रेवाड़ी की दिव्या मित्तल ने क्यों चुनी IAS के बाद सियासत की राह, यूपी में बिना पार्टी बनाएंगी मंच ?
13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद इस्तीफा; मिर्जापुर और देवरिया की डीएम रह चुकीं मित्तल ने स्कूल, सड़क, किसान, बेरोजगारी और पेपर लीक को प्रमुख मुद्दों में गिनाया
Divya Mittal IAS to Politics : हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में उतरने का ऐलान किया है। खास बात यह है कि उन्होंने फिलहाल किसी राजनीतिक दल में शामिल होने के बजाय लोगों के साथ मिलकर अपना राजनीतिक मंच बनाने की बात कही है। ऐसे में सवाल है कि दिव्या मित्तल कौन हैं, उन्होंने आईएएस सेवा क्यों छोड़ी और राजनीति में उनका मॉडल क्या होगा?
कौन हैं दिव्या मित्तल ?
दिव्या मित्तल उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की आईएएस अधिकारी रही हैं। करीब 13 साल की प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वह मिर्जापुर और देवरिया की जिलाधिकारी भी रह चुकी हैं।
मित्तल ने 30 अगस्त को आईएएस से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। उनका इस्तीफा सितंबर में स्वीकार किया गया और 15 सितंबर से प्रभावी हो गया।
राजनीति में आने का ऐलान कैसे किया ?
मंगलवार को जारी वीडियो संदेश में मित्तल ने कहा कि वह उत्तर प्रदेश में ही रहेंगी, डरेंगी नहीं और सवाल पूछती रहेंगी। उन्होंने कहा कि वह उन लोगों की आवाज बनना चाहती हैं, जिनकी समस्याएं अक्सर सामने नहीं आ पातीं।
उन्होंने लोगों से उनके साथ जुड़ने और समर्थन देने की अपील की। इसके लिए उन्होंने व्हाट्सऐप संपर्क भी साझा किया है।
किसी पार्टी में शामिल क्यों नहीं होंगी ?
मित्तल ने फिलहाल किसी राजनीतिक दल में शामिल होने के बजाय लोगों के साथ मिलकर अपना मंच तैयार करने की बात कही है। उनका कहना है कि वह जनता के मुद्दों को सीधे उठाना चाहती हैं।
उन्होंने राजनीति में पैसे, जाति और बाहुबल की भूमिका पर भी सवाल उठाए और जनता के समर्थन के आधार पर आगे बढ़ने की बात कही।
किन मुद्दों को उठाएंगी?
मित्तल ने स्कूल, सड़क, किसानों की समस्याओं, बेरोजगारी और परीक्षा प्रश्नपत्र लीक जैसे मुद्दों का उल्लेख किया है। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था में काम करने के अपने अनुभव का हवाला देते हुए आम लोगों की समस्याओं को उठाने की बात कही है।
उनका जोर उन मुद्दों पर है, जिनका सीधा असर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। हालांकि, उन्होंने अभी अपने राजनीतिक मंच की विस्तृत संगठनात्मक रूपरेखा सार्वजनिक नहीं की है।
प्रशासन से राजनीति तक कितना अलग होगा सफर?
आईएएस अधिकारी के तौर पर मित्तल प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा थीं। जिलाधिकारी के रूप में उनके पास सरकारी तंत्र के माध्यम से फैसलों को लागू कराने की जिम्मेदारी थी। राजनीति में भूमिका अलग होगी। यहां जनता के बीच लगातार संपर्क, संगठन खड़ा करना और लोगों को साथ जोड़ना अहम होगा।
अब उनके सामने मुख्य सवाल यह है कि प्रशासनिक सेवा के दौरान बनी सार्वजनिक पहचान को वह किस तरह एक स्वतंत्र राजनीतिक मंच में बदलती हैं।
पहले भी चर्चा में रही हैं मित्तल
मिर्जापुर की जिलाधिकारी रहते हुए मित्तल अपने प्रशासनिक कामकाज को लेकर चर्चा में रही थीं। उनके कार्यकाल के दौरान दूरदराज के गांवों तक पेयजल पहुंचाने समेत कई स्थानीय पहल सामने आईं।
हालांकि, उनके कामकाज को लेकर राजनीतिक स्तर पर सवाल भी उठे। मित्तल ने अपने ऊपर लगाए गए राजनीतिक संपर्कों और प्रशासनिक दायरे से बाहर जाने के आरोपों को खारिज किया था।
अब आईएएस सेवा से अलग होने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में आने का फैसला किया है। फिलहाल उन्होंने किसी राजनीतिक दल में शामिल होने के बजाय लोगों के साथ मिलकर अपना मंच बनाने की बात कही है।

