'सुप्रीम' फैसले के बाद US टैरिफ घटा, क्या भारत को फिर से तय करनी चाहिए ट्रेड डील की शर्तें?
India-US Trade Deal: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत-अमेरिका टैरिफ-क्या बदला?
India-US Trade Deal: अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापक वैश्विक टैरिफ आदेश को रद्द किए जाने के बाद, अमेरिका ने नया अस्थायी आयात अधिभार लागू किया है। इसके तहत भारत पर लगने वाला पारस्परिक (रेसिप्रोकल) टैरिफ अब 25 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत रह जाएगा। व्हाइट हाउस ने 20 फरवरी की तारीख वाला एक प्रोक्लेमेशन जारी किया है। नीचे समझिए कि इस घोषणा का भारतीय कंपनियों के लिए क्या मतलब है:
टैरिफ क्या होता है?
टैरिफ या आयात शुल्क वह कर है, जो कोई देश दूसरे देश से आयात किए गए सामान पर लगाता है। आयातक को यह शुल्क सरकार को देना होता है। आमतौर पर कंपनियां यह अतिरिक्त लागत उपभोक्ताओं पर डाल देती हैं। इससे आयातित वस्तुएं महंगी हो जाती हैं।
पारस्परिक टैरिफ (Reciprocal Tariffs – RT) क्या हैं?
यह शब्द सबसे पहले अमेरिका ने इस्तेमाल किया। 2 अप्रैल 2025 को ट्रंप प्रशासन ने भारत सहित करीब 60 देशों पर ये शुल्क लगाए थे। इसका उद्देश्य अमेरिकी निर्यातकों को समान अवसर (लेवल प्लेइंग फील्ड) देना था। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई देश अमेरिकी उत्पादों पर X प्रतिशत शुल्क लगाता है, तो अमेरिका भी उस देश से आने वाले उत्पादों पर उतना ही शुल्क लगाएगा। ये शुल्क मौजूदा एमएफएन (Most Favoured Nation) दरों के ऊपर अतिरिक्त रूप से लगाए जाते हैं।
भारत पर आरटी की वर्तमान स्थिति क्या है?
- 2 अप्रैल 2025: अमेरिका ने भारत पर 26% पारस्परिक टैरिफ घोषित किया।
- जुलाई 2025: इसे 25% कर दिया गया, जो 7 अगस्त 2025 से लागू हुआ।
- अगस्त 2025: रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण भारत पर अतिरिक्त 25% दंडात्मक शुल्क लगाया गया, जिससे कुल आरटी 50% हो गया।
- फरवरी 2026: अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे पर सहमति के बाद, अमेरिका ने आरटी को 18% करने और अतिरिक्त 25% दंडात्मक शुल्क हटाने की घोषणा की, हालांकि यह लागू नहीं हुआ।
- अब, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, 24 फरवरी 2026 से 150 दिनों के लिए अमेरिका सभी देशों पर 10% का अस्थायी आयात अधिभार लगाएगा। इससे भारत पर लागू 25% आरटी की जगह 10% अतिरिक्त शुल्क लागू होगा।
उदाहरण
यदि किसी उत्पाद पर अमेरिका में 5% एमएफएन शुल्क है, तो अब उस पर 10% अतिरिक्त लगेगा। यानी कुल शुल्क 15% होगा। पहले यह 5% + 25% = 30% था। ट्रंप के 20 फरवरी के प्रोक्लेमेशन में कहा गया, “मैं 24 फरवरी 2026 से 150 दिनों की अवधि के लिए अमेरिका में आयातित वस्तुओं पर 10% का अस्थायी आयात अधिभार लागू करता हूं।”
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता
पहले चरण के द्विपक्षीय व्यापार समझौते के कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए भारतीय टीम 23 फरवरी 2026 से वॉशिंगटन में अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात करेगी। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 20 फरवरी को कहा कि समझौता अगले महीने हस्ताक्षरित हो सकता है और अप्रैल से लागू हो सकता है।
विशेषज्ञों की राय
थिंक टैंक GTRI के अनुसार, चूंकि भारत पर आरटी 25% से घटकर 10% हो गया है, इसलिए भारत को अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की शर्तों की दोबारा समीक्षा करनी चाहिए। GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, “सौदे दान नहीं होते। दोनों पक्षों को लाभ होना चाहिए। अब भारत के लाभ का फिर से मूल्यांकन जरूरी है।”
ट्रंप का बयान
ट्रंप ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद भारत के साथ व्यापार समझौते में कोई बदलाव नहीं होगा।
किन वस्तुओं को छूट?
व्हाइट हाउस की फैक्ट शीट के अनुसार कुछ वस्तुओं को अस्थायी आयात शुल्क से छूट दी गई है, जिनमें शामिल हैं कुछ महत्वपूर्ण खनिज
मुद्रा व बुलियन में उपयोग होने वाली धातुएं, ऊर्जा और ऊर्जा उत्पाद, प्राकृतिक संसाधन और उर्वरक, कुछ कृषि उत्पाद (बीफ, टमाटर, संतरा), दवाएं और फार्मा सामग्री, कुछ इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं, यात्री वाहन और कुछ ऑटो पार्ट्स, कुछ एयरोस्पेस उत्पाद। वहीं, स्टील, एल्युमीनियम, कॉपर पर 50% तथा कुछ ऑटो कंपोनेंट्स पर 25% सेक्टोरल टैरिफ जारी रहेंगे।
अमेरिका टैरिफ क्यों लगा रहा है?
अमेरिका का आरोप है कि भारत के साथ उसका बड़ा व्यापार घाटा है। उसका कहना है कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर अधिक शुल्क लगाता है, जिससे अमेरिकी निर्यात प्रभावित होता है।
द्विपक्षीय व्यापार स्थिति
- 2021-25 के दौरान अमेरिका भारत का सबसे बड़ा वस्तु व्यापार साझेदार रहा।
- 2024-25 में कुल द्विपक्षीय व्यापार: 186 अरब डॉलर
- निर्यात: 86.5 अरब डॉलर
- आयात: 45.3 अरब डॉलर
- भारत का अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष: 41 अरब डॉलर
- सेवाओं में भारत का अधिशेष: 3.2 अरब डॉलर
- कुल व्यापार अधिशेष: लगभग 44.4 अरब डॉलर
प्रमुख व्यापारिक वस्तुएं
भारत से अमेरिका को निर्यात:
- दवाएं और जैविक उत्पाद
- दूरसंचार उपकरण
- कीमती पत्थर
- पेट्रोलियम उत्पाद
- ऑटो कंपोनेंट्स
- सोने के आभूषण
- रेडीमेड वस्त्र
- लोहा और इस्पात उत्पाद
अमेरिका से भारत को आयात
- कच्चा तेल
- पेट्रोलियम उत्पाद
- कोयला
- हीरे
- इलेक्ट्रिक मशीनरी
- विमान और उनके पुर्जे
- सोना
सेवाओं के क्षेत्र में, 2024 में अमेरिका ने भारत से 40.6 अरब डॉलर की सेवाएं आयात कीं, जिनमें कंप्यूटर/आईटी सेवाएं और बिजनेस कंसल्टिंग प्रमुख रहे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 10% का अस्थायी वैश्विक अधिभार भारत के लिए राहत लेकर आया है। हालांकि, सेक्टोरल टैरिफ जारी हैं और व्यापार समझौते की शर्तों पर आगे भी बातचीत जारी रहेगी।

