा निर्माण
- ऑफशोर (समुद्री) लॉजिस्टिक्स
- एक्सप्रेस एरियल डिलीवरी
- आपातकालीन राहत मिशन
आत्मनिर्भर भारत को कैसे मिलेगा फायदा?
यह परियोजना रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सफल होने पर यह ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सैन्य रसद क्षमता बढ़ाने के साथ भारत की ड्रोन तकनीक को भी मजबूती दे सकती है। यह पहल सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' और 'विकसित भारत' के व्यापक लक्ष्यों के अनुरूप है।
कंपनी ने क्या कहा ?
ideaForge Technology Ltd. के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और सह-संस्थापक अंकित मेहता ने कहा कि 'Yeti' भारत की स्वदेशी ड्रोन तकनीक में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकता है। भारतीय सेना और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को अक्सर ऐसे इलाकों तक पहुंचना पड़ता है, जहां सड़कें समाप्त हो जाती हैं और मौसम बड़ी चुनौती बन जाता है। इस परियोजना का उद्देश्य ऐसे कठिन क्षेत्रों के लिए विश्वसनीय स्वायत्त समाधान विकसित करना है।
कंपनी अब Yeti ड्रोन के डिजाइन, विकास और परीक्षण पर काम करेगी। परियोजना सफल होने के बाद भविष्य में इसका उपयोग भारतीय सेना के उच्च हिमालयी क्षेत्रों सहित अन्य दुर्गम इलाकों में रसद पहुंचाने के लिए किया जा सकेगा।

