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Vibrant Villages Programme-II Explained : 1,954 सीमावर्ती गांव, 6,839 करोड़ और 17 राज्य... क्या है केंद्र की यह बड़ी योजना?

वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम-II में सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल कनेक्टिविटी पर जोर; 17 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों के गांव होंगे शामिल

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Vibrant Villages Programme-II Explained : अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से लगे गांवों को केवल सीमा सुरक्षा की दृष्टि से नहीं, बल्कि विकास के केंद्र के रूप में तैयार करने के लिए केंद्र सरकार ने वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम-II (VVP-II) शुरू किया है। इसके तहत 2028-29 तक 1,954 चयनित सीमावर्ती गांवों के व्यापक विकास पर 6,839 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में लिखित जवाब में योजना से जुड़ी ताजा जानकारी दी है।

यह योजना खास इसलिए है क्योंकि इसमें सीमा से लगे गांवों में सिर्फ सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात नहीं है। सरकार का जोर रोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था, पर्यटन, कौशल विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल कनेक्टिविटी को एक साथ मजबूत करने पर है। मकसद यह है कि सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं और आजीविका के अवसर मिलें तथा उन्हें अपने गांव में ही रहने के लिए पर्याप्त प्रोत्साहन मिले।

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क्या है वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम?

वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम को सीमावर्ती इलाकों के विकास और वहां रहने वाली आबादी को मुख्यधारा से जोड़ने की योजना के रूप में समझा जा सकता है। सरकार ने इसका पहला चरण 15 फरवरी, 2023 को मंजूर किया था। VVP-I के तहत उत्तरी सीमा से लगे अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख, सिक्किम और उत्तराखंड के चयनित गांवों को शामिल किया गया।

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पहले चरण में 662 गांवों को प्राथमिकता के आधार पर व्यापक विकास के लिए चिन्हित किया गया था। इसके बाद सरकार ने योजना का दायरा बढ़ाते हुए VVP-II को मंजूरी दी। दूसरे चरण में उत्तरी सीमा को छोड़कर अन्य अंतरराष्ट्रीय भूमि सीमाओं से लगे क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

VVP-II में कितना पैसा और कितने गांव?

VVP-II को 2 अप्रैल, 2025 को केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में मंजूरी दी गई थी। इसमें 100 प्रतिशत केंद्रीय वित्त पोषण का प्रावधान है। योजना का कुल परिव्यय 6,839 करोड़ रुपये है और इसे वित्त वर्ष 2028-29 तक लागू किया जाना है।

इसके तहत अंतरराष्ट्रीय भूमि सीमाओं से लगे ब्लॉकों में स्थित 1,954 चयनित गांवों को शामिल किया गया है। ये गांव 15 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में हैं।

योजना के दायरे में अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।

किन क्षेत्रों में होगा काम?

VVP-II को केवल निर्माण परियोजनाओं की योजना नहीं बनाया गया है। इसमें गांवों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कई क्षेत्रों को एक साथ जोड़ा गया है।

  • 1. रोजगार और आजीविका:

    गांवों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने पर जोर रहेगा। कृषि, बागवानी, पर्यटन और अन्य स्थानीय गतिविधियों से जुड़े अवसरों को बढ़ावा दिया जाएगा।

  • 2. सड़क संपर्क:

    जिन गांवों तक सड़क संपर्क पर्याप्त नहीं है, वहां कनेक्टिविटी बेहतर करने का प्रावधान है। सीमावर्ती क्षेत्रों में बेहतर सड़कें स्थानीय लोगों के साथ-साथ प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

  • 3. बिजली और ऊर्जा:

    गांवों के विद्युतीकरण के साथ ऊर्जा से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा। योजना में नवीकरणीय ऊर्जा को भी शामिल किया गया है।

  • 4. स्वास्थ्य सुविधाएं:

    गांवों के बुनियादी ढांचे के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य सीमावर्ती आबादी को जरूरी सेवाओं के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों पर निर्भरता कम करना है।

  • 5. शिक्षा:

    शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना भी योजना का हिस्सा है। इससे सीमावर्ती गांवों में बच्चों और युवाओं के लिए बेहतर अवसर तैयार करने की कोशिश होगी।

  • 6. युवाओं का कौशल विकास:

    युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और उद्यमिता से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा, ताकि रोजगार के स्थानीय विकल्प बढ़ सकें।

  • 7. स्वयं सहायता समूह और सहकारी संस्थाएं:

    SHG, सहकारी समितियों और किसान उत्पादक संगठनों यानी FPO को बढ़ावा देकर स्थानीय लोगों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की योजना है। इन संस्थाओं को आजीविका के अवसरों के प्रबंधन और बनाई गई परिसंपत्तियों के रखरखाव में भी भूमिका दी जा सकती है।

पर्यटन भी बनेगा रोजगार का साधन

सीमावर्ती गांवों में पर्यटन की संभावनाओं को भी योजना में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। स्थानीय संस्कृति, प्राकृतिक संसाधनों और पर्यटन स्थलों को विकसित कर रोजगार के अवसर पैदा करने का प्रयास होगा।

VVP-I के तहत पर्यटन से जुड़े 263 प्रोजेक्टों के लिए 116 करोड़ रुपये की मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें व्यू-प्वाइंट, एडवेंचर टूरिज्म, इको-टूरिज्म, इको-रिसॉर्ट, ट्रेक रूट और पर्यटन केंद्र जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।

इस अनुभव का इस्तेमाल दूसरे चरण में भी किया जा सकता है। इसका सीधा लाभ स्थानीय युवाओं, छोटे कारोबारियों, होम-स्टे संचालकों, हस्तशिल्प से जुड़े लोगों और अन्य सेवा प्रदाताओं को मिल सकता है।

डिजिटल कनेक्टिविटी क्यों महत्वपूर्ण?

दूरदराज के सीमावर्ती गांवों में डिजिटल कनेक्टिविटी की कमी शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग और सरकारी सेवाओं तक पहुंच को प्रभावित कर सकती है। इसलिए VVP-II में टीवी और दूरसंचार कनेक्टिविटी को भी प्रमुख क्षेत्र बनाया गया है।

बेहतर डिजिटल नेटवर्क से ग्रामीणों को ऑनलाइन बैंकिंग, सरकारी योजनाओं, डिजिटल शिक्षा और अन्य सेवाओं तक पहुंच आसान हो सकती है। इससे सीमावर्ती गांवों को बाकी देश से जोड़ने में भी मदद मिलेगी।

सीमा सुरक्षा से कैसे जुड़ा है कार्यक्रम?

वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम का एक महत्वपूर्ण पहलू इसका सुरक्षा से जुड़ा उद्देश्य है। सरकार का मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में बेहतर जीवन स्थितियां और पर्याप्त आजीविका के अवसर उपलब्ध होने से लोगों को अपने गांवों में रहने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में आबादी की मौजूदगी मजबूत होगी।

सरकार ने VVP-II को सुरक्षित और मजबूत भूमि सीमाओं के व्यापक दृष्टिकोण से जोड़ा है। कार्यक्रम का उद्देश्य सीमावर्ती आबादी को देश के साथ अधिक मजबूती से जोड़ना और वहां रहने की परिस्थितियों में सुधार करना है।

VVP-I से क्या मिला?

दूसरे चरण को समझने के लिए पहले चरण की प्रगति महत्वपूर्ण है। फरवरी 2026 में सरकार ने बताया था कि VVP-I के तहत मंत्रालय और विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों व विभागों के साथ समन्वय से 2,558 परियोजनाओं/कार्यों को मंजूरी दी गई थी, जिनकी कुल स्वीकृत लागत 3,431 करोड़ रुपये थी।

VVP-I के तहत जागरूकता अभियान, सेवा वितरण शिविर, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, स्वास्थ्य एवं पशु चिकित्सा शिविर, मेले-त्योहार और पर्यटन गतिविधियों समेत 8,500 से अधिक गतिविधियां भी आयोजित की गई थीं।

इससे संकेत मिलता है कि सरकार दूसरे चरण में केवल स्थायी ढांचा खड़ा करने के बजाय गांवों में आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों को भी बढ़ाने पर जोर दे रही है।

VVP-II में निगरानी कैसे होगी?

कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में हाई-पावर्ड कमेटी (HPC) के गठन को मंजूरी दी है। इसमें गृह सचिव, सीमा प्रबंधन सचिव, व्यय सचिव और संबंधित मंत्रालय या विभाग के सचिव शामिल होंगे।

यह समिति विभिन्न मंत्रालयों की योजनाओं के दिशा-निर्देशों में आवश्यक छूट या बदलाव की सुविधा उपलब्ध कराने का काम करेगी, ताकि सीमावर्ती गांवों में VVP-II के तहत परियोजनाओं को लागू करने में प्रशासनिक अड़चनें कम हों।

पंजाब के लिए क्यों महत्वपूर्ण?

VVP-II में पंजाब भी शामिल है। राज्य की अंतरराष्ट्रीय सीमा पाकिस्तान से लगती है और सीमा से लगे गांवों के लिए सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं महत्वपूर्ण हैं।

योजना का उद्देश्य केवल बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि सीमावर्ती गांवों में ऐसी स्थानीय अर्थव्यवस्था विकसित करना है जिससे लोगों को रोजगार के लिए बड़े शहरों की ओर जाने की जरूरत कम हो। पर्यटन, कृषि, सहकारिता, कौशल विकास और छोटे कारोबार इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

असली चुनौती क्या होगी?

योजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल पैसा खर्च करना नहीं, बल्कि 6,839 करोड़ रुपये का प्रभावी और समयबद्ध इस्तेमाल करना होगी। अलग-अलग राज्यों में सीमावर्ती गांवों की भौगोलिक परिस्थितियां, आबादी, रोजगार के साधन और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति अलग है। इसलिए एक जैसी योजना के बजाय स्थानीय जरूरत के हिसाब से परियोजनाओं को लागू करना महत्वपूर्ण होगा।

सरकार ने भी VVP-II में क्षेत्र-विशिष्ट हस्तक्षेप पर जोर दिया है। यानी जिस गांव में सड़क की जरूरत अधिक है, वहां कनेक्टिविटी प्राथमिकता हो सकती है, जबकि किसी दूसरे गांव में पर्यटन, कौशल विकास या स्वास्थ्य सुविधाओं पर अधिक ध्यान दिया जा सकता है।

बड़ा सवाल : क्या गांवों से पलायन रुकेगा?

VVP-II की सफलता का सबसे अहम पैमाना यही होगा कि क्या इससे सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों की जिंदगी और आय में वास्तविक सुधार आता है। यदि सड़क, बिजली, इंटरनेट, स्वास्थ्य और शिक्षा के साथ स्थानीय रोजगार भी उपलब्ध होता है, तो गांवों से पलायन कम करने में मदद मिल सकती है।

यानी सरकार की योजना में विकास और सुरक्षा को एक-दूसरे से जोड़ने की कोशिश है। मजबूत बुनियादी ढांचा, स्थानीय रोजगार और बेहतर जीवन सुविधाएं सीमावर्ती गांवों को केवल सीमा पर बसे गांवों के बजाय विकास की सक्रिय इकाइयों में बदल सकती हैं। -एजेंसी इनपुट के साथ

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