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ट्रंप ने H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर का शुल्क एक साल और बढ़ाया, भारतीय कर्मचारियों पर भी असर

व्हाइट हाउस ने 21 सितंबर 2027 तक बढ़ाया प्रावधान; H-1B आवेदनों की जांच होगी सख्त, अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी करने वाली कंपनियों पर भी नजर

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। रॉयटर्स फोटो
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा के जरिये विदेशी कर्मचारियों को अमेरिका लाने वाले नियोक्ताओं पर लगाए गए एक लाख अमेरिकी डॉलर के शुल्क को एक साल के लिए बढ़ा दिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय 'व्हाइट हाउस' ने यह जानकारी दी।

ट्रंप ने शुक्रवार को जारी राष्ट्रपति की घोषणा में कहा कि 2025 में एक लाख अमेरिकी डॉलर का शुल्क लगाने के फैसले के बाद बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों द्वारा H-1B वीजा के लिए पंजीकरण में 92 प्रतिशत की कमी आई है।

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ट्रंप ने कहा, ''2025 की घोषणा की अवधि बढ़ाने से अमेरिका के आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा जारी रहेगी, अमेरिकी कर्मचारियों और स्नातकों के लिए श्रम बाजार तक पहुंच बेहतर होगी तथा यह सुनिश्चित होगा कि नियोक्ता कार्यक्रम के मूल उद्देश्य के अनुरूप जरूरत पड़ने पर केवल अत्यधिक कुशल और जरूरी विदेशी कर्मचारियों की ही भर्ती करें।'' अमेरिका के H-1B वीजा कार्यक्रम का लाभ पाने वालों में भारतीय सबसे बड़ा समूह हैं।

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2025 में एक लाख अमेरिकी डॉलर का शुल्क लगाने के फैसले को अदालत में चुनौती दी गई है और यह मामला दो अलग-अलग संघीय अदालतों में विचाराधीन है। शुल्क बढ़ाने संबंधी 2025 के इस आदेश की अवधि इस महीने समाप्त होने वाली थी। यह आदेश उन विदेशी नागरिकों को दिए गए वीजा पर लागू नहीं है जो पहले से छात्र वीजा पर अमेरिका में रह रहे हैं और नए H-1B वीजा पाने वालों में जिनकी बड़ी हिस्सेदारी है। यह मौजूदा वीजा के नवीनीकरण पर भी लागू नहीं था।

राष्ट्रपति ने एक अलग घोषणा भी जारी की है, जिसमें विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के जरिये H-1B वीजा आवेदनों की जांच और कड़ी करने का प्रावधान है। आदेश में विदेश मंत्री, श्रम मंत्री और गृह सुरक्षा मंत्री को निर्देश दिया गया है कि H-1B वीजा आवेदनों पर विचार करते समय वे यह भी देखें कि क्या आवेदनकर्ता नियोक्ता ने समान पदों पर कार्यरत अमेरिकी कर्मचारियों की हाल में छंटनी की है या वह ऐसा करने की योजना बना रहा है।

ट्रंप ने कार्यकारी आदेश में कहा कि H-1B गैर प्रवासी वीजा कार्यक्रम की शुरुआत अत्यधिक विशिष्ट कौशल वाले विदेशी अस्थायी कर्मचारियों की पहचान करने और अमेरिकी अर्थव्यवस्था की जरूरतों को रणनीतिक रूप से पूरा करने के लिए की गई थी। ट्रंप ने कहा, ''इसके बजाय कुछ नियोक्ताओं, तीसरे पक्ष के जरिये कर्मचारियों की नियुक्ति करने वाले समूहों और आउटसोर्सिंग कंपनियों ने अमेरिकी कुशल श्रमिकों को कम वेतन देने और उन्हें नौकरियों से निकालने के लिए इस कार्यक्रम का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया है।''

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