खेतों में सिकुड़ रहा गेहूं का दाना, क्या इस तपती गर्मी के कारण आपकी थाली का आटा भी होने वाला है महंगा ?
पारा 30 डिग्री पार जाने से गेहूं की दूधिया अवस्था प्रभावित हो रही है, जिससे दाना पूरी तरह भरने से पहले सूखने और पैदावार में भारी गिरावट आने की आशंका
Wheat Heatwave : उत्तर भारत के 'अन्न भंडार' कहे जाने वाले पंजाब और हरियाणा में अचानक बढ़े तापमान ने गेहूं की सुनहरी फसल पर बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। फरवरी के अंतिम सप्ताह में ही पारा 32 डिग्री के पार जाने से दाना बनने की प्रक्रिया में बाधा आने की आशंका है।
अल-नीनो (El Nino) के प्रभाव से उपजे इस मौसम संकट ने न सिर्फ किसानों की नींद उड़ाई है, बल्कि कृषि विभाग को भी सतर्क कर दिया है। अगर मार्च में भी 'हीटवेव' (Heatwave) का यह सितम जारी रहा, तो बंपर बुवाई के बावजूद न केवल पैदावार घटेगी, बल्कि खुले बाजार में आटे के दाम भी आसमान छू सकते हैं।
एक ओर जहां भारत सरकार ने इस साल 119 मिलियन टन (Million Tonnes) गेहूं की रिकॉर्ड पैदावार का लक्ष्य रखा है, वहीं दूसरी ओर कुदरत की इस मार ने पूरे गणित को उलझा दिया है।
विशेषज्ञों को डर है कि कहीं साल 2022 की कहानी न दोहराई जाए, जब मार्च की भीषण गर्मी ने उत्पादन को लक्ष्य से 5 प्रतिशत तक गिरा दिया था। मौसम विभाग ने आज ताजा चेतावनी जारी की है कि मार्च के पहले सप्ताह में ही पारा 35 डिग्री सेल्सियस के स्तर को छू सकता है, जो फसल के लिए बेहद नाजुक समय है।
गर्मी का कहर : क्या है 'टर्मिनल हीट स्ट्रेस' ?
गेहूं की फसल वर्तमान में अपनी सबसे महत्वपूर्ण 'मिल्किंग स्टेज' (Milking Stage) यानी दूधिया अवस्था में है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस प्रक्रिया के लिए दिन का आदर्श तापमान 25 डिग्री सेल्सियस तक होना चाहिए। लेकिन आंकड़ों के अनुसार, फरवरी के आखिरी दिनों में ही सिरसा, हिसार और बठिंडा जैसे जिलों में पारा 30 से 32 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है।
जब तापमान 30 डिग्री से ऊपर जाता है, तो पौधों में 'टर्मिनल हीट स्ट्रेस' (Terminal Heat Stress) पैदा होता है। इससे प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की प्रक्रिया बाधित होती है और दाना पूरी तरह भरने से पहले ही सूखने लगता है। इसका परिणाम यह होता है कि दाना छोटा और हल्का रह जाता है, जिससे प्रति एकड़ पैदावार में 10 से 15 प्रतिशत की भारी गिरावट आ सकती है।
हरियाणा और पंजाब : रिकॉर्ड बुवाई और प्रशासनिक तैयारी
इस साल देश में कुल 334.17 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई हुई है। हरियाणा में करीब 24.48 लाख हेक्टेयर और पंजाब में 34.89 लाख हेक्टेयर में फसल लहलहा रही है।
हरियाणा सरकार ने 'मेरी फसल-मेरा ब्यौरा' पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया है। वहीं, किसान संगठनों ने गर्मी से होने वाले संभावित नुकसान के लिए विशेष गिरदावरी और मुआवजे की मांग भी उठा दी है।
पंजाब राज्य सरकार ने 1 अप्रैल से खरीद शुरू करने के लिए केंद्र से कैश क्रेडिट लिमिट (CCL) की मंजूरी की प्रक्रिया तेज कर दी है। पंजाब का लक्ष्य 132 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का है और मंडियों में बारदाने (Jute Bags) की सप्लाई शुरू कर दी गई है।
पावर डिमांड (Power Demand) में उछाल और सिंचाई संकट
गर्मी से फसल बचाने के लिए किसानों ने सिंचाई तेज कर दी है, जिससे बिजली की मांग में 25 प्रतिशत का उछाल आया है। ग्रामीण क्षेत्रों में अघोषित कट (Unscheduled cuts) लग रहे हैं, जिससे समय पर सिंचाई करना चुनौती बन गया है। हालांकि, हरियाणा में 10 पैसे प्रति यूनिट की दर बरकरार रहना किसानों के लिए बड़ी राहत है।
निर्यात नीति और आपकी जेब पर असर
केंद्र ने हाल ही में 25 लाख टन गेहूं के निर्यात (Export) की अनुमति दी थी, लेकिन कम पैदावार की आशंका ने नीति निर्माताओं को चिंता में डाल दिया है। वर्तमान में मंडियों में गेहूं का भाव सरकारी MSP (2,585 रुपये प्रति क्विंटल) से ऊपर चल रहा है। यदि पैदावार गिरती है, तो खुले बाजार में गेहूं और आटे की कीमतों में 20 प्रतिशत तक का उछाल आ सकता है। सिर्फ आटा ही नहीं, गेहूं का तना जल्दी सूखने से तूड़ी के दाम भी 30 प्रतिशत तक उछल सकते हैं, जिससे दूध की कीमतें भी बढ़ेंगी।
एक नज़र में : खेत और मंडी के ताजा आंकडे
बचाव के लिए विशेषज्ञों की 'स्मार्ट' सलाह
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को शाम के समय हल्की सिंचाई करने और 2 प्रतिशत पोटेशियम नाइट्रेट (Potassium Nitrate) का स्प्रे करने की सलाह दी है। साथ ही, नमी और गर्मी के कारण 'येलो रस्ट' (Yellow Rust) यानी पीला रतुआ रोग की निगरानी करने को कहा है।

