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EXPLAINED हार में जीत : 2026 के रण में कांग्रेस का 'मास्टरस्ट्रोक'

सत्ता बीजेपी के पास, लेकिन रणनीतिक बढ़त कांग्रेस के हाथ ? एक राजनीतिक विश्लेषण

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पांच राज्यों के नतीजों से बदलती सियासी तस्वीर और विपक्ष की नई भूमिका...
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EXPLAINED हार में जीत : ​2026 के विधानसभा चुनाव नतीजों को अगर केवल 'सत्ता' के चश्मे से देखेंगे, तो पलड़ा बीजेपी की ओर झुका नजर आएगा। लेकिन सियासत की बिसात पर असली खिलाड़ी वह होता है जो अपनी खोई हुई जमीन वापस पा ले। इस लिहाज से कांग्रेस इन पांच राज्यों में सबसे बड़ी 'रणनीतिक गेनर' बनकर उभरी है। ​कैसे कांग्रेस ने 'हार' को 'संजीवनी' में बदला, आइए इन 5 बिंदुओं से समझते हैं:

#kerala 10 साल का वनवास खत्म और 'अभेद्य' दक्षिण

​केरलम में कांग्रेस नीत UDF की प्रचंड जीत ने साबित कर दिया है कि दक्षिण भारत में कांग्रेस का किला अब और मजबूत हो गया है। कर्नाटक और तेलंगाना के बाद केरलम का हाथ में आना यह साफ करता है कि बीजेपी के 'दक्षिण अभियान' के सामने कांग्रेस सबसे बड़ी दीवार है। राहुल और प्रियंका गांधी का 'वायनाड प्रभाव' अब राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के मनोबल के लिए टॉनिक का काम करेगा।

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#WestBengal ​: शून्य से 'विकल्प' तक का सफर

​पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने भले ही सरकार बनाई हो, लेकिन कांग्रेस के लिए असली जीत उसकी 2 सीटों और 3% वोट शेयर में है। 2021 में खाता न खोल पाने वाली कांग्रेस ने ममता बनर्जी के कमजोर होते ही विपक्षी शून्य को भरना शुरू कर दिया है। TMC के पतन के बाद, बंगाल का धर्मनिरपेक्ष मतदाता अब वापस 'तिरंगे' की ओर देख रहा है, जो भविष्य में बीजेपी बनाम कांग्रेस की सीधी जंग की जमीन तैयार कर रहा है।

​ #assam : 'ध्रुवीकरण' की राजनीति पर वार

​असम में बदरुद्दीन अजमल (AIUDF) की हार कांग्रेस के लिए किसी जैकपॉट से कम नहीं है। अब तक मुस्लिम वोट बैंक बंटने का सीधा फायदा बीजेपी को मिलता था। लेकिन अब यह वोट बैंक पूरी तरह कांग्रेस के पाले में शिफ्ट हो गया है। राजनीति का 'बाइपोलर' (दो-ध्रुवीय) होना कांग्रेस के लिए राह आसान करेगा, क्योंकि अब कोई तीसरा 'वोट-कटवा' दल मैदान में नहीं बचा है।

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​क्षेत्रीय क्षत्रपों का कमजोर होना और INDIA ब्लॉक का नेतृत्व

​इन चुनावों ने एक बात साफ कर दी है: ममता बनर्जी या अन्य क्षेत्रीय नेता राष्ट्रीय स्तर पर मोदी को चुनौती देने वाले एकमात्र चेहरे नहीं हो सकते। क्षेत्रीय दलों (TMC, DMK) की पकड़ ढीली होने से कांग्रेस अब 'INDIA' गठबंधन में 'पिछलग्गू' के बजाय 'निर्णायक शक्ति' बन गई है। अब विपक्षी राजनीति की धुरी राहुल गांधी और कांग्रेस के इर्द-गिर्द घूमेगी।

EXPLAINED हार में जीत :​ वैचारिक स्पष्टता और कैडर में नई जान

​'भारत जोड़ो न्याय यात्रा 2.0' का असर इन राज्यों में साफ दिखा। कांग्रेस ने सॉफ्ट हिंदुत्व के बजाय अपनी मूल 'सेकुलर और समावेशी' विचारधारा पर दांव लगाया। जाति जनगणना और संविधान बचाने जैसे मुद्दों ने न केवल वोट दिलाए, बल्कि कार्यकर्ताओं को 'डिफेंसिव' से 'ऑफेंसिव' मोड में ला दिया।

अगर सत्ता जीत है, तो बीजेपी जीती है। लेकिन अगर अपनी सियासी जमीन वापस पाना, क्षेत्रीय सहयोगियों पर दबदबा बनाना और भविष्य की संभावनाएं तलाशना जीत है, तो 2026 का यह महासमर कांग्रेस के नाम रहा है। 2029 की राह अब और भी रोमांचक हो गई है, क्योंकि कांग्रेस अब केवल एक पार्टी नहीं, बल्कि बीजेपी के खिलाफ एकमात्र 'पैन-इंडिया' ताकत बनकर उभरी है।

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