Tribune Flyover Project: चंडीगढ़ की पहचान बनाम ट्रैफिक समाधान, परियोजना पर फिर कानूनी घेरा, ‘ओवरलूप’ विकल्प पर बहस तेज
Tribune Flyover Project: 700 पेड़ों की कटाई, मास्टर प्लान उल्लंघन और पारदर्शिता पर हाईकोर्ट में सवाल; पूर्व मुख्य वास्तुकार ने परियोजना को बताया ‘अल्पदृष्टि वाला समाधान’
Tribune Flyover Project: चंडीगढ़ प्रशासन जहां 247 करोड़ की ट्रिब्यून फ्लाईओवर परियोजना को सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी को औपचारिक रूप से सौंपने की तैयारी में है, वहीं इस परियोजना को अदालत, शहरी योजनाकारों और शहर के पूर्व वास्तु विशेषज्ञों से नए और मजबूत विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट इस मामले की निगरानी कर रहा है। याचिकाकर्ताओं ने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई, मास्टर प्लान उल्लंघन और वैकल्पिक डिजाइनों के मूल्यांकन में पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दों को लेकर परियोजना को चुनौती दी है।
‘ओवरलूप’ विकल्प क्या है?
शहर के वास्तुकार और शहरी योजनाकार पर्ल अहलूवालिया और आश्रय आहूजा की संस्था यूआरएपी (Urban Research and Architecture Practice) ने “द ओवरलूप” नामक वैकल्पिक डिजाइन पेश किया है।
यह मौजूदा ट्रिब्यून चौक राउंडअबाउट के ऊपर एक एलिवेटेड रोटरी का प्रस्ताव है, जिससे ट्रैफिक को दो स्तरों पर विभाजित कर सिग्नल-फ्री आवाजाही सुनिश्चित की जा सकती है। डिजाइनरों का दावा है कि इससे ट्रैफिक क्षमता करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ेगी और मौजूदा फ्लाईओवर योजना के तहत प्रस्तावित लगभग 700 पेड़ों की जगह केवल 65 पेड़ों की कटाई करनी पड़ेगी।
वास्तुकारों का कहना है कि “शहरी गतिशीलता का उद्देश्य कारों को नहीं, बल्कि लोगों को सुचारु रूप से आगे बढ़ाना होना चाहिए।” उनका आरोप है कि मौजूदा फ्लाईओवर योजना पुरानी सोच पर आधारित है और दुनिया भर के अनुभव बताते हैं कि शहरों के भीतर बने फ्लाईओवर अक्सर ट्रैफिक कम करने के बजाय बढ़ा देते हैं।
यूआरएपी ने दावा किया कि उन्होंने चंडीगढ़ के अगले 50 वर्षों के लिए मास्टर प्लान तैयार करने में तीन साल लगाए। “द ओवरलूप” उसी योजना का हिस्सा है, जिसे 2019 में यूटी प्रशासन के सामने प्रस्तुत किया गया था और दो अंतिम डिजाइनों में शामिल किया गया था। हालांकि उनका आरोप है कि बाद में मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रही।
Tribune Flyover Project: 700 पेड़ों की कटाई पर विवाद
परियोजना के विरोध का सबसे बड़ा कारण ट्रिब्यून चौक कॉरिडोर में लगभग 700 परिपक्व पेड़ों की प्रस्तावित कटाई है। हाई कोर्ट में दायर हलफनामों में कहा गया है कि जिन 17 आम के पेड़ों को काटा जाना है, वे हेरिटेज ग्रेड-1 श्रेणी वाले बाग का हिस्सा हैं।
वास्तुकारों का कहना है कि नए पौधे लगाना पर्याप्त मुआवजा नहीं हो सकता। उनके अनुसार, “यह ऐसा है जैसे गोली के घाव पर सिर्फ बैंड-एड लगा दिया जाए।” उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ की हरियाली और वृक्ष-पंक्तियां शहर की मूल पहचान का हिस्सा हैं, जिन्हें ली कार्बुजिए की मूल योजना में विशेष महत्व दिया गया था।
Tribune Flyover Project: मास्टर प्लान उल्लंघन का आरोप
याचिकाकर्ताओं का दावा है कि यह परियोजना चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 के खिलाफ है। मास्टर प्लान शहर के भीतर फ्लाईओवर निर्माण की अनुशंसा नहीं करता और हरित क्षेत्र संरक्षण को प्राथमिकता देता है। अमिकस क्यूरी तनु बेदी ने अदालत में दलील दी कि 1.6 किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर मास्टर प्लान की मूल अवधारणा के अनुरूप नहीं है।
Tribune Flyover Project: पूर्व मुख्य वास्तुकार भी विरोध में
चंडीगढ़ की पूर्व मुख्य वास्तुकार सुमित कौर लगातार इस परियोजना का विरोध कर रही हैं। उन्होंने इसे “अल्पदृष्टि और अस्थायी समाधान” बताते हुए कहा कि यह शहर की विशिष्ट शहरी पहचान को नुकसान पहुंचाएगा और ट्रैफिक जाम को केवल एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करेगा। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने, मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (MRTS) विकसित करने और रिंग रोड बनाने जैसे विकल्प सुझाए हैं।
Tribune Flyover Project: प्रशासन का पक्ष
यूटी प्रशासन का कहना है कि ट्रिब्यून चौक पर प्रतिदिन 1.5 लाख से अधिक वाहन गुजरते हैं और फ्लाईओवर ट्रैफिक जाम कम करने के लिए बेहद जरूरी है। प्रशासन ने बताया कि अप्रैल 2024 में हाईकोर्ट द्वारा पेड़ों की कटाई पर लगी रोक हटाई जा चुकी है और सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट में दायर चुनौतियां भी खारिज हो चुकी हैं।
प्रशासन ने सिंगला कंस्ट्रक्शन लिमिटेड (Singla Constructions Limited) को 147.98 करोड़ की सबसे कम बोली (L1) देने वाली कंपनी के रूप में चुना है। अब सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की अंतिम मंजूरी का इंतजार है।
Tribune Flyover Project: परियोजना से जुड़े प्रमुख तथ्य
- कुल लागत: 247.07 करोड़ रुपये
- अनुमानित लागत: 214.66 करोड़ रुपये
- एल1 बोली: 147.98 करोड़ रुपये
- लंबाई: 1.65 किलोमीटर
- फ्लाईओवर लंबाई: 1,442 मीटर
- अंडरपास लंबाई: 519 मीटर
- निर्माण अवधि: 30 महीने
- प्रतिदिन ट्रैफिक: 1.5 लाख वाहन

