कौन हैं राजजीत सिंह? पंजाब के पुलिस-ड्रग्स गठजोड़ मामले में कैसे फंसे पूर्व AIG, जानिए पूरी कहानी
2019 में सेवा से बर्खास्त हुए थे राजजीत सिंह; इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह से जुड़े ड्रग्स और वसूली मामले में नाम आया, 2023 में दो एफआईआर के बाद हुए फरार
पंजाब पुलिस के बर्खास्त पूर्व एआईजी (असिस्टेंट इंस्पेक्टर जनरल) राजजीत सिंह हुंदल एक बार फिर चर्चा में हैं। करीब तीन साल से फरार चल रहे राजजीत सिंह ने अब पटियाला पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है। पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने द ट्रिब्यून से उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि की है।
राजजीत सिंह का मामला पंजाब में ड्रग्स तस्करी और पुलिस अधिकारियों की कथित मिलीभगत से जुड़ी उन जांचों में से एक है, जिसने लंबे समय तक राज्य की राजनीति और पुलिस व्यवस्था में सवाल खड़े किए। उनका नाम बर्खास्त इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह से जुड़े मामले की जांच के दौरान सामने आया था।
इंदरजीत सिंह से क्या था कनेक्शन?
राजजीत सिंह जब तरनतारन और बाद में मोगा के एसएसपी रहे, उस दौरान इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह उनके अधीन काम कर रहे थे। इंदरजीत सिंह को 2017 में पुलिस सेवा से बर्खास्त किया गया था। उस पर पाकिस्तान से ड्रग्स की तस्करी, बरामद नशीले पदार्थों में हेराफेरी और निर्दोष लोगों को झूठे ड्रग मामलों में फंसाकर कथित तौर पर वसूली करने के आरोप लगे थे।
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में ड्रग्स की समस्या को लेकर दायर जनहित याचिका के बाद दिसंबर 2017 में तत्कालीन डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) बनाया गया। इस SIT को इंदरजीत सिंह के खिलाफ आरोपों के साथ-साथ राजजीत सिंह की कथित भूमिका की जांच भी करनी थी।
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STF की जांच में राजजीत सिंह का नाम
पंजाब पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने इंदरजीत सिंह के खिलाफ ड्रग्स तस्करी और बरामदगी में हेराफेरी से संबंधित मामला दर्ज किया था। बाद की जांच में राजजीत सिंह को भी इस मामले में सह-आरोपित बनाया गया।
राजजीत सिंह ने जांच की निष्पक्षता को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने ऐसी जांच की मांग की थी जिसमें तत्कालीन STF प्रमुख एडीजीपी हरप्रीत सिंह सिद्धू शामिल न हों।
जांच के दौरान कथित तौर पर इस पहलू की भी पड़ताल की गई कि ड्रग्स से हासिल धन को भारत और विदेशों में व्यक्तियों तथा कंपनियों के माध्यम से निवेश किया गया या नहीं। इस पहलू ने मामले को कथित मादक पदार्थ तस्करी के साथ-साथ वित्तीय लेन-देन और संपत्ति की जांच से भी जोड़ दिया।
SIT रिपोर्ट में क्या सामने आया?
SIT ने फरवरी से मई 2018 के बीच तीन रिपोर्ट दाखिल की थीं। ये रिपोर्ट करीब पांच साल तक अदालत में सीलबंद रहीं और अप्रैल 2023 में सार्वजनिक हुईं।
रिपोर्टों में आरोप लगाया गया कि राजजीत सिंह ने इंदरजीत सिंह के खिलाफ मामले लंबित होने के बावजूद उसके तबादले और पदोन्नति की सिफारिश की। रिपोर्ट में इंदरजीत सिंह को कथित तौर पर दोहरी पदोन्नति दिलाने की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया गया।
SIT ने राजजीत सिंह और उनके परिवार की संपत्तियों में 2013 के बाद हुई कथित वृद्धि की भी जांच की सिफारिश की थी। रिपोर्ट में रिश्तेदारों से मिले कथित धन से संपत्ति खरीदने के पहलू की भी जांच की बात कही गई थी।
2023 में सेवा से बर्खास्तगी
SIT की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद पंजाब सरकार ने 17 अप्रैल 2023 को राजजीत सिंह को पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया। इसके बाद उनके खिलाफ दो अलग-अलग मामले दर्ज हुए।
पहला मामला STF ने 19 अप्रैल 2023 को दर्ज किया। इसमें आपराधिक साजिश, रिकॉर्ड में हेराफेरी और वसूली से संबंधित भारतीय दंड संहिता की धाराओं के साथ NDPS Act की धाराएं लगाई गईं। इस मामले में उन्हें इंदरजीत सिंह से जुड़े पुराने मामले में सह-आरोपित बनाया गया।
दूसरा मामला विजिलेंस ब्यूरो ने 20 अप्रैल 2023 को दर्ज किया। इसमें आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत मामला दर्ज किया गया। FIR में मोहाली की एक संपत्ति की खरीद के लिए कथित नकद भुगतान और ऋण व रिश्तेदारों से मिले धन के स्रोत की जांच का उल्लेख था।
कैसे फरार हुए राजजीत सिंह?
राजजीत सिंह ने गिरफ्तारी से राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। रिपोर्ट के अनुसार, SIT की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद वह भूमिगत हो गए।
अक्टूबर 2023 में वह अदालत के निर्देश पर STF के सामने जांच में शामिल होने पहुंचे। इसी दौरान भ्रष्टाचार के मामले में हाईकोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर दी। आरोप है कि वह STF कार्यालय से निकल गए और विजिलेंस ब्यूरो उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सका।
इसके बाद पुलिस और जांच एजेंसियों ने उनकी तलाश में कई जगह छापेमारी की, लेकिन वह लंबे समय तक गिरफ्तारी से बचते रहे।
सुप्रीम कोर्ट में किया सरेंडर का प्रस्ताव
सितंबर 2026 में राजजीत सिंह के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार हैं। अदालत ने उन्हें संबंधित पुलिस के समक्ष सरेंडर करने का निर्देश दिया। इसके बाद उन्होंने पटियाला पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
ड्रग्स जांच के व्यापक मामले से कैसे जुड़ा है नाम?
राजजीत सिंह का मामला पंजाब में ड्रग्स तस्करी और कथित पुलिस-ड्रग्स नेटवर्क की व्यापक जांच से भी जुड़ा रहा है। इस जांच में पूर्व प्रवर्तन निदेशालय (ED) अधिकारी निरंजन सिंह की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही थी।
ड्रग्स से जुड़े मामलों की इसी व्यापक जांच में बर्खास्त DSP जगदीश सिंह ‘भोला’ का मामला भी सामने आया था। भोला अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी मामले में आरोपी रहा और उसका मामला पंजाब में ड्रग्स नेटवर्क पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का बड़ा कारण बना।
राजजीत सिंह का मामला इसी व्यापक जांच के उस हिस्से से जुड़ा है जिसमें पुलिस अधिकारियों की कथित भूमिका, ड्रग्स की बरामदगी में हेराफेरी, वसूली और संपत्तियों के स्रोत की जांच की गई।
अब आगे क्या होगा?
राजजीत सिंह की गिरफ्तारी के बाद STF और विजिलेंस ब्यूरो से जुड़े मामलों में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी। जांच एजेंसियां उनसे कथित ड्रग्स नेटवर्क, संपत्तियों और इंदरजीत सिंह से जुड़े मामलों के संबंध में पूछताछ कर सकती हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि राजजीत सिंह के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया से होगा।

