Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
Add Tribune As Your Trusted Source
search-icon-img
Advertisement

Uttarakhand Homestay Scheme: पहाड़ों में घर से कमाई का मौका, 15 लाख तक सब्सिडी; जानिए आवेदन से लेकर रजिस्ट्रेशन तक पूरी जानकारी

6,500 के करीब प्रवासी गांव लौटे, 22 फीसदी से अधिक ने अपनाया होम स्टे; दीनदयाल उपाध्याय योजना में पहाड़ों में 50 फीसदी तक सब्सिडी

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
Advertisement

उत्तराखंड सरकार पहाड़ी गांवों में पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए होम स्टे को प्रोत्साहित कर रही है। दीनदयाल उपाध्याय गृह आवास (होम स्टे) विकास योजना का उद्देश्य स्थानीय लोगों को अपने घरों या भवनों को पर्यटकों के ठहरने के लिए विकसित करने का अवसर देना है। सरकार की योजना ग्रामीण पर्यटन को बढ़ाने और पलायन को रोकने के प्रयासों से भी जुड़ी है।

कितने लोग होम स्टे से जुड़े?

सरकार के अनुसार, राज्य में अब तक करीब 6,500 प्रवासी अपने गांव लौटे हैं। इनमें 22 फीसदी से अधिक लोगों ने होम स्टे व्यवसाय को अपनाया है। प्रदेश में लगभग 5,000 से अधिक होम स्टे संचालित होने का अनुमान है। इससे गांवों में पर्यटकों के ठहरने की सुविधा बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

Advertisement

कितनी मिलती है सब्सिडी?

दीनदयाल उपाध्याय होम स्टे विकास योजना के तहत निर्माण या विकास लागत पर क्षेत्र के आधार पर सब्सिडी का प्रावधान है।

Advertisement

पर्वतीय क्षेत्र: परियोजना लागत की 50 फीसदी तक सब्सिडी, अधिकतम 15 लाख रुपये।

मैदानी क्षेत्र: परियोजना लागत की 25 फीसदी तक सब्सिडी, अधिकतम 7.50 लाख रुपये।

सरकारी पर्यटन पोर्टल पर भी दीनदयाल उपाध्याय गृह आवास विकास योजना को स्थानीय लोगों के लिए ग्रामीण पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा देने वाली योजना के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

अब तक कितनी सरकारी सहायता दी गई?

सरकार के अनुसार, पिछले चार वर्षों में 537 लाभार्थियों को 79 करोड़ 28 लाख 18 हजार रुपये की धनराशि होम स्टे निर्माण के लिए अनुदान के रूप में दी जा चुकी है।इसके अलावा ‘ट्रेकिंग ट्रैक्शन सेंटर होम स्टे अनुदान योजना’ के तहत भी बीते चार वर्षों में 258 पात्र लोगों को लाभ दिया गया है। इसका उद्देश्य ट्रेकिंग और पर्यटन क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाना है।

जादुंग गांव में होम स्टे क्लस्टर

उत्तरकाशी जिले में भारत-चीन सीमा के पास स्थित जादुंग गांव को होम स्टे क्लस्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां छह होम स्टे का निर्माण अंतिम चरण में बताया गया है।

1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान सामरिक कारणों से नेलांग और जादुंग गांव खाली करा दिए गए थे। अब दोनों गांव केंद्र सरकार के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम में शामिल हैं। ऐसे में होम स्टे के जरिए इन सीमांत गांवों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाने की योजना है।

कौन ले सकता है योजना का लाभ?

दीनदयाल उपाध्याय होम स्टे विकास योजना पूरे उत्तराखंड में लागू है, हालांकि नगर निगम और नगर पालिका क्षेत्रों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। स्थानीय लोग अपने घर में पर्यटकों के लिए निर्धारित सुविधाएं विकसित कर होम स्टे शुरू कर सकते हैं। पुराने भवन का नवीनीकरण करके भी उसे होम स्टे के रूप में विकसित किया जा सकता है।

होम स्टे के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी

होम स्टे का निर्माण या पुराने भवन के नवीनीकरण के बाद उसे उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (UTDB) में पंजीकृत कराना अनिवार्य है। उत्तराखंड पर्यटन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर होम स्टे रजिस्ट्रेशन और संबंधित नीतियों के लिए अलग व्यवस्था उपलब्ध है।

आवेदन कैसे करें?

योजना के लिए आवेदन उत्तराखंड सरकार के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किया जाता है।

आवेदन प्रक्रिया इस तरह है—

1. ऑनलाइन आवेदन:

आवेदक को संबंधित सरकारी पोर्टल पर योजना के लिए आवेदन करना होता है।

2. समिति के सामने साक्षात्कार:

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति आवेदक और परियोजना का परीक्षण करती है।

3. प्रस्ताव की स्वीकृति:

समिति की स्वीकृति के बाद प्रस्ताव को आगे की प्रक्रिया के लिए भेजा जाता है।

4. बैंक से ऋण स्वीकृति:

आवेदन को ऋण स्वीकृति के लिए संबंधित बैंक को भेजा जाता है।

5. निर्माण/नवीनीकरण:

ऋण और योजना के नियमों के अनुसार होम स्टे का निर्माण या पुराने भवन का नवीनीकरण किया जाता है।

6. पर्यटन विभाग में पंजीकरण:

निर्माण पूरा होने के बाद होम स्टे का पर्यटन विभाग में पंजीकरण कराया जाता है।

गांवों की अर्थव्यवस्था को कैसे मिल सकती है मजबूती?

होम स्टे का सबसे बड़ा प्रभाव सिर्फ मकान मालिक की आय तक सीमित नहीं रहता। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने पर स्थानीय भोजन, कृषि उत्पाद, हस्तशिल्प, परिवहन, गाइड, ट्रेकिंग और अन्य सेवाओं की मांग भी बढ़ सकती है।

इस तरह होम स्टे को ग्रामीण पर्यटन की ऐसी कड़ी के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें पर्यटन, रोजगार, स्थानीय उत्पाद और स्वरोजगार एक साथ जुड़ते हैं। उत्तराखंड पर्यटन विभाग भी होम स्टे को स्थानीय परिवारों के साथ पर्यटकों के सांस्कृतिक और स्थानीय अनुभव से जोड़ता है।

सरकार का फोकस क्या है?

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार, सरकार का लक्ष्य पर्यटन को गांव-गांव तक पहुंचाना है, ताकि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हों और गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत हो।

होम स्टे योजना इसी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें पर्यटकों को होटल के बजाय स्थानीय परिवारों के बीच रहने का अनुभव मिलता है और ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन का आर्थिक लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।

Advertisement
×