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चंडीगढ़ के इतिहास का सबसे बड़ा बैंक घोटाला; 117 करोड़ फर्जीवाड़े में फंसी स्मार्ट सिटी और निगम, परत-दर-परत समझें पूरा खेल

यह घोटाला तब सामने आया जब करोड़ों की राशि बैंक रिकॉर्ड से गायब मिली

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चंडीगढ़ नगर निगम और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड के सरकारी खजाने में हुआ 117 करोड़ रुपये का महाघोटाला केवल एक वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि सिस्टम की आंखों में धूल झोंकने का सबसे दुस्साहसिक प्रयास है। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32 शाखा के इर्द-गिर्द बुने गए इस जाल ने चंडीगढ़ प्रशासन से लेकर आम जनता तक को हिला कर रख दिया है। यह घोटाला तब सामने आया जब करोड़ों की राशि बैंक रिकॉर्ड से गायब मिली और जो एफडीआर (FDR) निगम के पास थे, उन्हें बैंक ने महज काग का टुकड़ा बता दिया।

कैसे हुआ शहर के सबसे बड़े घोटाले का खुलासा?

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हैरानी की बात यह है कि नगर निगम का अपना कोई इंटरनल विजिलेंस या ऑडिट मैकेनिज्म इस खेल को नहीं पकड़ सका। इस घोटाले की गूंज तब सुनाई दी जब फरवरी 2026 में हरियाणा सरकार के फंड्स में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में हुई गड़बड़ी की खबरें समाचार पत्रों में प्रमुखता से छपीं। इन खबरों से सतर्क होकर नगर निगम के अधिकारियों ने मार्च 2025 में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट बंद होने के समय खोले गए एक कंसोलिडेशन खाते (संख्या 99988877765) की जांच शुरू की।

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जब निगम अधिकारी 108.73 करोड़ रुपये की एफडीआर भुनाने और शेष राशि को पंजाब नेशनल बैंक में ट्रांसफर करवाने सेक्टर-32 स्थित बैंक शाखा पहुंचे, तो बैंक का जवाब चौंकाने वाला था। बैंक ने मौखिक रूप से कहा कि सिस्टम में इन एफडीआर का कोई अस्तित्व ही नहीं है और ये पूरी तरह फर्जी हैं।

फर्जी एफडीआर और बैंक स्टेटमेंट का मायाजाल

जांच में यह साफ हो गया कि यह घोटाला बेहद सोची-समझी साजिश का परिणाम था। इसमें फर्जी बैंक स्टेटमेंट से लेकर जाली मुहरों तक का इस्तेमाल किया गया।

रिकॉर्ड में हेराफेरी: अप्रैल 2025 में जब स्मार्ट सिटी लिमिटेड (CSCL) को बंद कर उसका रिकॉर्ड नगर निगम को सौंपा जा रहा था, तब अधिकारियों को बैंक स्टेटमेंट की कॉपी दी गई थी।

फर्जी रसीदें: जांच में पाया गया कि 1,16,84,01,664.37 रुपये की कुल 11 एफडीआर, जिन्हें निगम 'लाइव एसेट' मानकर बैठा था, बैंक के रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं थीं।

शाखा प्रबंधक की भूमिका: ये तमाम फर्जी एफडीआर उसी दौरान जारी किए गए जब ऋषभ ऋषि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के सेक्टर-32 शाखा के प्रबंधक थे।

25 फरवरी 2026 को बैंक के क्षेत्रीय और क्लस्टर प्रमुखों ने नगर निगम अधिकारियों के साथ बैठक कर आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया कि 22 अप्रैल 2025 का बैंक स्टेटमेंट और 116.84 करोड़ रुपये की 11 एफडीआर जाली थीं।

अधिकारियों और शेल कंपनियों का खतरनाक गठजोड़

इस घोटाले में केवल बैंक कर्मचारी ही नहीं, बल्कि नगर निगम और स्मार्ट सिटी के भीतर बैठे 'विभीषणों' की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की जांच में कई शेल कंपनियों (कागजी कंपनियां) के नाम सामने आए हैं, जिनके जरिए पैसा ठिकाने लगाया गया।

संदिग्ध लेनदेन की फेहरिस्त

जांचकर्ताओं ने पाया कि निगम की फाइलों में बिना किसी रिकॉर्ड के करोड़ों रुपये अज्ञात खातों में भेजे गए:

कैपको फिनटेक (CAPCO Fintech): 11 अप्रैल 2025 को दो किस्तों में बड़ी राशि ट्रांसफर की गई।

सनलाइव सोलर सिस्टम (Sunlive Solar System): 1 सितंबर 2025 को एक बड़ी एंट्री की गई।

इन तीनों भुगतानों की कुल राशि 8.22 करोड़ रुपये है, जिसका नगर निगम के पास कोई लेखा-जोखा नहीं है। पुलिस अब इस 'मनी ट्रेल' का पीछा कर रही है कि आखिर यह पैसा किसकी जेब में गया।

बड़ी गिरफ्तारियां और कानूनी कार्रवाई

चंडीगढ़ पुलिस ने 5 मार्च 2026 को नगर निगम की शिकायत पर सेक्टर-17 स्थित आर्थिक अपराध थाने में एफआईआर नंबर 02 दर्ज की। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराएं जैसे 318(4), 338, 336(3), 340(2), 61(2) और 316(5) लगाई गई हैं।

नलिनी मलिक: मुख्य संदिग्ध

अब तक की सबसे बड़ी गिरफ्तारी स्मार्ट सिटी की पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी (CFO) नलिनी मलिक की हुई है। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने आउटसोर्स अकाउंटेंट अनुभव मिश्रा और बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर इन 11 फर्जी एफडीआर को तैयार करने में मुख्य भूमिका निभाई। हालांकि, उनके वकील इन आरोपों को निराधार बता रहे हैं, लेकिन अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

अन्य अधिकारी रडार पर

एनपी शर्मा: स्मार्ट सिटी के पूर्व सीजीएम और नगर निगम के रिटायर्ड चीफ इंजीनियर भी जांच के घेरे में हैं। वे पुलिस जांच में शामिल हो चुके हैं।

निलंबन: नगर निगम ने विभागीय कार्रवाई करते हुए एक अकाउंटेंट और एक सुपरिटेंडेंट को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही वित्त विभाग के अनुभाग अधिकारी (SO) के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

कैग (CAG) का विशेष ऑडिट और रिकवरी की चुनौती

चंडीगढ़ के प्रशासक और पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने इस मामले को तार्किक अंजाम तक ले जाने का संकल्प लिया है। उन्होंने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि लूटी गई एक-एक पाई की वसूली की जाए।

विशेष ऑडिट: निगम आयुक्त ने 16 मार्च 2026 को महानिदेशक लेखापरीक्षा (केंद्रीय) यानी कैग को पत्र लिखकर स्मार्ट सिटी के बंद होने से पहले और बाद के सभी खातों का विशेष ऑडिट करने का अनुरोध किया है।

रिकवरी की स्थिति: हालांकि बैंक ने निगम के पीएनबी खाते में 1,21,14,82,833.37 रुपये जमा करा दिए हैं, लेकिन नगर निगम ने इसे 'फुल एंड फाइनल सेटलमेंट' मानने से इनकार कर दिया है। निगम का कहना है कि ब्याज की राशि और अन्य अनधिकृत भुगतानों की गणना ऑडिट के बाद ही होगी।

क्रेस्ट (CREST) घोटाला: एक ही पैटर्न पर दो वार

उसी बैंक की उसी शाखा (सेक्टर-32) में एक और समानांतर घोटाला सामने आया है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (CREST) के साथ भी 83 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया।

मोडस ऑपरेंडी: यहाँ भी कैपको फिनटेक, आरएस ट्रेडर्स और स्वस्तिक देश प्रोजेक्ट जैसी शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया गया।

गिरफ्तारी: क्रेस्ट के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुखविंदर अबरोल को गिरफ्तार किया गया है। जांच में पता चला कि सरकारी फंड का एक बड़ा हिस्सा उनके और उनके रिश्तेदारों के व्यक्तिगत खातों में ट्रांसफर किया गया था।

बैंक कर्मियों की भूमिका: बैंक अधिकारी ऋषभ ऋषि, अभय कुमार और सीमा धीमन दोनों ही घोटालों (निगम और क्रेस्ट) में मुख्य संदिग्ध के रूप में उभरे हैं।

प्रशासनिक चूक या सोची-समझी साजिश?

यह घोटाला कई गंभीर सवाल खड़े करता है:

निगरानी की कमी: करोड़ों रुपये के लेनदेन का बैंक स्टेटमेंट एक साल तक चेक क्यों नहीं किया गया?

आउटसोर्सिंग का खतरा: एक आउटसोर्स अकाउंटेंट इतने बड़े फंड तक पहुंच बनाने और उसे डाइवर्ट करने में कैसे सफल रहा?

ऑडिट की विफलता: निगम के आंतरिक ऑडिट विभाग को एक साल तक इन फर्जी एंट्रीज की भनक क्यों नहीं लगी?

बुधवार को होने वाली नगर निगम की जनरल हाउस की बैठक में यह मुद्दा गरमाने के आसार हैं। पार्षद इस पर जवाबदेही तय करने और बड़े अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

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